Silicea terra

सिलिसिक अम्ल, Kieselerde।

Timothy F. Allen द्वारा — शुद्ध Materia Medica का विश्वकोश

चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक संदर्भ। नीचे दिए गए कथन उल्लिखित लेखक की होम्योपैथिक शिक्षाओं को दर्शाते हैं और उपचार की प्रभावशीलता को प्रमाणित नहीं करते। यह पाठ चिकित्सकीय सलाह नहीं है और इसे उचित निदान या देखभाल का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

निर्माण-विधि , शुद्ध अवक्षेपित Silica के विचूर्णन।

प्रमाण-स्रोत। (क्रमांक

1 से 7 a , Hahnemann से)।

1 , Hahnemann; 2 , Foissac; 3 , Goullon; 4 , Gross; 5 , Hering; 6 , Stapf; 7 , Wahle; 7 a , "Rl.;" 8 और 9 , Hartlaub और Trinks, R. A. M. L., 3, 218 से; 10 , छोड़ा गया; 11 , Knorre, A. H. Z., 6, 37, अपरिष्कृत S. के 1/4 grain के प्रभाव। (क्रमांक

12 से 26 , Ruoff के औषध-परीक्षणों से, Hygea, 8, 1, 1838); [उच्चतर तनुकरण Hahnemann की विधि से तैयार किए गए थे, सिवाय इसके कि प्रत्येक तनुकरण के लिए 2 से 3 बूँदें प्रयुक्त की गईं; प्रथम, द्वितीय और तृतीय तरल निर्मितियाँ "Spiritus silicæ" से बनाई गईं—9 grains Sil. को 6 drachms Alcohol के साथ पाचित करके, और 2 grains Sil. को 1 drachm Alcohol के साथ पाचित करके भी।]

12 , "N. N.," ने पहले, तीसरे और पाँचवें दिन 30th dil. की 40 बूँदें, बारहवें और चौदहवें दिन 21st dil., सोलहवें दिन 17th dil. की 100 बूँदें तथा उन्नीसवें और बीसवें दिन 5th dil. ली; 13 , O. R. ने पहले, तीसरे और पाँचवें दिन 30th dil., बारहवें और चौदहवें दिन 21st dil तथा सोलहवें दिन 17th dil. ली; 14 , N. ने पहले दिन 24th dil., तीसरे दिन 23d dil., छठे, ग्यारहवें, तेरहवें और चौदहवें दिन 18th dil., सत्रहवें दिन 6th dil., अठारहवें दिन 28th dil. तथा इक्कीसवें और चौबीसवें दिन 4th dil. ली; 15 , बीस वर्ष की एक युवती ने सात दिनों तक 24th dil., दसवें, ग्यारहवें और बारहवें दिन 18th dil., पंद्रहवें और सोलहवें दिन 12th dil. ली और दो सप्ताह बाद 12th, 9th तथा 4th dils. लीं; 15 a , उसी ने लगातार दो दिनों तक 4th dil. और फिर छठे दिन 1st trit. ली; 15 b , उसी ने 3d और 2d trits. तथा 4th dil. की बार-बार मात्राएँ लीं; 15 c , उसी ने "Spiritus sil." की 3 बूँदें लीं; 16 , "C.," ने पहले दिन 24th dil., दूसरे दिन 23d dil. और पाँचवें दिन 18th dil. ली; 17 , आठ वर्ष के "A. Z.," ने तीन दिनों तक 30th और छठे, सातवें तथा आठवें दिन 21st dil. ली; 18 , "M.," ने पहले दिन 25th, चौथे दिन 13th, पाँचवें दिन 6th dil., छठे दिन 3d trit., सातवें दिन 2d trit., आठवें दिन 3d trit. और दसवें दिन 1st trit. ली; 18 a , उसी ने दो दिनों तक 3d trit., सातवें दिन 2d trit., आठवें दिन 3d trit. और दसवें दिन 1st trit. ली; 19 , "G. W.," ने पहले दिन 25th dil., चौथे दिन 13th, 6th और 5th dils., पाँचवें दिन 4th dil., छठे दिन 3d और 2d trits., सातवें दिन 2d trit., आठवें दिन 3d trit., दसवें दिन 2d trit. और बारहवें दिन 1st trit. ली; 19 a , उसी ने 4th dil., 3d. और 2d trits. लीं; 20 , J. P. W. ने दो दिनों तक 25th dil., तीसरे दिन 6th dil. और बाद में अलग-अलग समय पर 16th तथा 6th dil. ली; 20 a , उसी ने टिंचर लिया; 20 b , उसी ने 3d trit. ली; 21 , Jacob W. ने 4th dil. ली; 22 , बाईस वर्ष की Barbara ने तीन दिनों तक 30th dil., सातवें दिन 21st dil., आठवें से बारहवें दिन तक 13th dil.; चौदहवें से सत्रहवें दिन तक 7th dil. ली; 23 , P. F. ने पहले, तीसरे, पाँचवें और सातवें दिन 30th dil., दसवें दिन 20th dil., पंद्रहवें दिन 16th dil., इक्कीसवें दिन 10th dil., तैंतीसवें और उनतालीसवें दिन 6th dil., बयालीसवें और पैंतालीसवें दिन 4th dil. तथा पचासवें और चौवनवें दिन 3d trit. ली; 24 , सत्रह वर्ष की युवती C. Z. ने पहले, तीसरे और पाँचवें दिन 21st dil., दसवें दिन 12th dil., सोलहवें और अठारहवें दिन 4th dil., इक्कीसवें, अट्ठाईसवें और पैंतीसवें दिन 1st dil. तथा तैंतालीसवें दिन टिंचर लिया; 25 , F. X. ने पहले दिन 5th dil., दूसरे दिन 4th dil., चौथे दिन टिंचर, छठे दिन 3d trit., ग्यारहवें, अठारहवें और बाईसवें दिन टिंचर, छब्बीसवें दिन टिंचर की 20 बूँदें और उनतीसवें दिन शाम को टिंचर की 16 बूँदें लीं; 26 , L. S. ने दो दिनों तक 16th dil., सातवें दिन 12th dil., बारहवें और बीसवें दिन 3d trit., छब्बीसवें दिन टिंचर, तैंतीसवें दिन टिंचर की 40 बूँदें, सैंतीसवें दिन 1st dil. की 36 बूँदें, बयालीसवें दिन 1st trit. और पैंतालीसवें दिन टिंचर की 100 बूँदें लीं; 27 , Becker, Hygea, 22, 402, Aqua silicata से औषध-परीक्षण (प्रत्येक ounce में 1 से 9300 के अनुपात में Sil. का एक-बीसवाँ grain था), दो दिनों तक 10 बूँदें लीं और मसूड़ों पर पानी मला, चौथे, छठे और सातवें दिन 10 बूँदें, आठवें दिन 20 बूँदें, नौवें दिन 10 बूँदें तथा दसवें दिन 20 बूँदें लीं; [औषध-परीक्षक को चेहरे में तीव्र दर्द के दौरे पड़ते रहे हैं, उसके अनेक दाँत खराब हैं, वह ठीक से नहीं सोता और दम घुटने तथा दुःस्वप्न के कारण कभी बाईं करवट नहीं सो सकता।]

28 , Hencke, A. H. Z., 55, 135, विचूर्णन करते समय धूल के अंतःश्वसन के प्रभाव। (क्रमांक

29 से 42 , Robinson के औषध-परीक्षणों से, Br. J. of Hom., 25, 333); 29 , हर तीसरे दिन सुबह 200th dil.; 30 , एक युवती में, हर तीसरे दिन सुबह 30th dil.; 31 , एक युवती में, पहले की तरह 200th dil.; 32 , एक युवती में वही, उन्हीं मात्राओं में; 33 , एक युवती में, उन्हीं मात्राओं में 1000th dil.; 34 , एक युवती में, पहले की तरह 30th dil.; 35 , पुरुष, रात और सुबह 200th dil.; 36 , युवती, हर तीसरे दिन सुबह 1000th dil.; 37 , बच्चा, रात और सुबह 30th dil.; 38 , पुरुष, हर तीसरे दिन सुबह 30th dil.; 39 , युवती, सप्ताह में एक बार 200th dil.; 40 , युवती, हर तीसरे दिन सुबह 200th dil.; 41 , युवती, हर तीसरे दिन सुबह 200th dil.; 42 , पुरुष, एक दिन छोड़कर सुबह 200th dil.। [चाकू की धार लगाने और धातु चमकाने का काम करने वालों में हुए phthisis pulm. के मामले, जिन्हें Dr. Desayrre ने Ann. d'Hyg. Pub, 1856 में प्रस्तुत किया था और जिनका कारण बड़ी मात्रा में Silica का अवशोषण माना गया था, छोड़ दिए गए हैं। फेफड़ों की जाँच में silica, iron और lime phosphate के बड़े निक्षेप पाए गए। Dr. Jousset ने इन मामलों के लक्षणों और Hahnemann की Pathogeneses के लक्षणों के बीच उल्लेखनीय समानता की ओर संकेत किया है (L'Art Méd, 5, 198)।]

मन

  • भावात्मक।
  • अपने कार्यों में अनिश्चित और भ्रमित, 1।
  • स्नायविक उत्तेजना (आठवाँ दिन), 16।
  • बच्चा जिद्दी और हठी हो जाता है, 1।
  • हठी, 1।
  • घर की लालसा, 1।
  • बहुत आसानी से चौंक जाता है, 1।*
  • *शोर के प्रति संवेदनशीलता, और उससे चिंता, 1।
  • बहुत संवेदनशील , यहाँ तक कि रोने की मनःस्थिति (चौथा दिन), 15।*
  • बिना किसी विशेष विचार के दो घंटे तक रोने की मनःस्थिति, 1। [10.]
  • ज़रा-सी बात पर आँसू आ जाते हैं, 1।
  • विषाद; उसे ऐसा लगा मानो वह मर जाएगी और कुछ समय के लिए उसकी स्मृति चली गई, 34।
  • उदास रहती है और हर सुबह रोती है, 32।
  • विषादपूर्ण मनःस्थिति (बीसवाँ दिन), 12।*
  • मन उदास (सत्रहवाँ दिन), 13।
  • उदास और अपने विषय में अत्यधिक चिंतित, 20।
  • अत्यधिक अवसाद और चिड़चिड़ापन (बयालीसवाँ दिन), 15।*
  • मन का अवसाद (उन्नीसवाँ दिन), 12।*
  • हताश, 1।*
  • हताश और विषादग्रस्त, 3।* [20.]
  • भीतर से जीवन के प्रति घृणा, 1।
  • लगभग आधी रात को वह अत्यधिक चिंता के साथ जागा; हर प्रयास के बावजूद हिल नहीं सका और उसे लगा कि चोर भीतर घुस रहे हैं; उठने पर वह शांत हो गया, लेटने के बाद चिंता लौट आई (सैंतीस दिनों के बाद), 1।
  • चिंता के बार-बार दौरे, ऐसे कि वह बैठा नहीं रह सकता था, 1।
  • चौंकने से अत्यधिक चिंता, 1।*
  • वह चिंता और उदर-वायु के अवरोध के साथ जागा; घर में इधर-उधर चलने के बाद दोनों समाप्त हो गए, पर वायु निकली नहीं (आठ दिनों के बाद), 1।
  • चिंता और स्तब्धकारी चक्कर के साथ जागा, 3।
  • रात में चिंताजनक स्वप्न से जागने के बाद वह बहुत चिंतित बनी रही और उसके हृदय की धड़कन सुनाई दे रही थी, 1।
  • छोटी-छोटी बातों को लेकर बार-बार अंतःकरण की अत्यधिक ग्लानि , मानो उसने कोई बहुत बड़ा अपराध किया हो, 4।*
  • असंतोष, 1।
  • अत्यधिक चिड़चिड़ापन और स्पर्श के प्रति कष्टदायक संवेदनशीलता (चार दिनों के बाद), 1। [30.]
  • चिड़चिड़ी और अवसादपूर्ण मनःस्थिति (आठ दिनों के बाद), 16।*
  • बहुत चिड़चिड़ा और उदास, 30।*
  • चिड़चिड़ी और झुँझलाई हुई मनःस्थिति (सोलहवाँ दिन), 15।*
  • शाम को झुँझलाया हुआ और झगड़ालू, 1।
  • झुँझलाया हुआ (नौवाँ दिन), 1।*
  • प्रसन्नचित्त होने पर भी बहुत चिड़चिड़ा, 1।
  • ऊँची आवाज़ में बात करना उसे खीझ दिलाता है, 1।*
  • सनकी और दोष निकालने वाला, 1।
  • पूर्वाह्न में वह बदमिज़ाज और झुँझलाई हुई रहती है (छठा दिन), 8।
  • खिन्न और निराश, 1। [40.]
  • बदमिज़ाजी के कारण वह न तो कुछ कर सकती थी, न करना चाहती थी, 1।
  • सर्वोत्तम इरादों के बावजूद वह आसानी से खिन्न हो जाता है, 1।
  • आसानी से क्रोधित हो जाता है, 1।
  • हर बात उसे खीझ दिलाती और झुँझला देती है, 1।
  • चिड़चिड़ा, 1।
  • छोटी-छोटी बातें प्रायः उसे चिड़चिड़ा कर देती हैं, 1।
  • बेचैन और व्यग्र, ज़रा-सी बात पर चौंक जाता है, 32।*
  • बार-बार बेचैनी और अधीरता, ऐसी कि उसे समझ नहीं आता था कि क्या करे, 1।
  • बौद्धिक।
  • मन की अत्यधिक सक्रियता (दूसरा दिन), 15।
  • विचारों में अत्यधिक सुगमता और धाराप्रवाह अभिव्यक्ति (सातवाँ, आठवाँ और नौवाँ दिन), (द्वितीयक क्रिया), 2। [50.]
  • मानसिक कार्य के प्रति अत्यधिक आलस्य; पढ़ाते समय लगभग सो गया, 1।
  • मानसिक कार्य के प्रति अनिच्छा (सोलहवाँ दिन), 12।
  • मानसिक प्रयास के प्रति अनिच्छा (तीसरा दिन), 20।
  • ध्यान केंद्रित करने में अत्यधिक कठिनाई, 29।*
  • विचार करना कठिन (पहला दिन), 2।*
  • मानसिक श्रम बहुत कठिन है, 1।*
  • वह भ्रमित हो जाती है और गलतियाँ करती है; उसे आधा-अधूरा पता रहता है कि वह क्या कर रही है, फिर भी स्वयं को नियंत्रित नहीं कर पाती; अंडे के स्थान पर वह लगभग एक घड़ी उबालने के लिए पतीले में डाल चुकी थी, 32।
  • पूर्वाह्न में मन का अत्यधिक भटकाव, साथ में सिर और अधिजठर-गर्त में बेचैनी, 1।
  • मन का भटकाव; वह लगभग हमेशा एक ही समय में दो बातों के विषय में सोचने का प्रयास करता रहता है, 4।
  • पढ़ने, लिखने या सोचने में असमर्थता, जो दोपहर से 6 P.M. तक बढ़ती जाती है और शाम को भोजन करने के बाद समाप्त हो जाती है (दूसरा दिन), 2। [60.]
  • बोलते समय आसानी से गलतियाँ करता है, 3।
  • स्मृति दुर्बल (सत्रहवाँ और बीसवाँ दिन), 12।
  • हर सुबह विस्मरणशील और चक्कर-सा, 1।
  • स्मृति-लोप, विस्मरणशीलता, 1।
  • चेतना का निरंतर क्षण-क्षण लुप्त होना (दूसरा दिन), 16।

