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C.M. Boger द्वारा — Materia Medica की सारांश कुंजी

चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक संदर्भ। नीचे दिए गए कथन उल्लिखित लेखक की होम्योपैथिक शिक्षाओं को दर्शाते हैं और उपचार की प्रभावशीलता को प्रमाणित नहीं करते। यह पाठ चिकित्सकीय सलाह नहीं है और इसे उचित निदान या देखभाल का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

क्षेत्र

  • वृक्क।
  • पाचन-तंत्र।
  • निचले अंग।
  • रक्त।

अधिकता

  • दबाव।

राहत

  • प्रचुर मूत्रस्राव।

दुर्बल; आसानी से सर्दी लग जाती है। रक्तस्राव। वृक्क के कार्य-विकार; पुराना वृक्कशोथ; यूरेमिक दमा। .................... कड़वा स्वाद। प्रचुर, अनैच्छिक, श्लेष्मायुक्त मलत्याग। कठिनाई से होने वाला, गहरे रंग का और अल्प अथवा स्वच्छ, दुर्गंधयुक्त मूत्र। वृक्कों के ऊपर दुखन या स्पर्श-वेदना; मंद दर्द; वृक्क फूले हुए-से महसूस होते हैं। वृक्कशोथ; पुराना। मूत्राशयशोथ। पुरःस्थशोथ। कटि में मंद दर्द; इससे उसे पूरे शरीर में अस्वस्थता होती है। निचले अंगों पर सूक्ष्म रक्तस्रावी चकत्ते (Agava); शोफ के साथ। गैंग्रीन; मधुमेहजन्य। एक्ज़िमा; < मूत्र-दमन से।

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