सिर

  • भ्रम और चक्कर।
  • सिर अत्यधिक भ्रमित-सा है, साथ में सिर के अग्रभाग में लगातार पीड़ा (सोलहवाँ दिन), 12।
  • सिर में भ्रमित-सा अनुभव (चार दिनों के बाद), 1।
  • चक्कर, 12, 13, 15, आदि।*
  • नशे जैसा चक्कर (ग्यारहवाँ दिन), 22।
  • उठने पर चक्कर, सिर में चकराहट के साथ स्तब्धता, मतली सहित, यहाँ तक कि उलटी होने तक; खुली हवा में सवारी करते समय राहत, घर में प्रवेश करने पर फिर लौट आता है; उसे कमरा अपने चारों ओर घूमता हुआ प्रतीत होता और वह आगे-पीछे लड़खड़ाती थी (अड़तीस दिनों के बाद), 1। [70.]
  • शाम को बैठते और खड़े रहते समय चक्कर, 1।
  • सामान्य रूप से धूम्रपान और नसवार लेने के बाद चक्कर; आँखें बंद करने पर सब कुछ चारों ओर घूमता हुआ प्रतीत होता है; आँखें खोलने पर यह समाप्त हो जाता है, 1।
  • चक्कर, मानो उसे ऊपर उठाया जा रहा हो, 1।
  • ऊपर देखने के लिए केवल आँखें ऊपर उठाने पर भी चक्कर, 1।
  • नाश्ते के समय चक्कर, मानो सिर बाईं ओर गिर जाएगा, साथ में चेहरे पर गर्मी और माथे पर पसीना, 1।
  • चक्कर, जी मिचलाने वाली मतली के साथ; पानी वापस मुँह में आ जाता है, 1।
  • सुबह खाली पेट चक्कर की अनुभूति, 1।
  • आगे चलते समय चक्कर; ऐसा प्रतीत होता मानो वह पीछे की ओर चल रहा हो, 1।
  • सुबह उठने पर स्तब्धकारी चक्कर, 1।
  • उठने पर चक्कर, 3। [80.]
  • चक्कर केवल बैठते समय, चलते समय नहीं; विशेषतः गाड़ी में सवारी करते समय, जब अचानक एक क्षण के लिए उसकी चेतना चली गई, यद्यपि आँखों के आगे अँधेरा नहीं छाया, 1।
  • साँझ के निकट खुली हवा में चक्कर के दौरे; तनिक-सा विचार करने से बढ़ते हैं, 4।
  • सुबह बिस्तर में उठने पर चक्कर, जी मिचलाने वाली मतली सहित, जिससे उसे फिर पीछे गिरकर लेटना पड़ा, 1।
  • चक्कर के दौरे पीड़ापूर्वक पीठ से उठकर गर्दन के पिछले भाग से होते हुए सिर तक जाते प्रतीत होते हैं, जिससे उसे यह ज्ञात नहीं रहता कि वह कहाँ है और वह निरंतर आगे गिरने को प्रवृत्त रहती है, 1।*
  • आधी रात के लगभग नींद में भी चक्कर, साथ में सिर में गर्मी, 1।
  • रात में स्वप्न के बीच चक्कर, मतली सहित, 1।
  • काम करते हुए झुकने पर पूरे दिन चक्कर (पहला दिन), 8।*
  • बिस्तर से उठने पर इतना चक्कर कि गिर जाए (चौथा, पाँचवाँ और छठा दिन), 8।
  • सिर के अग्रभाग में पीड़ा के साथ चक्कर (सोलहवाँ दिन), 12।
  • चक्कर और आँखों के आगे धुँधलापन, जिससे वह पाँच कदम से अधिक दूर नहीं देख सकता था (आधे घंटे के बाद), 12। [90.]
  • चक्कर, जिसके बाद सिर में गर्मी और फिर पसीना तथा कमजोरी (पहला दिन), 18।
  • लड़खड़ाहट वाला चक्कर, दृष्टि के धुँधलेपन सहित (उन्नीसवाँ दिन), 12।
  • चक्कर, जिससे वस्तुएँ वृत्त में घूमती हुई प्रतीत होती हैं (आठवाँ दिन), 18a।
  • सिरदर्द के साथ चक्कर, जिससे वह बिस्तर पर लेट गया (पहला दिन), 19।
  • निरंतर चक्कर, मानो सिर के भीतर कोई वस्तु आगे-पीछे चल रही हो, स्थिर बैठे रहने पर भी; लेटने पर कम, 1।
  • रात में चक्कर से जाग गया; गति की अपेक्षा विश्राम में अधिक, विशेषतः झुकने के बाद उठने पर तीव्र; अगले दिन के कुछ भाग तक बना रहा (सत्तावनवाँ दिन), 23।
  • अत्यधिक चक्कर; चलते समय कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता मानो उसे पता न हो कि वह कहाँ है और वह एक ओर से दूसरी ओर गिर जाएगी, 1।
  • सुबह तीव्र चक्कर, जिससे चलते समय उसे स्वयं को सँभालना पड़ा; यह उसे दाईं ओर खींचता था, साथ में मतली; लगातार कई दिनों तक, और दोपहर बाद इतना तीव्र कि उसे लेटना पड़ा (बारह दिनों के बाद), 1।
  • तीव्र चक्कर, जो उसे कभी नहीं छोड़ता था, साथ में सिर में अत्यधिक मंदता, 1।
  • दोपहर में भोजन करते समय तीव्र चक्कर, बिना जी मिचलाए और अच्छी भूख के साथ, 1। [100.]
  • बहुत अधिक चक्कर, एक घंटे तक, दृष्टि के धुँधलेपन सहित (आधे घंटे के बाद, बारहवाँ दिन), 12।
  • बिस्तर पर जाने के बाद तीव्र चक्कर, केवल बाईं करवट लेटने पर, 19a।
  • पूरे दिन हल्का चक्कर, कुछ मतली सहित, 1।
  • अत्यधिक चकराहट, 29।
  • ऐसी चकराहट मानो वह जड़बुद्धि हो गया हो; वह अपने विचारों को इस प्रकार एकत्र नहीं कर पाता था कि स्वयं को ठीक से व्यक्त कर सके और लगभग प्रत्येक शब्द गलत बोलता था, तुरंत, 1।
  • सिर में चकराहट और भ्रम, जिससे हिलने या झुकने पर उसे निरंतर गिरने का भय रहता था; कई सप्ताह तक वह स्थिरतापूर्वक नहीं चल सका, 1।
  • सुबह उठने पर चकराहट (बीसवाँ दिन), 12।
  • रात के आरंभिक भाग में सिर में चकराहट (पाँचवीं रात), 19।
  • हर सुबह उठने के बाद आधे घंटे तक, चलते और बैठते समय, चकराहट और घूमने की अनुभूति, साथ में एक-दो घंटे तक सिरदर्द; झुकने पर ऐसा प्रतीत होता मानो वह गिर जाएगा, 1।
  • चलते समय चकराया हुआ, लड़खड़ाता और अस्थिर, 1। [110.]
  • रात में जब भी वह बाईं करवट लेटता है, ऐसी लड़खड़ाती अनुभूति मानो बिस्तर चारों ओर घूम रहा हो (छठी रात), 19।
  • वह लगभग निरंतर नशे में होने जैसा अनुभव करती थी, 1।
  • वस्तुएँ चारों ओर घूमती हुई प्रतीत होती हैं (चौथा दिन), 18।
  • उसका सिर इस प्रकार चकराने लगा मानो वह नशे में हो; उसे बैठना पड़ा, 32।
  • हल्की लड़खड़ाहट (तीसरा दिन), 12।
  • सुबह बिस्तर से उठने पर लड़खड़ाहट, 1।
  • सिर में एक विचित्र अनुभूति, मानो वह गिर पड़ेगी, साथ में कानों में घंटी बजना, 1।
  • उसे अत्यधिक चक्कर आया, 35।
  • सिर के सामान्य लक्षण।
  • रात में सिर की ओर रक्त का वेग, 1।
  • सिर की ओर रक्त का पीड़ादायक वेग, गर्मी और चुभन सहित, जिससे वह 2 A.M. पर जाग गया, 1। [120.]
  • सिर की ओर रक्त का वेग, सिर के शीर्ष और माथे में धड़कन तथा सिर के भारीपन सहित, 1।
  • 4 P.M. पर सिर की ओर रक्त का वेग और लाल चेहरे में जलन। (तीसरा दिन), 8।*
  • सिर की ओर रक्त का वेग, पश्चकपाल में चुभनों सहित, 1।
  • बैठी अवस्था से उठने पर सिर की ओर रक्त का अत्यधिक वेग, मस्तिष्क में भरेपन की अनुभूति सहित, 1।
  • सिर की ओर बार-बार रक्त का वेग, नींद में झटके और चौंकने सहित, 32।
  • सिर मंद; बाईं कनपटी में निरंतर दबावयुक्त, धड़कता दर्द (इक्कीसवाँ दिन), 23।
  • सिर मंद और चकराया हुआ (दसवाँ दिन), 18a।
  • सिर में मंदता, साथ में शरीर में कुचले जाने जैसी अनुभूति, 1।
  • मंदता, मानो सिर में अत्यधिक रक्त हो, बिना दर्द के, 6।
  • थोड़ी-सी बातचीत से तुरंत सिर में मंदता, साथ में सामान्य निढालपन, जिससे उसे बातचीत रोकनी पड़ी, 6। [130.]
  • सिर में, पूरे माथे में, अत्यधिक मंदता (इक्कीसवाँ दिन), 24।
  • सिर में स्तब्धता (दूसरा दिन), 16।
  • सिर में भारीपन, 1।
  • पूर्वाह्न में सिर भारी; दोपहर बाद कनपटी में, माथे की ओर, कुछ क्षणिक चुभनें (उनतालीसवाँ और चालीसवाँ दिन), 23।
  • भारी सिरदर्द, मानो मस्तिष्क में सीसा भरा हो, पूर्वाह्न से रात तक बढ़ता हुआ, 1।
  • दोपहर बाद सिर में भरेपन और भारीपन की अनुभूति, रात तक बनी रही (पहला दिन), 28।
  • सिर भारी और भ्रमित-सा (सत्रहवाँ दिन), 12।
  • ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अपना सिर ऊपर सँभाल नहीं सकती, 1।*
  • सिर में अत्यधिक भारीपन; वह उसे ऊपर नहीं सँभाल सकती, वह इतना बोझिल लगता है, 32।
  • सिर में थकावट (पहला दिन), 2। [140.]
  • सिर में कमजोरी (पहला दिन), 18a।
  • सिर और छाती में बार-बार कसाव, व्याकुलता सहित, 1।
  • सिरदर्द, 21; (पाँचवाँ दिन), 17; (पहला दिन), 19।*
  • रात में सिरदर्द, 3।
  • भूख के कारण सिरदर्द, 1।*
  • जागने पर सिरदर्द (पच्चीसवाँ दिन), 14।
  • सिरदर्द, मानो सब कुछ बाहर की ओर दबकर खोपड़ी को फोड़ देगा, 1।*
  • सिरदर्द, मानो मस्तिष्क और आँखें आगे की ओर धकेली जा रही हों, 1।*
  • *सिरदर्द, गर्दन के पिछले भाग से सिर के शिखर तक ऊपर उठता हुआ, मानो पीठ से आ रहा हो (इक्कीस दिनों के बाद), 1।
  • सिरदर्द, जो आमाशय से आता हुआ प्रतीत होता है; माथे में भारीपन, साथ में पीड़ादायक फाड़ता दर्द, जो सिर को एक ओर खींचता था (दसवाँ दिन), 8। [150.]
  • पूरे सिर में सिरदर्द (दसवाँ दिन), 18a।
  • सिरदर्द, मतली और उलटी की प्रवृत्ति सहित (चौथा दिन), 19।
  • रात में सिरदर्द से वह जाग गया (पाँचवाँ दिन), 17।*
  • सिर में दर्द (30th dil. के बाद), 13।
  • सिर के विभिन्न भागों में बारी-बारी से दर्द; एक घंटे तक सिर के अग्रभाग में, फिर पूरे सिर में; दाईं कनपटी में फाड़ता दर्द, पश्चकपाल में फाड़ता दर्द, दाईं कनपटी में और फिर बाईं में, लगभग 1 P.M. पर (उन्नीसवाँ दिन), 12।
  • मस्तिष्क के अगले भाग में दबाव-जैसा दर्द, 12 से 2 बजे तक बढ़ता हुआ (पहला दिन), 2।
  • तीव्र सिरदर्द (पहला दिन), 18a।
  • तीव्र सिरदर्द; झटकेदार दर्द, तीव्र चुभनों सहित; कनपटी के ऊपर से बाएँ कान तक फैलती फाड़ती चुभनें; बाएँ कान से नाक की जड़ तक फैलता चुभता दर्द, जहाँ इससे एक बार चुभन हुई (सातवाँ दिन), 19।
  • 3 से 9 P.M. तक तीव्र सिरदर्द, जिसके बाद दर्द कुछ घट गया; फिर अत्यधिक थकावट और उनींदापन (तीसरा दिन), 12।
  • तीव्र सिरदर्द, मानो तीक्ष्ण चुभनें सिर के शिखर को भेद रही हों, 1। [160.]
  • अत्यंत तीव्र सिरदर्द, चेतना-लोप सहित, जिससे वह कराहती और सहायता के लिए जोर से चिल्लाती थी (छियालीस दिनों के बाद), 1।*
  • ठंडेपन-जैसा सिरदर्द, गर्दन के पिछले भाग से सिर के शिखर तक, 32।
  • मौसम के प्रत्येक परिवर्तन को वह सिर और अंगों में अनुभव करता है, 1।
  • कष्टदायक अनुभूति, मानो सिर के भीतर सब कुछ सजीव हो और घूम तथा ऐंठ रहा हो, 1।
  • सिर में संवेदनशीलता, जैसे तीव्र सिरदर्द के बाद होती है (सत्रह दिनों के बाद), 1।
  • सिर ऐसा लगता है मानो अलग होकर गिर रहा हो, जिससे गर्दन के पीछे खिंचावयुक्त दर्द होता है, मानो सिर गर्दन के पिछले भाग में त्वचा के एक टुकड़े से लटका हो, 32।
  • उसे ऐसा लगता है मानो सिर में पानी की नलियाँ फट रही हों, 34।
  • जोर से पैर रखने या किसी वस्तु से पैर टकराने पर मस्तिष्क में गर्जना और चकनाचूर होने जैसी अनुभूति, 1।*
  • चलते समय सिर में नोचने-जैसा दर्द, 1।
  • मस्तिष्क का संपीड़न (दूसरा दिन), 2। [170.]
  • सिर में दबाव, तनाव और दबाने की अनुभूति, मानो उसे दबाया जा रहा हो या बलपूर्वक अलग किया जा रहा हो, 1।*
  • दबावयुक्त सिरदर्द, चिड़चिड़ेपन और सभी अंगों में भारीपन सहित, 1।
  • सिर में दबाव (छठा दिन), 14।
  • मस्तिष्क में दबाव और भारीपन (ग्यारहवाँ दिन), 15।
  • सिर में दबाव, शरीर की कमजोरी सहित, 1।
  • सिर में दबावयुक्त दर्द (आठवाँ दिन), 15।
  • रात में दबावयुक्त सिरदर्द; उसे याद नहीं रहता था कि वह कहाँ है; सब कुछ चारों ओर घूमता था, साथ में हृदय में धड़कन (सत्रह दिनों के बाद), 1।*
  • सुबह तीव्र दबावयुक्त सिरदर्द, आँखों तक फैलता हुआ, तीव्र ठिठुरन सहित; दोपहर बाद मतली और कमजोरी के साथ, जिससे उसे लगा कि वह मूर्च्छित हो जाएगी; आँखों को बगल की ओर घुमाने या बंद करने पर दर्द होता है और बंद होने पर स्पर्श से वे और भी अधिक दुखती हैं (ग्यारहवाँ दिन), 1।*
  • फाड़ता सिरदर्द, 13।
  • दोपहर बाद सिर में फाड़ता दर्द और चुभन, 1। [180.]
  • सिर में फाड़ता दर्द, एक आँख से दूसरी तक फैलता हुआ (सोलहवाँ दिन), 15।
  • *पूरे सिर में फाड़ता दर्द, पश्चकपाल के उभारों से आरंभ होकर सिर की दोनों ओर ऊपर और आगे की दिशा में फैलता हुआ (आठवाँ दिन), 18a।
  • सिर में पीड़ादायक झटकेदार-फाड़ता दर्द (पाँचवाँ दिन), 12।
  • शाम को बिस्तर में सिर में अचानक पीड़ादायक फाड़ता दर्द (तीसरा दिन), 8।
  • फाड़ता दर्द, मानो सिर फट जाएगा, साथ में उसमें धड़कन; सिर के शिखर से आरंभ होकर, मानो एक ही समय भीतर और बाहर दोनों ओर हो, ठिठुरन सहित; उसे लेटना पड़ा और वह चार घंटे तक बिस्तर में करवटें बदलता रहा; सिर को कसकर बाँधने से राहत, 1।*
  • सिर में तीव्र फाड़ता दर्द, मानो माथा चीरकर अलग कर दिया जाएगा (बारहवाँ दिन), 26।*
  • सिर में दर्दरहित झटके और फड़कनें, 1।
  • शाम को नींद आते समय सिर में झटका, जिसके बाद दाएँ कान में धड़कन, 1।
  • शाम को बिस्तर में सिर के आर-पार झटका, जिसका अंत पश्चकपाल में अकड़न के साथ हुआ, 1।
  • सिर के आर-पार चुभनें (दूसरा दिन), 22। [190.]
  • मस्तिष्क में भीतर से बाहर की ओर चुभनें, 1।
  • सिर में अस्पष्ट चुभनें, साथ में मनोबल में अत्यधिक गिरावट और बहुत चिड़चिड़ापन (ग्यारह दिनों के बाद), 1।
  • मंद चुभनें, कभी-कभी पूरे सिर में फाड़ने जैसी; दाएँ ललाटीय उभार में सबसे अधिक बार, 11 A.M. पर (पाँचवाँ दिन), 8।
  • शाम को नींद आते समय सिर में स्पंदन, हृदय की धड़कन और पूरे शरीर में सिहरन, कई मिनट तक, 1।
  • फाड़ता-धड़कता सिरदर्द, डकारों सहित, 3।
  • माथा।
  • माथे की ओर रक्त के वेग, 32।
  • माथे और नाक में मंदता की अनुभूति, ऊपरी जबड़े के दाँतों तक फैलती हुई (पहला दिन), 23।
  • माथे और कनपटियों में मंद दर्द, सिर में फाड़ते दर्दों के साथ बारी-बारी से, विशेषतः माथे में, 20b।
  • माथे की दाईं ओर तीव्र मंद सिरदर्द (पहला दिन), 24।
  • सुबह उठने के बाद और दोपहर बाद माथे में भारीपन-जैसा सिरदर्द (नौवाँ दिन), 8। [200.]
  • माथे में दर्द, 12, 14, 17।
  • दोपहर में माथे में दर्द (दूसरा दिन), 22।
  • माथे के मध्य में दर्द (छठा दिन), 19।
  • पूरे माथे में आगे-पीछे खिंचते दर्द (बारहवाँ दिन), 26।
  • माथा सुन्न और संवेदनाहीन-सा प्रतीत होता है, 1।
  • माथे के मध्य में दर्द (चौथा दिन), 17।
  • माथे की बाईं ओर सिरदर्द (पाँचवाँ दिन), 17।
  • माथे की बाईं ओर दर्द (चौथा दिन), 17।
  • आँखों के ऊपर तीव्र सिरदर्द, जिससे वह उन्हें मुश्किल से खोल सकता था, प्रत्येक खुराक के बाद फिर लौटता था (चौथा दिन), 12।*
  • तीव्र सिरदर्द, विशेषतः माथे के मध्य में, बैठने और चलने पर अधिक, चक्कर सहित (चौथा दिन), 19। [210.]
  • माथे में तीव्र दर्द, सिर के अगले भाग में फाड़ते दर्दों सहित, 13।
  • सिरदर्द, जिसमें आँखों के ऊपर कुचले जाने जैसा दर्द था, जिससे वह आँखें मुश्किल से खोल सकता था; सिरदर्द ने पहले माथे की बाईं ओर प्रभावित किया, यह आँख के पास से दूसरी ओर फैलने वाली चुभन थी, दबावयुक्त, आँखें खोलने से बढ़ती थी (चौथा दिन), 19।*
  • माथे में भेदता सिरदर्द, लगातार कई दिनों तक, 1।
  • सिरदर्द; माथे के मध्य में दबावयुक्त झटका, अचानक मुड़ने, झुकने या बोलने से फिर उत्पन्न होता है (दस दिनों के बाद), 1।*
  • थोड़े-से मानसिक श्रम से ललाट में दबावयुक्त सिरदर्द (तीन दिनों के बाद), 1।
  • सुबह उठने के कुछ समय बाद माथे में दबावयुक्त दर्द, गति से नहीं बढ़ता, 1।
  • सुबह से शाम तक माथे में दबाव, 1।
  • आँखों के ऊपर माथे में भारी वजन-जैसा दबाव, 1।*
  • माथे और आँखों में दबावयुक्त दर्द, जैसे जुकाम से पहले होता है, 1।
  • सिर के अगले भाग में दबाव (अठारहवाँ दिन), 14। [220.]
  • माथे में क्षणिक दबावयुक्त दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • ललाट-प्रदेश में फाड़ता दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।*
  • माथे में तीव्र फाड़ता दर्द, 13।
  • माथे में फाड़ता सिरदर्द, पार्श्विका अस्थि की ओर फैलता हुआ, पूरे दिन; शाम के निकट और गति से बढ़ता है (तेरह दिनों के बाद), 1।
  • माथे में फाड़ते दर्द, बाँहों के फाड़ते दर्दों के साथ बारी-बारी से (पहला दिन), 12।
  • माथे और सिर के शीर्ष पर फाड़ता दर्द (दूसरा दिन), 22।
  • माथे में फाड़ते दर्द, कभी-कभी माथे से सिर के शिखर तक फैलते हुए (पाँचवाँ दिन), 22।
  • माथे के ऊपर सिर में झुनझुनीदार फाड़ता दर्द, सिर के शिखर और कनपटियों तक फैलता हुआ (पहला दिन), 20।
  • ललाट-प्रदेश में सिरदर्द, कभी चुभता और कभी दबावयुक्त, एक ओर से दूसरी ओर फैलता हुआ (चौथा दिन), 15।
  • माथे में झटकेदार सिरदर्द, अधिकांशतः रात में, 1। [230.]
  • झुकते समय माथे की दाईं ओर कुछ बारीक चुभनें, 9 A.M. पर (दूसरा दिन), 8।
  • सिरदर्द, माथे की बाईं ओर चुभन के रूप में आरंभ होकर दाईं ओर फैलता हुआ, दबावयुक्त और तनावपूर्ण (शीघ्र), (छठा दिन), 19।
  • माथे में चुभन (पाँचवाँ दिन), 17।
  • माथे में तीक्ष्ण चुभता दर्द (कुछ घंटों के बाद), 1।*
  • सिर के अगले भाग में चुभते दर्द, 8 से 11 P.M. तक (पंद्रहवाँ दिन), 12।*
  • पूरे माथे में चुभता दर्द (चौथा दिन), 17।
  • सुबह माथे में चुभन और धड़कन, 1।
  • दोपहर बाद धड़कता ललाटीय सिरदर्द, एक घंटे तक, 1।
  • माथे की बाईं ओर धड़कता दर्द (चौथा दिन), 1।
  • सिर के अग्रभाग में दर्द (बीसवाँ दिन), 12। [240.]
  • सिर के अग्रभाग में दबावयुक्त दर्द और दबाने की अनुभूति, विशेषतः माथे और आँखों पर, गति से अत्यधिक बढ़ती हुई (दूसरा दिन), 28।
  • सिर के अग्रभाग और दाईं कनपटी में संधिवातीय फाड़ते दर्द (सत्रहवाँ दिन), 12।
  • सिर के अग्रभाग में 4 से 7 P.M. तक फाड़ता दर्द, 1।
  • सिर के अग्रभाग में चुभता-फाड़ता दर्द, बाद में दाईं कनपटी में और दस मिनट बाद बाईं कनपटी में (सोलहवाँ दिन), 12।
  • कनपटियाँ।
  • दाईं कनपटी की ओर रक्त का वेग, 1।
  • दोनों कनपटियों में फड़फड़ाहट की अनुभूति और पश्चकपाल में टीसता दर्द, 29।
  • कनपटियों में दर्द, माथे के आर-पार और सिर के शिखर की ओर फैलता हुआ (दसवाँ दिन), 20।
  • बाईं कनपटी में दर्द (चौथा दिन), 17।
  • सिरदर्द, विशेषतः दाईं कनपटी में, सिर के शिखर तक फैलता हुआ; फाड़ता दर्द, जिसे सिर की त्वचा ऊपर खिंचने जैसा बताया गया (पंद्रहवाँ दिन), 20।
  • दोनों कनपटियों में दबाव (इक्कीसवाँ दिन), 14। [250.]
  • हल्की ठंड लगने के बाद कनपटी और दाईं आँख के ऊपर दबाव, 3।
  • मुलायम मलत्याग के बाद दाईं कनपटी में दबाव, साथ में दबाव, जिसके बाद गैस की डकारें (सोलह दिनों के बाद), 1।
  • दोपहर से शाम तक दाईं कनपटी में दबाव (उन्नीस दिनों के बाद), 1।
  • बाईं कनपटी में दबावयुक्त दर्द (पाँचवाँ दिन), 17।
  • कनपटियों के आर-पार फाड़ता दर्द (पहला दिन), 11।
  • दाईं कनपटी में फाड़ते दर्द, विभिन्न प्रकार के सिरदर्दों सहित; सिर में, विशेषतः पार्श्विका अस्थियों में, क्षणिक फाड़ता दर्द, झुकने और गति करने से बढ़ता हुआ (बीसवाँ दिन), 12।
  • दाईं कनपटी में फाड़ता दर्द, आधे घंटे बाद पश्चकपाल में (बीसवाँ दिन), 12।
  • कनपटियों में चुभनें, 1।
  • कनपटियों में चुभनें, साथ में ऐसी पीड़ा मानो सिर खुला हुआ हो (पंद्रहवाँ दिन), 12।
  • दाएँ कनपटी-प्रदेश में तीक्ष्ण चुभन (सोलहवाँ दिन), 12। [260.]
  • शाम को दाईं कनपटी में चुभनें, 13।
  • दाईं कनपटी में चुभता दर्द (दूसरा दिन), 17।
  • बाईं कनपटी में चुभनें, 13।
  • सिर का शिखर।
  • सिर के शिखर पर कुचले जाने जैसा दर्द, 1।
  • सिर के शिखर और भौंहों के ऊपर खिंचावयुक्त-दबावयुक्त चुभनें, 1।
  • अँधेरे में आने पर उसे सिर के शिखर पर दबाव अनुभव होता है, मानो उस पर अत्यंत भारी वजन गिर रहा हो, 32।
  • शाम को सिर के शिखर पर दबाव, आँखों तक फैलता हुआ (अठारह दिनों के बाद), 1।
  • सिर के शीर्ष में कठोर झटके-जैसा दबाव, मस्तिष्क में गहराई तक फैलता हुआ, दौरे के रूप में, एक या दो मिनट तक, 1।
  • सिर के शिखर में बिजली की चिनगारियों जैसी झटकेदार अनुभूति (दसवाँ दिन), 20।
  • सिर के शिखर में चुभता दर्द (सोलहवाँ दिन), 24।
  • पार्श्विका क्षेत्र। [270.]
  • दाईं ओर का सिरदर्द (तीसरा दिन), 15।
  • सिर की दाईं ओर दर्द (दूसरा दिन), 17।
  • दाएँ पार्श्विका-प्रदेश में दबावयुक्त दर्द (सोलहवाँ दिन), 24।
  • सिर की दाईं ओर पश्चकपाल से ऊपर और आगे की दिशा में फाड़ता दर्द (सातवाँ दिन), 15a।
  • सिर की दाईं ओर और शरीर के अन्य भागों में, विशेषतः दाएँ हाथ में, चुभते दर्द (सातवाँ दिन), 15।
  • संभोग के बाद सिर की दाईं ओर पक्षाघात जैसी अनुभूति, 1।
  • सिरदर्द, विशेषतः बाईं ओर, चुभते दर्द सहित (पाँचवाँ दिन), 15।
  • सिर की बाईं ओर मतली उत्पन्न करने वाला दर्द, दबाव या तनिक-सी गति से अधिक, 33।
  • सिर की बाईं ओर चुभता दर्द, प्रायः माथे तक फैलता हुआ (दसवाँ दिन), 22।
  • पश्चकपाल।
  • टोपी से पश्चकपाल के उभारों में तीव्र दर्द होता है, 1।* [280.]
  • पश्चकपाल में दबावयुक्त सिरदर्द, मानो अस्थि में हो (दूसरा दिन), 16।*
  • *पश्चकपाल में दबावयुक्त दर्द, सिर को गर्म कपड़े से लपेटने पर राहत, 1।
  • *पश्चकपाल में दबाव, जिसके शीघ्र बाद माथे में चुभनें, साथ में गर्दन के पिछले भाग और पीठ में ठिठुरन, 1।
  • पश्चकपाल की दोनों ओर दबाव, 3।*
  • सुबह पश्चकपाल और गर्दन के पिछले भाग में दबाव, 3।*
  • पश्चकपाल में चुभनें, 1।
  • पश्चकपाल की दाईं ओर खुजलीयुक्त दर्द, 1।
  • सिर का बाहरी भाग।
  • कंघी करने पर बाल बहुत अधिक झड़ते हैं, 4।
  • सिर पर सूखी दाद, जो इस औषध-परीक्षक को पाँच वर्षों से थी, चारों ओर लाल घेरे से घिर गई; कुछ समय बाद लालिमा मिट गई और दाद भी लुप्त हो गई तथा पहले की खुरदरी त्वचा चिकनी हो गई, 14।
  • सिर और गर्दन के पिछले भाग पर खुजलीदार फुंसियाँ, 1।* [290.]
  • सिर की त्वचा पर खुजलीदार फुंसियाँ, 1।
  • रात का भोजन करते समय ऐसी अनुभूति मानो बाल खड़े हो रहे हों, 1।
  • बाल ऐसे लगते हैं मानो वे झड़ जाएँगे, 13।
  • *सिर का बाहरी भाग स्पर्श से दुखता था, 1।
  • सिर की त्वचा में अत्यधिक स्पर्श-संवेदनशीलता, ऐसी अनुभूति मानो उसे बालों से पकड़कर जमीन से ऊपर उठा लिया गया हो, 32।
  • सिर की त्वचा इतनी स्पर्श-संवेदनशील है कि वह बालों में ब्रश नहीं कर सकती, 32।
  • सिर की त्वचा पर रेंगने की अनुभूति, मानो बाल खड़े हो रहे हों, किंतु ठिठुरन के बिना, 1।
  • सिर की त्वचा में सुई चुभने जैसी अनुभूति और खुजली, 29।
  • सिर की त्वचा पर बहुत अधिक खुजली, 1।*
  • *सिर पर खुजली वाले स्थान खरोंचने के बाद दुखने जैसी पीड़ा करते हैं, 1। [300.]
  • सिर की बाईं ओर तीव्र खुजली (चौदह दिनों के बाद), 1।
  • पश्चकपाल पर खुजली, 1।*

आँख

  • वस्तुगत।
  • पहले आँखों के चारों ओर और फिर आँखों के श्वेत भाग में भी लालिमा, साथ में प्रदाह और अश्रुस्राव, 1.*
  • आँखों के श्वेत भागों में लालिमा , साथ में दबावकारी दर्द, 1, 3.*
  • बाईं आँख पर व्रण, 1.
  • आँखें कमजोर (सत्रहवाँ दिन), 11.*
  • व्यक्तिनिष्ठ।
  • ऐसा महसूस होना मानो उसकी दोनों आँखों को डोरियों से पीछे सिर के भीतर खींचा जा रहा हो, 32.
  • ऐसा दर्द मानो आँखों को बाहर खींचा जा रहा हो (चौथा दिन), 10.
  • दोनों आँखों में पीड़ादायक ऐंठन, जिससे वे इतनी कसकर बंद हो जाती हैं कि वह बड़ी कठिनाई से उन्हें खोल पाती है, 1.
  • सुबह आँखों में दर्द, मानो वे अत्यधिक सूखी और रेत से भरी हों, 1.* [310.]
  • ऐसा संवेदन मानो बाईं आँख पानी से भरी हो, 1.
  • आँखों और माथे में तनाव, साथ में शरीर की कमजोरी, 1.
  • आँखों में तनाव (दूसरा दिन), 12.
  • प्रतिदिन अपराह्न 4 बजे आँखों में दबाव, 1.
  • बाईं आँख में बेधता-चुभता दर्द (पच्चीसवाँ दिन), 23.*
  • बाईं आँख में अचानक बेधता दर्द (अट्ठाईसवाँ दिन), 25.*
  • आँखों को दबाकर बंद करने पर उनमें फाड़ता दर्द और जलन, 1.*
  • दाईं आँख में फुरफुराहट का संवेदन (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • आँख में गर्मी, 1.*
  • आँखों में चरपराहट, 1.* [320.]
  • बाईं आँख में चरपराहट और सुई-चुभन, 23.
  • दुखती आँख में तत्काल खुजली, 1.
  • शाम को दाईं आँख में खुजली, 3.
  • भौंहें और नेत्रकोटर।
  • भौंहों में खुजली, 1.
  • आँखों के ऊपर तनावकारी दर्द, 21.
  • बाईं आँख के ऊपर, छह पेंस के सिक्के जितने क्षेत्र में दबावकारी दर्द, 2.
  • नेत्रकोटरों में दबाव और चरपराहट, 1.
  • मासिक धर्म से पहले आँखों के ऊपर अत्यधिक दबाव और कसाव का संवेदन, मानो वहाँ कोई भारी वस्तु रखी हो, 1.
  • शाम को बिस्तर में, दाईं आँख के ठीक नीचे क्षणिक मरोड़ता दर्द, 4.
  • आँखों के ऊपर फाड़ता और चुभता दर्द, जिससे उसे पलकों को दबाकर बंद करना पड़ा (दसवाँ दिन), 18a.
  • पलकें। [330.]
  • रात में पलकों का चिपक जाना, साथ में पलकों में चरपराहट, 1.*
  • सुबह दोनों आँखें श्लेष्मा से चिपकी हुई (दूसरा दिन), 8.*
  • सुबह आँखों का चिपक जाना, 1.*
  • भीतरी नेत्रकोणों में बहुत अधिक सूखा-कठोर श्लेष्मा, 1.
  • (पैरों का विसर्पजन्य शोथ लुप्त हो जाने के बाद एक नेत्र-विकार आरंभ हुआ, जिसमें ऊपरी और निचली पलकों की सूजन थी, जो विशेषतः सुबह बहुत तीव्र होती थी; साथ में जलन और चुभता दर्द, विशेषतः सुबह और शाम; पलकों की लालिमा, जो दिन के मध्य में बेहतर होती थी; शाम को अत्यधिक प्रकाशभीति, इतनी कि मोमबत्ती का प्रकाश सहन नहीं होता था; उस प्रकाश में पढ़ना बहुत कठिन था, मानो प्रकाश के चारों ओर धुंध तथा लाल और हरा प्रभामंडल हो; गाढ़ा, श्लेष्मिल स्राव, जिससे पलकें चिपक जाती थीं), 15c.
  • पलकों का फड़कना (चार और दस घंटे बाद), 1.
  • पलकों में भारीपन, मानो उन पर दबाव डाला जा रहा हो, 13.
  • पलकें बहुत भारी, साथ में उनींदापन (बारहवाँ दिन), 12.
  • पलकों में अत्यधिक भारीपन (सोलहवाँ दिन), 12.
  • बाएँ नेत्रकोण में दबाव और दबाने-जैसा संवेदन, 1. [340.]
  • ऊपरी पलक में दबाव, साथ में तीव्र सुई-चुभते दर्द, मानो लकड़ी की फाँस चुभी हो, और दृष्टि-शक्ति का लुप्त होना (चार घंटे बाद), 6.
  • पलकों में दबाव (आठ दिन बाद), 1.
  • दोनों पलकों के किनारों में फाड़ता दर्द, 13.
  • सुबह नेत्रकोणों में काटती-सी जलन, लेटी न होने पर भी, 1.
  • पलकों में दुखन और चरपराहट; वह उन्हें बंद नहीं कर सकती, 32.
  • पलकों में जलती खुजली, 2.
  • सुबह दाईं निचली पलक में जलती, काटती-सी अनुभूति, 1.
  • ऊपरी पलक में खुजली, 1.
  • अश्रु-तंत्र।
  • *दाईं अश्रु-ग्रंथि और अश्रु-कोष के क्षेत्र में सूजन (छह दिन बाद), 1.
  • आँखों और नाक से पानी बहना, 29. [350.]
  • बाहरी नेत्रकोणों से अश्रुस्राव, 1.
  • अश्रुस्राव और आँखों में एक प्रकार का धुंधलापन, 1.
  • दृष्टि।
  • दृष्टि अस्पष्ट और धुंधली, आँखों के सामने झिलमिलाहट के साथ (बारहवाँ दिन), 26.*
  • दृष्टि का धुंधलापन, 12, 13.*
  • पूरे दिन दृष्टि धुंधली (पाँचवाँ दिन), 12.
  • पीड़ादायक प्रकाशभीति के कारण वह सुबह आँखें नहीं खोल सकती, 1.
  • प्रकाशभीति; दिन का प्रकाश चौंधिया देता है, 1.
  • प्रकाशभीति के दौरे, जो आँख के श्वेत भाग के प्रदाह और अश्रुस्राव के साथ बारी-बारी से होते हैं (दस दिन बाद), 1.
  • आँखों के सामने Muscæ volitantes, 2.
  • दिन के प्रकाश से आँखें इस प्रकार चौंधिया जाती हैं कि दौरों के समय वह क्षण-भर कुछ नहीं देख पाता, 1. [360.]
  • आँखों के सामने हल्की फड़फड़ाहट, 23.
  • आरंभ में उसकी दृष्टि की स्पष्टता केवल क्षण-भर के लिए चली जाती थी, 32.
  • धुंधली दृष्टि; उसे कुछ भी स्पष्ट नहीं दिखता; दो दिनों तक लगातार यही स्थिति रही, 32.
  • वह न पढ़ सकती थी, न लिख सकती थी; सब कुछ आपस में मिला हुआ दिखाई देता था, 1.*
  • आँखों पर परदा पड़ा-सा प्रतीत होता था (दूसरा दिन), 1.
  • मासिक धर्म के दौरान आँखों के सामने सब कुछ फीका दिखाई देता है, 1.
  • भोजन के बाद धुंध छाई-सी लगती है; आँखें चौंधियाई हुई लगती हैं; उन्हें ऊपर नहीं उठा सकती (दस दिन बाद), 1.
  • दाईं आँख के सामने लगातार एक धब्बा, 30.
  • सिरदर्द के बाद आँखों के सामने अँधेरा छा गया, 3.

कान

  • बाहरी कान की सूजन, साथ में भीतरी कान से पतला स्राव और फुफकार-जैसी ध्वनि, जिससे श्रवण प्रभावित होता है, 1.* [370.]
  • कानों के किनारे प्रदाहित और नम, 1.
  • बाएँ कान से पतला स्राव (पाँच दिन बाद), 1.
  • बड़ी मात्रा में पतला कान का मैल (नौ दिन बाद), 1.
  • अपराह्न 1 बजे दाएँ कान के नीचे और पीछे महीन फाड़ता दर्द (पाँचवाँ दिन), 3.
  • कान के पीछे की हड्डी में झटकेदार काटता दर्द, 1.
  • दाएँ कान के पीछे फाड़ता दर्द, 3.
  • कानों में सुई-चुभन, दुखन और खुजली, मुख्यतः बाएँ कान में, 20.
  • दाएँ कान में ऐंठन-जैसा खिंचाव (चौबीस घंटे बाद), 1.
  • दाएँ कान में दर्द (पहला दिन), 17.
  • meatus auditorius में पीड़ादायक दबाव, 1. [380.]
  • नाक साफ करने के लिए फूँकने पर बाएँ कान में दबावकारी दर्द, 1.
  • meatus auditorius में कर्णशूल-जैसा खिंचता दर्द, 1.*
  • दाएँ कान में और वहाँ से गर्दन के नीचे तक खिंचता दर्द, 1.
  • कान के भीतर और कान पर फाड़ता दर्द, 3.
  • बाएँ कान में झटकेदार दर्द, 1.
  • बाएँ कान में कौंधता दर्द, साथ में ऐसा महसूस होना मानो उसमें से कोई द्रव बह रहा हो, 32.
  • दाएँ कान में सुई-चुभते और फाड़ते दर्द, 13.
  • बाएँ कान में सुई-चुभते दर्द, 13 ; (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • कानों में सुई-चुभते दर्द (आठवाँ दिन), 19.*
  • बाएँ कान से बाईं कनपटी तक चुभता दर्द (पंद्रहवाँ दिन), 22. [390.]
  • कान में खुजली, विशेषतः निगलते समय, 1.*
  • दोनों कानों में खुजली, 33.
  • कान में स्पंदन से आँखें हिलती हैं, जिससे वस्तुएँ ऊपर-नीचे होती दिखाई देती हैं, 1.
  • रात में जिस कान के बल वह लेटता है, उसमें स्पंदन, 1.
  • दाएँ कान में स्पंदन, 1.
  • कान बंद-से लगते हैं (आठ दिन बाद), 1.*
  • श्रवण।
  • *तेज ध्वनियों के प्रति कान की पीड़ादायक संवेदनशीलता, 1.
  • शोर के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता , यहाँ तक कि चौंककर उछल पड़ना, 1.*
  • श्रवण बहुत संवेदनशील है, 1.*
  • अपराह्न में थोड़े समय के लिए दोनों कानों से सुनाई देना बंद (दूसरा दिन), 8. [400.]
  • सुनने में कठिनाई, जो अचानक आती और चली जाती है (दूसरा दिन), 16.
  • सुनने में कठिनाई, जो भोजन के बाद बढ़ जाती है, 1.
  • मनुष्य की आवाज सुनने में कठिनाई, 1.*
  • *सिर में गर्जन के कारण श्रवण कम होना, 1.
  • दाएँ कान में बुलबुलाहट, मानो कोई वस्तु कान के परदे पर प्रहार कर रही हो; इसकी झनझनाहट सिर में अनुभव होती है और उसे व्याकुल कर देती है, 1.
  • दाएँ कान में बुलबुलाहट, 1.
  • कान में झींगुरों की चिरचिराहट-जैसी ध्वनि, 1.
  • निगलने पर कान में चटकने की ध्वनि, 1.
  • बाएँ कान में लयबद्ध फड़फड़ाहट, 1.
  • कान में मंद भनभनाहट, साथ में सुनने में कठिनाई और ऐसा संवेदन मानो कान में कोई वस्तु हो, विशेषतः सुबह उठने पर; चार दिनों तक बनी रही, 6. [410.]
  • कानों में फड़फड़ाहट-जैसी ध्वनियाँ, 1.
  • शाम को कानों में घंटी बजने-जैसी ध्वनि (इकतीसवाँ दिन), 25.
  • कानों में गर्जन, 1 ; (सोलहवाँ दिन), 15 ; (दूसरा दिन), 16.*
  • कानों में घंटी की ध्वनि-जैसा गर्जन, इतना तीव्र कि इसके कारण वह रात में लेट नहीं सका, बल्कि उसे उठकर एक बार में पंद्रह मिनट तक इधर-उधर चलना पड़ा (पाँच दिन बाद), 1.
  • भोजन से पहले और बाद में बाएँ कान में गर्जन, 5.
  • कान में गड़गड़ाहट, गर्जन और घरघराहट (छत्तीस घंटे बाद), 1.

नाक

  • दाहकारी चुभन वाली, दर्दनाक पपड़ी दाएँ नथुने के भीतर गहराई में, 1।
  • लगातार छींकें आती हैं, किंतु वह संतोषजनक ढंग से छींक नहीं पाती, 32।
  • दोपहर में और उसके बाद अगले पूर्वाह्न में बार-बार छींकें (पाँच दिनों के बाद), 8।
  • बार-बार छींकें (छत्तीस घंटों के बाद), 1। [420.]
  • छींक वाला जुकाम, जो कई दिनों तक रहता है, 29।
  • बार-बार, पर सामान्यतः निष्फल, छींकने के प्रयास (अट्ठाईस और अड़तालीस घंटों के बाद), 7।
  • नज़ला (आठवाँ दिन), 18।
  • लगातार नज़ला, 36।
  • नज़ला और खाँसी, साथ में निचले जबड़े के नीचे की ग्रंथियों में सूजन, निगलने पर गले में दर्द और अत्यधिक ठिठुरन; उसे लेटना पड़ा; एक घंटे बाद, बिस्तर में, पूरे शरीर पर दाहकारी गर्मी, 1।
  • बहता नज़ला (पाँच, छह और बारह दिनों के बाद), 1।
  • कई सप्ताह तक तीव्र नज़ला (आरंभिक दिन), 1।
  • बहुत अधिक नज़ला (कुछ घंटों के बाद), 1।
  • सूखा नज़ला (सातवाँ दिन), 19।
  • सूखा नज़ला; नाक से हवा नहीं ले पाता था (दसवाँ दिन), 19। [430.]
  • सूखा नज़ला, साथ में भर्राई हुई आवाज़ (डेढ़ घंटे के बाद), 8।
  • वह ऐसे नज़ले से छुटकारा नहीं पा सकी, जो कभी सूखा और कभी बहता था, 1।
  • सूखा श्लैष्मिक नज़ला, सुबह जागने पर, 3।
  • नज़ले के बिना नाक से बहुत अधिक श्लेष्मा निकलना, 1।
  • नाक से बहुत अधिक, गाढ़ा, श्लेष्मायुक्त स्राव (आठवाँ दिन), 23।
  • नज़ले के बिना नाक से बहुत अधिक दाहकारी, पानी जैसा स्राव बहता है, जिससे नाक भीतर और बाहर दुखने लगती है तथा रक्तस्रावी हो जाती है, साथ में पाँच दिनों तक रक्त या ताज़ा काटे गए पशुओं जैसी गंध, 1।
  • नाक में बंदपन का अहसास और नाक से स्राव, मानो सिर में जुकाम हो, 29।
  • नाक और आँखों से पानी बहता है, 29।
  • रात का भोजन करते समय नाक से तीव्र रक्तस्राव; रक्त दाएँ नथुने से बहा, बहुत अधिक और गहरा लाल था; उसके बाद सिरदर्द में राहत मिली (दसवाँ दिन), 18a।
  • नाक से बहुत अधिक रक्तस्राव (बीस घंटों के बाद), 1। [440.]
  • कभी-कभी केवल झुकने पर नाक से रक्त की बूँदें गिरती हैं, 1।
  • नाक से रक्तस्राव, 35 ; (आरंभिक दिन), 1।
  • नाक में उँगली डालने के बाद नकसीर, साथ में नाक का सूखापन, 1।
  • नाक साफ़ करने पर रक्तमिश्रित श्लेष्मा निकलना, 1।
  • नाक का पूरी तरह बंद हो जाना, जिससे वह मुश्किल से बोल पाती थी; साँस लेने के लिए मुँह खुला रखना पड़ता था (बारह घंटों के बाद), 1।
  • नाक कुछ बंद (चौथा दिन), 23।
  • सुबह नाक में अवरोध, जिसके बाद दिन के बाद वाले भाग में नज़ला, 32।
  • सुबह नाक के ऊपर दबाव, 1।
  • नथुनों के चारों ओर काटने जैसे दर्द, मानो वहाँ व्रण बन रहा हो, जो ऊपर मस्तिष्क की ओर लहराते हैं और माथे में तना हुआ, धड़कता दर्द उत्पन्न करते हैं; नाक का सिरा स्पर्श के प्रति अत्यंत दर्दनाक, मानो उसमें पीप बन रही हो; दो दिनों तक (दस दिनों के बाद), 1।
  • नाक की पीठ पर दुखन, मानो नासास्थि को पीटा गया हो (दूसरा दिन), 16। [450.]
  • नाक के बाएँ पंख में फाड़ता दर्द, 3।
  • नाक की जड़ और दाईं गाल-अस्थि में खिंचाव, 3।
  • नाक में महीन, खिंचावयुक्त फाड़ता दर्द, 3।
  • नासापट में दर्द, 1।
  • नाक के सिरे में जलनयुक्त, लपकते दर्द, जो माथे तक उड़ते हैं, 32।
  • नाक के एक ओर जलनयुक्त चुभन, 1।
  • नाक के सिरे में रेंगने और भीतर कुरेदने का अहसास, 1।
  • नाक के पंख के पीछे की खाँची में खुजली और दुखन जैसा दर्द (वास्तविक दुखन के बिना), 1।
  • नाक में खुजली, 3 ; (छब्बीसवाँ दिन), 25।
  • गंध अत्यधिक तीव्रता से महसूस होती है (उपचारात्मक क्रिया), 1।

चेहरा। [460.]

  • चेहरे, होंठों और निचले जबड़े के नीचे की ग्रंथियों में सूजन, साथ में ठिठुरन और बर्फ जैसे ठंडे पैर, 1।
  • वह कई दिनों तक अत्यंत पीली रहती है, मानो लंबी बीमारी के बाद हो (तीन दिनों के बाद), 8।
  • चेहरे का पीलापन, 1 ; (पहला और सातवाँ दिन), 18।
  • उसके चेहरे में पीड़ादायक जलन थी, 32।
  • गाल।
  • गालों की हड्डियों और कान के पीछे खिंचाव वाला दर्द, स्पर्श से बढ़ता है, 1।
  • मासिक धर्म के दौरान, पूर्वाह्न में, बाएँ गाल में फाड़ते दर्द के दो पीड़ादायक झटके ऊपर की ओर फैले (दसवाँ दिन), 8।
  • दोनों गालों में चार घंटे तक फाड़ता दर्द, जिसके बाद ऐसा अहसास हुआ मानो बाईं दाढ़ों में खट्टापन-सी झनझनाहट हो, 6।
  • होंठ।
  • ऊपरी होंठ और मसूड़े में सूजन, स्पर्श करने पर अत्यंत दर्दनाक, 1।
  • निचले होंठ में दो दिनों तक बहुत अधिक सूजन (सत्रह दिनों के बाद), 1।
  • निचले होंठ के लाल भाग की सीमा पर अत्यंत दर्दनाक फुंसी, 1। [470.]
  • ऊपरी होंठ के लाल भाग में छाले, साथ में दाहकारी चुभन वाला दर्द, 1।
  • ऊपरी होंठ के लाल भाग की सीमा पर छाले; पहले खुजली के साथ, फिर पपड़ी पड़ जाने पर केवल दाहकारी चुभन वाला दर्द, 1।
  • ऊपरी होंठ पर, लाल भाग की सीमा में खुजलीदार पपड़ी (सोलह दिनों के बाद), 1।
  • होंठ सूखे और फटे हुए, 13।
  • होंठों का सूखापन, 38 ; (पाँचवाँ दिन), 18।
  • होंठ बहुत रूखे-सूखे महसूस होते हैं; तालु में दुखन, 29।
  • होंठ गर्म (सातवाँ दिन), 15।
  • जबड़े।
  • ऊपरी और निचले जबड़े की हड्डियों में कभी-कभी मंद पीड़ा, 29।
  • दोनों जबड़ों में मंद पीड़ा, 40।
  • बाएँ जबड़े के जोड़ में दर्दनाक सिकोड़ने वाली ऐंठन, और बाद में कनपटी में, 3। [480.]
  • बाएँ कान के सामने जबड़े के जोड़ में चोट लगे जैसा दर्द, स्पर्श करने और चबाने पर, 1।
  • जबड़े के जोड़ में तनाव (तुरंत), 16।
  • जम्हाई लेते समय निचले जबड़े के कोण में दबावयुक्त दर्द, जो कान तक फैलता है, 1।

मुख

  • दाँत।
  • चबाते समय दाँत ढीले और संवेदनशील, 1।
  • दाँत ढीले हो जाते हैं और तनिक-से दबाव से भी मसूड़े में दर्द होता है (सोलहवाँ दिन), 12।*
  • एक दाढ़ में शोथ, साथ में मसूड़े की सूजन और दुखन, 3।*
  • उसके सभी दाँत ढीले और लम्बे हुए-से लगते हैं, 40।
  • उसके दाँत मुँह के लिए अत्यधिक बड़े और लम्बे लगते हैं, 23।
  • चार सप्ताह तक दाँतों में खटास-जैसी झनझनाहट, 1।
  • ऊपरी दाँतों में अम्ल लगने जैसी झनझनाहट, 1। [490.]
  • सभी दाँतों में दुखता हुआ दर्द, 33।
  • सभी दाँतों में लगातार दुखन, 29।
  • काटते समय पीछे के एक दाँत में ऐसा दर्द मानो उसमें व्रण बन रहा हो, 1।
  • सुबह जागने पर दाँत-दर्द, जो उठने के कुछ समय बाद तक रहता है, 1।
  • मन्द दर्द, विशेषकर दाढ़ों में, दोपहर का भोजन करने और कुछ पीने के बाद, 1।
  • लगातार साधारण दाँत-दर्द; खाते समय गायब हो जाता है; रात में सबसे तीव्र, जिससे नींद नहीं आती, 1।
  • खाने के बाद दाँत-दर्द, 3।
  • तनावयुक्त दाँत-दर्द, 1।
  • दाँत-दर्द मुख्यतः गर्म भोजन खाते समय और मुँह में ठंडी हवा लेने पर, 1।
  • बालक को दाँत निकलने के ज्वर जैसा दौरा पड़ा; यद्यपि उसके सभी दाँत निकल चुके थे, फिर भी उसकी लार टपकती थी, वह अपने हाथ मुँह में गहराई तक डालता था और शाम को सिर में गर्मी होती थी, 1। [500.]
  • नीचे की एक दाढ़ में दर्द, मानो वह बहुत लम्बी हो, 1।
  • दाईं ओर पीछे के ऊपरी दाँतों में दो बार दर्दयुक्त झटके (पहला दिन), 8।
  • तीव्र दाँत-दर्द और पूरे निचले जबड़े में दर्द, दबाव और झटकेदार दर्द, जिससे वह पूरी रात सो न सका, 1।
  • खोखले दाँत में तीव्र दबाव, 1।
  • खोखले दाँत में खिंचावयुक्त दर्द, 1।
  • खोखले दाँत में दौरे के रूप में खिंचाव, 4।
  • निचले कृन्तक दाँतों में खिंचाव, 1।
  • मसूड़ों की दुखन के साथ खिंचावयुक्त-चीरता दाँत-दर्द, 40।
  • खाते समय चीरता हुआ दाँत-दर्द, जो उसके बाद पंद्रह मिनट तक रहता है, 1।
  • बालक को दाँत निकलने के ज्वर जैसा दौरा पड़ा; यद्यपि उसके सभी दाँत निकल चुके थे, फिर भी उसकी लार टपकती थी, वह अपने हाथ मुँह में गहराई तक डालता था और शाम को सिर में गर्मी होती थी, 1। [510.]
  • चुभता हुआ दाँत-दर्द, जिसके कारण वह मुँह में न कुछ गर्म ले सकता था, न ठंडा, 1।
  • चुभता हुआ दाँत-दर्द, जिससे वह रात में सो नहीं पाता था, साथ में गाल पर गर्मी; वह मुँह में कुछ भी गर्म नहीं ले सकता था, 1।
  • खाते समय एक कृन्तक दाँत में बिजली-सी चुभन (उन्नीस दिन बाद), 1।
  • तेज हवा से एक स्वस्थ दाँत में चुभनें, जिसमें व्रण जैसी पीड़ा थी; इसके बाद निचले जबड़े में सूजन (अठारह दिन बाद), 1।
  • कई दाँतों में जलनयुक्त चुभनें, जो खाने के बाद दर्द करने लगते थे; दर्द रात में अधिक, ठंडी हवा भीतर खींचने से बढ़ता, साथ में सिर में गर्मी और गालों में जलन, 1।
  • मसूड़े।
  • मसूड़े की दर्दयुक्त शोथयुक्त सूजन (छह दिन बाद), 1।*
  • मसूड़े में सूजन; गर्म पेय से जलन होती है और चबाते समय मसूड़े में दुखन जैसा दर्द होता है, 1।
  • मसूड़े काफी शोथयुक्त हैं, 29।
  • मसूड़ों पर कई फुंसियाँ, 33।
  • सूजे हुए मसूड़े पर छोटी फुंसी, 2।* [520.]
  • मसूड़े और होंठों की भीतरी सतह पर दुखती हुई दर्दयुक्त फफोलियाँ, 1।
  • मसूड़े में दुखन, 1।*
  • मसूड़ों में बहुत अधिक दुखन, 32।
  • *मुँह में ठंडा पानी लेने पर मसूड़ा दर्द के साथ अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है, 1।
  • ऊपरी मसूड़ों में ठंडक का अनुभव, 29।
  • मसूड़े में तत्काल कसाव की अनुभूति, 27।
  • जीभ के दाएँ आधे भाग में बिना दर्द के सूजन (पाँच दिन बाद), 1।
  • जीभ।
  • जीभ पर परत, 3, 13।
  • सुबह जीभ पर सफेद परत (दसवाँ दिन), 22।
  • जीभ बहुत सूखी, साथ में तीखे मसालों जैसी अनुभूति (अठारहवाँ दिन), 14। [530.]
  • जीभ में दुखन महसूस होती है (छठा दिन), 14।*
  • जीभ में दुखन, अग्रभाग पर दर्दयुक्त बिंदुओं के साथ, 3।
  • दो या तीन बार उसे अपनी जीभ पोंछनी पड़ी, क्योंकि उसे लगा कि उस पर लम्बाई की दिशा में एक बाल पड़ा है और मानो वह श्वासनली से ऊपर आ रहा है, 32।
  • *ऐसी अनुभूति मानो जीभ के अग्रभाग पर एक बाल पड़ा हो, 1।
  • ऐसी अनुभूति मानो जीभ के अग्रभाग पर एक बाल हो और वह श्वासनली तक फैला हो, जहाँ उससे रेंगने जैसी अनुभूति होती थी, जिससे वह बार-बार खाँसने और छोटी कठोर खाँसी करने को विवश होता था (दस दिन बाद), 1।*
  • जीभ का सुन्नपन, 3।
  • मुख—सामान्य।
  • सुबह मुँह से दुर्गंध , लगभग वैसी जैसी पारदजन्य लारस्राव में होती है, 1।*
  • मुँह के कोने में दर्दयुक्त व्रण (सैंतीस दिन बाद), 1।*
  • मुँह का कोना खुजली की अनुभूति के साथ व्रणयुक्त, अनेक दिनों तक पपड़ियों के साथ (चौबीस घंटे बाद), 1।*
  • निचले होंठ की भीतरी सतह पर कवकाकार व्रण, 1। [540.]
  • तालु पर एक व्रण, जो मसूड़े तक पहुँचता है, 1।
  • बाईं अधोजिह्वा ग्रंथि को गहराई से दबाने पर दर्द होता था (तीसरा दिन), 25।
  • मुँह से अत्यधिक गर्मी निकलती है, 1।
  • सुबह जागने के बाद मुँह लिसलिसा, साथ में मिचली-जैसी अनुभूति (सातवाँ दिन), 8।
  • खाने के बाद हमेशा मुँह में अम्लता (तीन और दस दिन बाद), 1।
  • प्यास के साथ मुँह में अत्यधिक सूखापन और कुछ कड़वाहट (सोलहवाँ दिन), 12।
  • खुली हवा में चलते समय मुँह का सूखापन, 1।
  • मुँह का लगातार सूखापन (तीस घंटे बाद), 1।*
  • मुँह और होंठ सूखे प्रतीत होते हैं, 1।
  • मुँह का लगातार सूखापन, 40। [550.]
  • बिना प्यास के मुँह का सूखापन, 33।
  • मुँह बहुत सूखा, 32।
  • तालु में दुखन, जिसका रंग फीका-पीला हो गया, 37।
  • तालु में दुखन; होंठ बहुत शुष्क महसूस होते हैं, 20।
  • तालु के पर्दे में कुछ चुभनें, 1।
  • कठोर और कोमल तालु में खुजली, 1।
  • लार।
  • मुँह में लगातार पानी जैसा द्रव एकत्र होता है, उसे थूकना पड़ता है, 1।
  • मुँह में बहुत अधिक लार (आठ दिन बाद), 1।
  • स्वाद।
  • स्वाद-बोध और भूख क्षीण हो जाते हैं, 29।
  • स्वाद और भूख का लोप, 32। [560.]
  • मुँह में ऐसी कड़वाहट मानो पेट खराब हो, 20।
  • सुबह कड़वा स्वाद, 1।
  • कई दिनों तक हर वस्तु, यहाँ तक कि पानी भी, कड़वा लगता है (तीन दिन बाद), 8।
  • सुबह उठने के बाद कड़वा स्वाद (तीसरा दिन), 8।
  • मुँह कड़वा, 13, 18, 32 ; (सोलहवाँ और बीसवाँ दिन), 12।
  • सुबह मुँह में रक्त का स्वाद, 1।
  • कुछ कड़वाहट के साथ मुँह में खट्टा स्वाद, 1।
  • छींकते समय गले में धातु जैसा स्वाद (छप्पनवाँ दिन), 23।
  • सुबह जागने पर खराब स्वाद, 3।
  • सुबह सड़े अंडों जैसा अत्यंत गंदा स्वाद, 32। [570.]
  • घिनौना, चिपचिपा और सड़ांधयुक्त स्वाद, 40।
  • साबुन के झाग जैसा स्वाद, 37।
  • मुँह में अप्रिय, लिसलिसा स्वाद, 1।
  • मुँह में तैलीय स्वाद (कुछ घंटों बाद), 1।
  • खाने के बाद मुँह में भोजन का स्वाद बहुत देर तक बना रहता है, 1।

गला

  • गला सूजा हुआ और दर्दयुक्त, 32।
  • थायरॉइड उपास्थि की सूजन; उस स्थान पर खुजली होती है तथा छूने पर चुभन होती है, 1।
  • नमकीन श्लेष्मा खँखारकर निकालना, 3।
  • गाढ़े श्लेष्मा को बार-बार खँखारकर निकालना (पहला दिन), 2।
  • पीले, अत्यंत दुर्गंधयुक्त श्लेष्मा के ढेलों को खँखारकर निकालना, 1। [580.]
  • गले में बहुत अधिक श्लेष्मा, जिसे खँखारकर निकालने के लिए वह निरंतर विवश थी (चौबीस घंटे बाद), 1।
  • खाँसी के बिना गले में श्लेष्मा ऊपर चढ़ना (तेईसवाँ दिन), 24।
  • गले में सूखापन, 32।
  • गले में ऐसा सूखापन, मानो जुकाम के कारण हो, 29।
  • गला बहुत सूखा, साथ में स्वर बैठना और बाह्य श्रवण-नलिका में खुजली, 1।
  • खाँसी के दौरान गले में कच्चापन (तेईसवाँ दिन), 24।
  • मुख्य भोजन के बाद गले का कच्चापन खाँसी उत्पन्न करता है (पहला दिन), 8।
  • गले में बहुत अधिक कच्चापन, 1।
  • गले में दुखन, साथ में बहुत अधिक श्लेष्मा (अड़तालीस घंटे बाद), 1।
  • निगलने पर गले की बाईं ओर गाँठ होने जैसी दुखन (चार दिन बाद), 1। [590.]
  • गले में दुखन, मानो वह किसी दुखते हुए स्थान के ऊपर से निगल रहा हो, साथ में कभी-कभी उसमें सुई-सी चुभन, 1।
  • निगलते समय गले की बाईं ओर दबावयुक्त दुखन, 1।
  • गले की बाईं ओर सूजन और तनावयुक्त दर्द; ग्रसनी-द्वार लाल और क्षुब्ध (सातवाँ दिन), 14।
  • सुबह गले में खुरचनयुक्त दुखन; शाम को उसमें चुभन, 1।
  • कई रातों तक बिस्तर पर दाईं करवट लेटने पर रात में गले में खुरदरापन और खुरचन, जिसके कारण वह आधे घंटे तक खाँसती रही और श्लेष्मा निकला, 1।
  • गले में खुरचने-सी अनुभूति, जो छोटी, कर्कश और बार-बार आने वाली खाँसी उत्पन्न करती है, साथ में श्वसनियों में कच्चेपन की अनुभूति; चार दिनों तक सुबह जागने पर और शाम को लेटने के बाद यह सर्वाधिक कष्टदायक रही, 28।
  • शाम को गले के निचले भाग में खुरचन की अनुभूति (सातवाँ दिन), 16a।
  • केवल निगलने पर गले में चुभनयुक्त दुखन, साथ में गले में ऐसा दर्द कि छूने पर भी दुखे, 1।
  • खाँसते समय गले में चुभन, 15b।
  • गले की बाईं ओर गाँठ होने जैसी अनुभूति; वह केवल अत्यंत कठिनाई से निगल पाती थी, 32। [600.]
  • गले में पिन या सुई जैसी चुभन, जिससे उसे खाँसी आती थी, 33।
  • गले और छाती में जलन (छह दिन बाद), 15a।
  • गले में जलन और डंक जैसी चुभन, विशेषकर जम्हाई लेते और निगलते समय, 15c।
  • गले में जलन, 29।
  • गले में तीव्र टिक-टिक जैसी अनुभूति खाँसी उत्पन्न करती है, 15c।
  • गले के गड्ढे के क्षेत्र में गुदगुदीभरी खुजली, जिससे दम घुटने की आशंका तब तक बनी रहती है जब तक गहरी, शरीर को झकझोर देने वाली खाँसी का दौरा आरंभ नहीं हो जाता; यह कई घंटों तक निरंतर चलता है और निचले उदर तथा गले में दर्द करता है, 1।
  • गले में कड़वा स्वाद, मानो आमाशय से आ रहा हो, 1।
  • दोपहर में गले में मिचली-सी अनुभूति, 1।
  • निगलते समय भोजन पश्च नासाछिद्रों में चला जाता है, 1।
  • ऐसी अनुभूति मानो भोजन के टुकड़े पश्च नासाछिद्रों में हों, 1। [610.]
  • पश्च नासाछिद्रों में अत्यधिक सूखेपन की अनुभूति, 1।
  • यूवुला।
  • यूवुला का लंबा हो जाना, साथ में गले में सूखापन, 1।
  • यूवुला सूजा हुआ, 4।
  • ग्रसनी।
  • गाने से ग्रसनी में दुखन, 1।
  • निगलने में कठिनाई; भोजन केवल धीरे-धीरे नीचे उतरता है; पहले ग्रसनी में गुड़गुड़ाहट होती है, जो क्रमशः आमाशय तक नीचे उतरती है और उसके तीन सेकंड बाद भोजन नीचे उतरता है, 1।
  • गले का बाहरी भाग।
  • दोनों कर्णमूल लार ग्रंथियों में कठोर सूजन, साथ में सिर हिलाने और छूने पर तनावयुक्त दर्द, 1।
  • एक कर्णमूल लार ग्रंथि में सूजन, साथ में चुभनयुक्त दर्द, 1।
  • अधोजंभ ग्रंथियों में सूजन, जो छूने पर दर्द करती है, साथ में उनमें खिंचावयुक्त दर्द और निगलने पर गले में ऐसी दुखन मानो भीतर सूजन हो (चौबीस घंटे बाद), 1।
  • (अधोजंभ ग्रंथि के एक पुराने फोड़े से फिर स्राव आरंभ हो गया, जिससे वर्षों पहले स्राव हुआ था किंतु अब उस पर पपड़ी जमी हुई थी), (तीसरा दिन), 24।
  • ग्रीवा ग्रंथियों में सूजन (पाँच और पच्चीस दिनों के बाद), 1।
  • गर्दन और गर्दन के पिछले भाग की ग्रंथियों में सूजन (नौ दिन बाद), 1। [620.]
  • ग्रीवा ग्रंथियाँ सूजी हुई, 1।
  • दाईं ओर की ग्रीवा पेशियाँ सूजी हुई हैं, 1।
  • अधोजंभ ग्रंथियाँ छूने पर दर्द करती हैं, परंतु सूजी हुई नहीं हैं, 1।
  • सूजी हुई अधोजंभ ग्रंथियों में सुई-सी चुभन (तीन दिन बाद), 1।
  • अधोजंभ ग्रंथियों में तीव्र सिकोड़ने वाला दर्द (इकतालीसवाँ दिन), 24।

आमाशय

  • भूख।
  • बहुत अधिक भूख; रोटी और गर्म भोजन की इच्छा; खाने के तुरंत बाद भूख और प्यास फिर लौट आईं (दसवाँ दिन), 19।
  • अत्यंत तीव्र भूख, इतनी कि सो पाना कठिन था (चौदहवाँ दिन), 27।
  • रात्रिभोज से पहले अत्यंत तीव्र भूख, साथ में भूख का पूर्ण अभाव और सभी अंगों में कंपन; इसके बाद सिहरन और पूरे शरीर में ठंडक, साथ में छाती में गर्मी (दूसरा दिन), 1।
  • सुबह अत्यंत तीव्र भूख, 3।
  • शाम की ओर अत्यंत तीव्र भूख और खाने के बाद अधिजठर-गर्त में मिचली की हल्की अनुभूति, 4। [630.]
  • अत्यंत तीव्र भूख, साथ में मुँह में पानी भरना, 1।
  • थोड़ी देर निश्चल लेटे रहने से ही अत्यंत तीव्र भूख शांत होती है, 1।
  • अत्यधिक भूख, 1।
  • लगातार भूख और खाने के बाद पेट भरा हुआ महसूस होना, फिर भी भूख बने रहना, 1।
  • कुतरने जैसी भूख, जो रोटी का एक कौर खाने से केवल थोड़ी देर के लिए शांत होती है, 1।
  • उसे भूख लगती है, पर वह कोई भोजन निगलना नहीं चाहती, 1।
  • शाम को भूख; उसने सामान्य से अधिक खाया, फिर भी तृप्ति नहीं हुई, किंतु पंद्रह मिनट बाद पेट भरा होने की अनुभूति हुई (पंद्रह दिन बाद), 1।
  • बहुत भूख लगी है; सामान्य रूप से खाता है और फिर शिकायत करता है कि सब कुछ गले तक चढ़ा हुआ प्रतीत होता है, 1।
  • किसी ऐसी वस्तु को खाने की इच्छा जिसे वह स्वयं नहीं जानता, साथ में मुँह में पानी भरना, 1।
  • केवल ठंडे, कच्चे भोजन की इच्छा, 1। [640.]
  • उसने बहुत थोड़ा खाया और तत्काल हर वस्तु से अरुचि हो गई, 8।
  • मांस से अरुचि, 1।
  • भूख खराब (सोलहवाँ दिन), 12।
  • भूख कम, 13; (सोलहवाँ दिन), 15।
  • भूख का अभाव, जिह्वा स्वच्छ (चौथा, पाँचवाँ और छठा दिन), 8।
  • भूख की अनुभूति और स्वाद-बोध क्षीण हो गए, 29।
  • भूख और स्वाद का अभाव, 32।
  • भूख का पूर्ण अभाव, 1।
  • प्यास।
  • प्यास, 13।
  • प्यास बढ़ी हुई, 13। [650.]
  • सामान्य से अधिक पीता है, 4।
  • बहुत अधिक प्यास और गले में सूखापन (दस दिन बाद), 1।
  • अत्यधिक प्यास, किंतु पीने की इच्छा नहीं, यहाँ तक कि ज्वर की शीतावस्था के दौरान भी (तीसरा और चौथा दिन), 8।
  • बहुत प्यास (पाँच दिन बाद), 1।
  • रात में बहुत प्यास; मुँह लगातार सूखा था (अड़तालीस घंटे बाद), 1।
  • डकारें।
  • डकारें, 17; (पैंतीसवाँ दिन), 24।
  • बार-बार गैस की डकारें (अड़तालीस घंटे बाद), 1, 4।
  • बार-बार किंतु अप्रिय न लगने वाली डकारें (तीसरा दिन), 12।
  • पानी मुँह तक ऊपर चढ़ता, जिसे उसे थूकना पड़ता था (चौथा दिन), 19।
  • कई दिनों तक, हर बार खाने के बाद भोजन के स्वाद वाली डकारें, 8। [660.]
  • भोजन के बाद खट्टी डकारें, साथ में गले में जलन, 3।
  • शाम को खट्टी डकारें, 1।
  • सुबह खट्टी और कड़वी डकारें, मानो पेट खराब हो, 1।
  • हर बार खाने के बाद डकारें, अम्लता और पेट से ऊपर आने वाला अत्यंत खराब स्वाद, जो दोबारा खाने तक बना रहता है, 1।
  • पेट से लगातार वायु की डकारें आना, 36।
  • जोर की डकारें, 1।
  • वायु की जोरदार, अनियंत्रित डकारें, जो लगभग आधे घंटे तक रहतीं और जिनके साथ बहुत मिचली होती, 31।
  • रात्रिभोज के बाद प्रबल डकारें, 1।
  • प्रबल डकारें (बीसवाँ दिन), 12।
  • हिचकी।
  • 12 और 12.30 के बीच पच्चीस मिनट तक हिचकी (तीसरा दिन), 2। [670.]
  • खाने से पहले और बाद में हिचकी, 1।
  • शाम को बिस्तर में हिचकी, 1।
  • अम्लदाह।
  • पेट से गले तक गर्म उद्गार चढ़ना, 1।
  • हर बार भोजन के बाद पेट से ऊपर चढ़ता अम्लदाह; मुँह में पानी भरता है और उसे बहुत थूकना पड़ता है (सात और बीस दिन बाद), 1।
  • तीव्र अम्लदाह, साथ में अधिजठर में बोझ की अनुभूति, 40।
  • मिचली और वमन।
  • मिचली, 13, 21; (पहला दिन), 13a।
  • रात में मिचली (पहली रात), 1।
  • सुबह उठने पर मिचली (दसवाँ दिन), 22।
  • मिचली, साथ में वायु की डकारें, 31।
  • मिचली, साथ में पेट में दबाव (छत्तीसवाँ दिन), 15। [680.]
  • मिचली, मानो वमनकारी औषधि लेने के बाद हो, 1।
  • खुली हवा में चलते समय एक प्रकार की मिचली, 1।
  • मिचली मानो निचले उदर में हो, जो कभी ऊपर चढ़ती और कभी नीचे उतरती है, लगातार कई दिनों तक, 1।
  • अपने सामान्य तंबाकू का धूम्रपान करते समय अचानक मिचली, बेहोशी-सी और कंपन, 1।
  • कई दिनों तक सुबह मिचली और जी घबराना, 1।
  • खाने के बाद मिचली, जो लेटने के बाद समाप्त हो जाती है, 1।
  • शाम 5 बजे रात्रिभोज के दौरान पेट में मिचली और पूरे शरीर में बेचैनी, इतनी कि उसे लेटना पड़ा, जिसके बाद बेहतर लगा (सातवाँ दिन), 8।
  • दोपहर के भोजन के दौरान बहुत अधिक मिचली (दूसरा दिन), 22।
  • बहुत बार मिचली, किंतु वमन नहीं, यहाँ तक कि सुबह खाली पेट भी; मानो अधिजठर-गर्त में हो, जबकि भूख अच्छी और भोजन का स्वाद स्वाभाविक था (बीस दिन बाद), 1।
  • सुबह क्षणिक मिचली, जिसके बाद कमजोरी और सिहरन, जो दोपहर तक रहती है, 1। [690.]
  • संभोग के दौरान उसे मिचली का आक्रमण होता है (इक्कीस दिन बाद), 1।
  • लगातार मिचली और पेट में खालीपन की अनुभूति, 32।
  • पूर्वाह्न में मिचली, साथ में अधिजठर-प्रदेश में पीड़ा और डकार लेने की इच्छा, किंतु डकार नहीं ले सकी (सातवाँ दिन), 8।
  • मिचली और वमन के प्रयास (सातवाँ दिन), 18।
  • खाने के तुरंत बाद वमन तक पहुँचने वाली मिचली; वह पतला शोरबा खाने का भी साहस मुश्किल से करता था, 6।
  • निष्फल उबकाइयाँ, मुँह में पानी चढ़ना, साथ में मिचली, 33।
  • वमन की इच्छा (बीसवाँ दिन), 12; (चौथा दिन), 19।
  • उसने सुबह 9 बजे भोजन का वमन किया (चौथा दिन), 6।
  • पेट।
  • खाने के बाद दो घंटे तक पेट भरा हुआ महसूस होना, केवल डकारों से राहत, 1।
  • खाने के बाद बेचैनी (दसवाँ दिन), 16। [700.]
  • पेट की पीड़ा के कारण वह रात में बार-बार जागता था; पहले दबावयुक्त, बाद में चिकोटी काटने जैसी पीड़ा, 1।
  • खाने के बाद पेट में ऐंठनयुक्त पीड़ा के दौरे, 1।
  • तेज खाँसी के बाद अधिजठर-गर्त में पीड़ा, 1।
  • अधिजठर-गर्त में पीड़ा (पहला दिन), 17।
  • अधिजठर-गर्त में प्रचंड पीड़ा, भारी बोझ और ऐंठन जैसी अनुभूति, 41।
  • अधिजठर-गर्त में मरोड़ के आक्रमण, जिनके बाद मिचली ऊपर चढ़ती, साथ में प्रबल हृदय-स्पंदन और उरोस्थि में प्रबल दबाव, जो गले तक फैलता; उसे कड़वा पानी गले तक ऊपर लाना पड़ता; खाने से राहत, भोजन का वमन नहीं हुआ; सुबह, बिस्तर से उठने पर अधिक खराब, 1।
  • अधिजठर-गर्त में और उसके आसपास तथा दोनों पार्श्वोदर-प्रदेशों में खिंचावयुक्त मरोड़ और चुभन, जो कूल्हे के जोड़ों तक फैलती है, 1।
  • पेट में मरोड़ और कुतरन, साथ में मिचली तथा पीठ और गर्दन पर रेंगती हुई ठंडी सिहरन; उदर में सुनाई देने वाली गड़गड़ाहट; टाँगें मोड़कर लेटने पर समाप्त, 1।
  • पेट में मरोड़ और नोचने जैसी अनुभूति (एक घंटे बाद), 1।
  • पेट के ऊपर और पार्श्वोदर-प्रदेशों में मरोड़, चिकोटी काटने जैसी पीड़ा और दबाव, एक सप्ताह तक बार-बार दौरे के रूप में, 1। [710.]
  • अधिजठर-प्रदेश में मानो कसकर मरोड़ा जा रहा हो ऐसी अनुभूति, बहुत पीड़ादायक नहीं; पूर्वाह्न में बार-बार, जिसके शीघ्र बाद मुलायम मलत्याग होता (पाँचवाँ दिन), 8।
  • मासिक धर्म के दौरान अधिजठर-गर्त में विषादपूर्ण व्याकुलता, इतनी कि वह स्वयं को डुबो देना चाहती थी, 1।
  • पेट में चुभन (पहला दिन), 17।
  • ऐसा लगता मानो पेट में पत्थर रखा हो, साथ में पेट भरा होने की अनुभूति, 1।
  • वायुवर्धक भोजन पेट में गाँठ की तरह दबाव डालता है; वमन करना पड़ता है, 1।
  • पेट में सीसे जैसा भारीपन, 1।
  • पेट में भारीपन की अनुभूति, साथ में भूख का अभाव, 1।
  • खाने के बाद पेट में दबाव, 1, 3।
  • पेट में दबाव (पहला दिन), 17; (बयालीसवाँ दिन), 15।
  • पेट में बहुत अधिक दबाव (चौदह दिन बाद), 1। [720.]
  • अधिजठर-गर्त में दबावयुक्त पीड़ा (पाँचवाँ दिन), 17।
  • पेट में दबाव, फिर चिकोटी काटने जैसी पीड़ा, जिसके बाद एक बार डकार आई, 1।
  • आधे घंटे तक पेट में दबाव और आँतों में काटती पीड़ा, 1।
  • पेट में दबाव, जो खुली हवा में चलने से बढ़ता है, साथ में बार-बार खाली डकारें, 1।
  • शाम को पेट में दबाव और मिचली, साथ में सभी प्रकार के भोजन से अरुचि (तीसरा दिन), 8।
  • दोपहर के भोजन के बाद पेट में दबाव, मानो किसी भारी वस्तु से हो (दसवाँ दिन), 22।
  • अधिजठर में दबाव, मानो बहुत अधिक खा लिया हो, 38।
  • अधिजठर में अपच जैसी दबावयुक्त पीड़ा, 29।
  • पेट में प्रबल दबाव, मानो पत्थर से हो (पंद्रहवाँ दिन), 12।
  • अधिजठर में ठंडी पीड़ा, मानो पेट में ठंडा पत्थर रखा हो, 32। [730.]
  • अधिजठर-गर्त में कभी काटने जैसी अनुभूति, फिर भारी बोझ जैसी अनुभूति और एक प्रकार का कसाव, 34।
  • अधिजठर-गर्त में जलन, 1।
  • अधिजठर-गर्त के ऊपर जलन, लगभग अम्लदाह जैसी, 1।
  • आधी रात के बाद पेट में जलन और जी घबराने से जागा; इसके बाद पिछली शाम खाए भोजन की खाली डकारें आईं, जिनका स्वाद दुर्गंधित नहीं था (पंद्रह दिन बाद), 1।
  • खाने के बाद अत्यंत तीव्र भूख जैसी कमजोरी, जो बिना रुचि के दोबारा खाने पर समाप्त हो जाती है (पहला दिन), 1।
  • खाने के बाद पेट की कमजोरी, 5।
  • यद्यपि उसे अच्छी भूख थी, फिर भी उसका पेट निष्क्रिय-सा प्रतीत होता था, 2।
  • पेट बहुत खराब महसूस होता है, 29।

उदर

  • उपपर्शुकीय क्षेत्र।
  • उपपर्शुकीय क्षेत्रों के आर-पार ऐंठन जैसा दर्द, जो पीठ तक फैलता है, विशेषकर चलने-फिरने पर (दसवाँ दिन), 16।
  • दोनों उपपर्शुकीय क्षेत्रों में धीरे-धीरे खिंचता हुआ मंद दर्द, जो रीढ़ तक फैलता है, रात में कम, 1। [740.]
  • उपपर्शुकीय क्षेत्रों के नीचे चुभनें (पहला दिन), 18a।
  • उपपर्शुकीय क्षेत्रों में चुभनें, 3।
  • दाएँ उपपर्शुकीय क्षेत्र में दुखता हुआ दर्द, 29।
  • दाएँ उपपर्शुकीय क्षेत्र में निरंतर दबाव, 3।*
  • दाएँ उपपर्शुकीय क्षेत्र में अत्यंत प्रचंड मंद चुभन, जो उदर के आर-पार फैलकर विपरीत पार्श्व से बाहर निकलती है, तीखी, साथ में अधिजठर-गर्त में प्रचंड दर्द, शरीर को मोड़कर सिकोड़ने से आराम, दोपहर 2.30 P.M. पर (पाँचवाँ दिन), 6।
  • दाएँ उपपर्शुकीय क्षेत्र में कुछ तीखी, अत्यंत महीन (जलनयुक्त) चुभनें, दोपहर बाद (पाँचवाँ दिन), 8।
  • नाभि और पार्श्व।
  • नाभि-प्रदेश में कसावयुक्त मरोड़ (सातवाँ दिन), 18a।
  • उदरशूल; नाभि के चारों ओर कसने वाला दर्द, कभी-कभी चुभनों के साथ; उदर फूला हुआ; दर्द तब तक बना रहता है, जब तक वायु के साथ पतला मलत्याग नहीं हो जाता (बारहवाँ दिन), 19।
  • भोजन के बाद नाभि के चारों ओर कसने वाला दर्द, जिसके बाद सामान्य से अधिक पतला, लेई-जैसा मलत्याग (पहला दिन), 18।
  • नाभि-प्रदेश में कसावयुक्त उदरशूल (पहला दिन), 18a। [750.]
  • नाभि के चारों ओर खोदने-जैसी अनुभूति, दोपहर बाद (पहला दिन), 18।
  • मलत्याग से ठीक पहले और उसके दौरान नाभि-प्रदेश के नीचे दबाव, 6।
  • नाभि के चारों ओर दबावकारी अनुभूति, जिसके बाद आध्मान और बहुत अधिक वायु का निष्कासन (पाँचवाँ दिन), 18।
  • नाभि-प्रदेश में दबाव, 1।
  • गहरी साँस लेने पर नाभि के चारों ओर चुभता दर्द (चौथा दिन), 19।
  • नाभि के चारों ओर काटता दर्द और मरोड़, प्रातः 9.30 A.M. पर (पहला दिन), 8।
  • नाभि के प्रदेश में काटता दर्द, जो सीधे पीठ तक आर-पार जाता है और अंतरालों पर आता है, 32।
  • नाभि-प्रदेश में समय-समय पर काटता दर्द (दो दिनों के बाद), 1।
  • नाभि के चारों ओर दर्द और काटने की अनुभूति तथा मलत्याग की इच्छा, जो बार-बार आती-जाती है, मध्यरात्रि के बाद और पूर्वाह्न में (दूसरा दिन), 8।
  • नाभि पर क्षणिक चिकोटी-जैसा दर्द, 29। [760.]
  • नाभि के चारों ओर चिकोटी-जैसा दर्द और बाद में पूरे उदर में, साथ में बहुत अधिक पानी-जैसा श्वेतप्रदर निकलना, जैसा मासिक धर्म के दौरान होता है (चौथा दिन), 8।
  • दाईं पसलियों के नीचे पीछे की ओर (वृक्कों के प्रदेश में) दर्द, शाम को, 1।
  • उदर के दाएँ पार्श्व में प्रचंड चुभनें, आध्मान के साथ (बारहवाँ दिन), 26।
  • उदर के दाएँ पार्श्व में चुभनें (चौथा दिन), 22।
  • उदर के बाएँ पार्श्व में, उपपर्शुकीय क्षेत्र के नीचे, चुभनें (सातवाँ दिन), 18a।
  • बाएँ पार्श्व-कटि में तीखी चुभनें (सोलहवाँ दिन), 12।
  • उदर के बाएँ पार्श्व में कुछ चुभनें, शाम को (पहला दिन), 1।
  • उदर के बाएँ पार्श्व के अधिक बाहरी भाग में चुभता दर्द, केवल चलते समय (छह घंटे बाद), 6।
  • सामान्य उदर।
  • उदर लगातार कठोर, बहुत अधिक फूला हुआ, जिससे उसे अत्यधिक असुविधा होती है, 1।*
  • उदर बहुत अधिक फूला हुआ ; वायु का निष्कासन नहीं, केवल डकारें, 1।* [770.]
  • उदर बहुत बड़ा हो गया; भोजन के बाद वह सामान्यतः और बढ़ जाता था, जिससे वह लगातार बहुत तना हुआ प्रतीत होता था, 1।*
  • उदर फूला और तना हुआ (पाँचवीं रात), 19।*
  • वायु से इतना फूलना कि वह लगभग फट ही जाता (अड़तीसवाँ दिन), 26।
  • *उदर कठोर, तना हुआ (छठा दिन), 19।
  • उदर ऊपर आमाशय तक फूला हुआ है (चौबीस दिनों के बाद), 1।*
  • उदर मोटा और भारी, मानो कोई भार हो, 1।*
  • उदर गरम और तना हुआ, उसमें गड़गड़ाहट और गुड़गुड़ाहट के साथ तथा निरंतर अतिसार, 7।*
  • उदरशूल, उदर फूलने के साथ; वायु निकलने के बाद दर्द धीरे-धीरे समाप्त हो गया (बीसवाँ दिन), 12।
  • आध्मान, फूले हुए उदर के साथ, 21।*
  • आध्मान, जिससे कमर के निचले भाग में चुभनें होती हैं, 19a। [780.]
  • वायु रुकना, जिससे रात में छाती में संकुचन होता है (बारह दिनों के बाद), 1।
  • बार-बार वायु निकलना, 4 ; (अठारहवाँ दिन), 14।
  • *अत्यंत दुर्गंधयुक्त वायु (दूसरा दिन), 1।
  • उदर में सुनाई देने वाली हलचलें, 1।
  • दर्द समाप्त होने के बाद उदर में सुनाई देने वाली गड़गड़ाहट, दोपहर बाद (पाँचवाँ दिन), 8।
  • उदर में गड़गड़ाहट, 19a, 20b ; (चौथा और छठा दिन), 19।
  • आँतों में हलचल, 20a।
  • उदर में गड़गड़ाहट और गुड़गुड़ाहट, विशेषकर वंक्षण-हर्निया के आसपास (बारह घंटे बाद), 1।
  • उदर में प्रचंड गड़गड़ाहट, 1।
  • आँतों में हलचल (चौथा दिन), 19। [790.]
  • भोजन के बाद आँतों में प्रचंड हलचल, उदरशूल के साथ, जिसके थोड़ी देर बाद वायु सहित चार पानी-जैसे मलत्याग हुए और दर्द में आराम मिला (आठवाँ दिन), 18a।
  • कुछ उदरशूल (पहला दिन), 18a।
  • उदरशूल (आठवाँ दिन), 18।
  • मलत्याग के बाद उदरशूल (उनतीसवाँ दिन), 24।
  • वायु निकलने से पहले उदरशूल, 1।
  • उदरशूल, शरीर को फैलाने की अत्यधिक इच्छा के साथ, 1।
  • उदरशूल, मानो वायु रुक गई हो, मलाशय की ओर दबाव के साथ, मानो वायु निकलने वाली हो, 1।
  • उदरशूल, जिसमें उदर की गड़गड़ाहट और कसने वाला दर्द तथा उदर फूलना होता है, जिसके बाद वायु निकलने से दर्द और गड़गड़ाहट में आराम मिलता है (छठा दिन), 19।
  • दोपहर और शाम को थोड़ा-सा खाने के बाद तीव्र उदरशूल, बहुत-सी डकारें आने के बाद आराम, 1।
  • प्रचंड उदरशूल (बारहवाँ दिन), 12। [800.]
  • थोड़ी-सी गरम बीयर पीने के बाद भी प्रचंड उदरशूल, जो उदर में गड़गड़ाहट और गैस की डकारें आने के बाद समाप्त हो जाता है (दो दिनों के बाद), 1।
  • प्रचंड उदरशूल, इस अनुभूति के साथ मानो वह अकड़ गई हो; हाथ पीले और नाखून नीले हो गए, मानो मृत हों (पाँच दिनों के बाद), 1।
  • लगभग हर दोपहर बाद प्रचंड, क्षणिक, मरोड़युक्त उदरशूल, 1।
  • प्रत्येक बार वायु निकलने से पहले मरोड़युक्त उदरशूल, 1।
  • मलत्याग के बाद उदरशूल में कुछ आराम हुआ; वह पूरी तरह निढाल हो गया और हल्की ऊँघ में पड़ गया, जिससे वह फिर अत्यंत प्रचंड उदरशूल के साथ जागा, 7।
  • खुली हवा में चलते समय उदर में मरोड़ (बीसवाँ दिन), 1।
  • मरोड़, आध्मान के साथ (पहला दिन), 26।
  • उदर में मरोड़, 13 ; (दूसरा दिन), 16।
  • उदर में मरोड़युक्त-काटते दर्द, जो पूरे उदर में फैलते हैं, 13।
  • खाने के दो घंटे बाद मरोड़युक्त उदरशूल, जो समय-समय पर लौटता है, 1। [810.]
  • उदर में भरेपन की अनुभूति, नाभि-प्रदेश में अधिक खराब, ऐसा अनुभव मानो आँतें इधर-उधर उछाली जा रही हों, कभी-कभी दुर्गंधयुक्त वायु निकलने तथा उदर के कुछ फूलने के साथ (पंद्रहवाँ दिन), 20।
  • खाने के बाद सब कुछ अत्यधिक भरा हुआ प्रतीत होता है, ऐसा अनुभव मानो कपड़े उसे दबा रहे हों, उदर के भीतर खिंचने के साथ, 1।
  • उदर में कुछ दर्द (पहला दिन), 12।
  • उदर में दर्द, 12, 13, 22, 26।
  • उदर के ऊपरी भाग में दर्द (पहला और चौथा दिन), 17।
  • उदर के दर्द में गरम कपड़े लगाने से कुछ आराम, 3।
  • उदर में दर्द, मानो आँतें झकझोर दी गई हों, गुड़गुड़ाहट की आवाजों और पानी-जैसे मलत्याग के साथ, बिना मलोत्सर्ग-प्रणोद के (दूसरा दिन), 20।
  • खाने के बाद उदर में दर्द, मानो आँतों में मरोड़ हो रही हो, 3।
  • वायु निकलने से उदर के दर्द में आराम हुआ (पाँचवाँ दिन), 12।
  • उदर में निरंतर दर्द, कब्ज के साथ भी, 1। [820.]
  • उदर में प्रचंड दर्द; बच्चा अपने पेट के कारण दिन-रात रोता है, 7।
  • उदर में दबावकारी दर्द, 1।
  • खाने के बाद उदर में दबाव, 3।
  • सुबह पूरे उदर में दबाव, गड़गड़ाहट और वायु निकलने के साथ, पर आराम के बिना, 3।
  • उदर में काटता दर्द (दसवाँ दिन), 16।
  • दौरों में काटता उदरशूल, रात में भी (तेरह दिनों के बाद), 1।
  • भोजन के बाद ऊपरी उदर में काटने की अनुभूति (छह घंटे बाद), 1।
  • उदर में काटने की अनुभूति, जो Hepar sulph. को सूँघने के आधे घंटे बाद समाप्त हो गई; इसके बाद आमाशय के लक्षण और अंगों का चीरता दर्द भी समाप्त हो गया, 8।
  • उदर में चीरता दर्द (दस दिनों के बाद), 1।
  • आँतों में गुड़गुड़ाहट, 20a। [830.]
  • उदर में मरोड़ता दर्द, 1।
  • आँतों में जलन, 1।
  • ऊपरी उदर में चुभनयुक्त जलन, सुबह उठने के बाद, एक घंटे तक रहने वाली, मलत्याग से अपूर्ण आराम, मलाशय में दबाव के साथ, 1।
  • अधोजठर और श्रोणिफलक क्षेत्र।
  • अधोदर में दबाव की अनुभूति, दोपहर और शाम को, मानो कुछ नीचे गिर रहा हो, आंशिक रूप से मलाशय की ओर और आंशिक रूप से जननांगों की ओर, 1।
  • अधोदर में मरोड़युक्त दर्द, मानो कोई चीज उसे रास न आई हो, 38।
  • निचली आँतों में शूलयुक्त दर्द, जोर लगाने के साथ और मलत्याग के दौरान दर्द बढ़ना, 33।
  • अधोदर में संकुचनों जैसे प्रचंड दर्द, जिसके बाद रात में पूरे शरीर पर अत्यधिक पसीना, 1।
  • अधोदर में प्रचंड काटने की अनुभूति, अवरुद्ध वायु के साथ; प्रत्येक कदम पीड़ापूर्वक महसूस होता है (हल्का भार उठाने के बाद), 1।*
  • अधोदर में काटने की अनुभूति, बिना अतिसार के, 1।
  • वंक्षणीय ग्रंथियाँ सूजी और प्रदाहित, मटर के दाने जितनी बड़ी, छूने पर दर्दनाक, 1।* [840.]
  • दाएँ और बाएँ श्रोणिफलक क्षेत्रों में चुभता दर्द (चौथा दिन), 19।
  • दोनों वंक्षणों में क्षणिक प्रचंड चीरता दर्द, शाम को (पाँचवाँ दिन), 8।
  • वंक्षण-हर्निया में दर्द (दो दिनों के बाद), 1।
  • एक हर्निया में (जो उसे लंबे समय से था) प्रचंड चुभते और संकुचनकारी दर्द, 21।
  • हर्निया के स्थान पर दर्द, मानो कोई चीज फाड़कर बाहर निकाल दी जाएगी, 1।
  • हर्निया के स्थान पर दुखन, उदर फूलने के साथ, 1।*
  • दाएँ वंक्षण में दर्द, 1।
  • दाईं वंक्षण-नलिका के आर-पार चीरता और खिंचता दर्द, 3।
  • बाएँ वंक्षण में सूजन की अनुभूति, अथवा मानो कोई हर्निया दबाव डालते हुए बाहर निकल रहा हो, 1।

मलाशय और गुदा

  • पंख-कलम जितनी बड़ी एक शिरा गुदा से बाहर निकलती है, साथ में खुजली और दबाव होता है (चार दिन बाद), 1। [850.]
  • मलत्याग के दौरान बवासीर के मस्से अत्यधिक बाहर निकल आते हैं, कठिनाई से भीतर लौटते हैं और मलाशय से रक्तमिश्रित श्लेष्मा निकलता है, 1।*
  • *गुदा में नमी, 1।
  • बवासीर के मस्सों में चुभते दर्द, 1।
  • मल के साथ बाहर निकले बवासीर के मस्से गुदा में कसकर फँस गए (इक्कीस दिन बाद), 1।
  • यद्यपि बवासीर के मस्से बहुत कम बाहर निकलते हैं, फिर भी वे पीड़ापूर्वक संवेदनशील हैं (चौबीस घंटे बाद), 1।*
  • *मल बहुत देर तक मलाशय में पड़ा रहता है, मानो उसे बाहर निकालने की शक्ति ही न हो, 1।
  • मलाशय में झटकेदार, लगभग मंद चुभता दर्द, 1।*
  • *मलाशय में काटता दर्द, 1।
  • *मलाशय में डंक-सा दर्द, 1।
  • कई दिनों तक मलत्याग के दौरान मलाशय में जलन, 1।* [860.]
  • चलते समय मलाशय में तीव्र चुभते दर्द, जो जननांगों की ओर फैलते हैं (तीस दिन बाद), 1।
  • मलाशय में एक मोटी-सी चुभन, 1।
  • मलत्याग के दौरान मलाशय में पीड़ादायक, डंक-सी खुजली, 1।*
  • शाम को मलाशय में खुजली, 1।
  • *गुदा में तनावट, 1।
  • नरम मलत्याग के बाद गुदा में दबाव, 1।
  • बेधता, ऐंठन-जैसा दर्द, जो गुदा से मलाशय और अंडकोषों तक फैलता है, 1।*
  • गुदा में संकुचनकारी दर्द, जो आगे की ओर (मूलाधार में) फैलता है, 1।
  • *मलत्याग के दौरान गुदा में दर्द, मानो वह कस गई हो, 1।
  • गुदा में चुभन (तीसरा दिन), 8।* [870.]
  • *सूखा, कठोर मल निकलने के बाद गुदा में जलन (चौथा दिन), 8।
  • *गुदा में जलन (पाँचवाँ दिन), 1।
  • गुदा और बवासीर के मस्सों में खुजली, 1।
  • मूलाधार में बार-बार जलता दर्द, विशेषतः संभोग के बाद, 1।
  • अपराह्न 3 से 6 बजे तक मलत्याग की बार-बार इच्छा (पहला दिन), 12।
  • *मलत्याग की बार-बार इच्छा, किंतु केवल श्लेष्मा निकलता है, साथ में शरीर में ठिठुरन और गले में उबकाई-सी मिचली, 1।
  • *मलत्याग की निरंतर किंतु निष्फल इच्छा, शाम को (पहला दिन), 8।
  • भोजन करने के दो घंटे बाद मलत्याग की इच्छा; मल प्रचुर था (दसवाँ दिन), 16।
  • मलत्याग का वेग; मल प्रचुर और कुछ नरम था (दूसरा दिन), 16।

मल

  • अतिसार।
  • उदरशूल के बिना अतिसार, दिन-रात, कई दिनों तक (सात दिन बाद), 1। [880.]
  • अत्यधिक थकाने वाला अतिसार , रात में (बीसवाँ दिन), 1।*
  • रात में जागने पर मलत्याग के लिए जाना पड़ा (पाँच दिन बाद), 1।
  • पानी जैसा मल (पहला दिन), 18a।
  • पेट में वायु के साथ छह बार पानी जैसा मल (दूसरा दिन), 18a।
  • मलत्याग की मरोड़युक्त निष्फल इच्छा के साथ दो बार पानी जैसा मल (पंद्रहवाँ दिन), 12।
  • मल सामान्य से अधिक पतला (पहला दिन), 18a।
  • मल लगभग पतला, लसदार और झागदार; उसके बाद गुदा में जलन और काटने-सी पीड़ा (सातवाँ दिन), 1।
  • बहुत वेग के साथ प्रचुर पतला मल, किंतु दर्द के बिना; इसके बाद नींद बेहतर थी (पचासवाँ दिन), 23।
  • प्रचुर मल और मूत्र, 3।
  • दो बार नरम मल (तीसरा दिन), 14। [890.]
  • दो दिनों तक बहुत बार नरम मल, अतिसार के बिना (तेरह दिन बाद), 1।
  • *कई बार नरम मल, जिनसे पहले उदर में हलचल हुई (डेढ़ घंटे बाद), 8।
  • लेई-जैसा मल (आठवाँ दिन), 19।*
  • दो बार लेई-जैसा मल (चौदहवाँ दिन), 12।
  • लेई-जैसा मल, जिसमें लसदार झिल्ली-जैसे अंश थे; उसके बाद गुदा में काटने-सी जलन (छठा दिन), 1।
  • अपराह्न 4 और 6 बजे लेई-जैसा मल, 19a।
  • *अत्यंत भयंकर दुर्गंधयुक्त मल, 10।
  • मल का रंग सामान्य से हल्का, 4।
  • रक्तमिश्रित श्लेष्मा मिला मल; उसके बाद गुदा में काटने-सी पीड़ा, 1।
  • गुदा से रक्त और श्लेष्मा का स्राव, जिसमें तीव्र जलन थी (ग्यारहवाँ और बीसवाँ दिन), 1। [900.]
  • श्लेष्मायुक्त मल , जिसके बाद गुदा में खुजली हुई (उन्नीसवाँ दिन), 1।*
  • मल के साथ लालिमा लिए श्लेष्मा, 1।
  • बार-बार थोड़ी मात्रा में ऐसा तरल स्राव, जो सड़े शव जितना दुर्गंधयुक्त था, 1।*
  • मल के साथ गोलकृमियों का निष्कासन, 1।
  • कब्ज।
  • मल कठोर, फिर पुनः सामान्य (आरंभिक दिन), 1।
  • मल कुछ भाग कठोर और कुछ भाग पतला, साथ में कुछ जोर लगाना पड़ा, 21।
  • *कठोर ढेलों से बना मल, जो केवल बहुत प्रयास से अपराह्न 6 बजे निकला, 8।
  • दस दिन बाद भी मल सदैव कठोर, 8।
  • मल पत्थर जितना कठोर (अड़तीसवाँ दिन), 26।
  • *मल अल्प और कठिनाई से निकलने वाला (चौबीस घंटे बाद), 4; बहुत जोर लगाने और काँखने से पेट की भित्तियाँ दुखने लगती हैं, और पहले ही बाहर निकल चुका मल फिर भीतर खिसक जाता है, 1। [910.]
  • सूखे, कठोर और हल्के रंग के मल, 29।*
  • कठोर मल, 33।*
  • *बहुत कठोर मल, जिसके बाद गुदा में जलन , अपराह्न में (पाँचवाँ दिन), 8।
  • *बहुत कठोर गाँठदार मल, मिट्टी की पथरियों जैसा, जो केवल बहुत प्रयास से निकला (तीसरा दिन), 6।
  • सामान्य मल, जो बहुत दबाव डालने और काँखने से निकला, 1।*
  • कब्ज, 19a ; (पहला दिन), 1।*
  • आरंभिक दिनों में कब्ज, जिसके बाद बहुत कठोर मल, 1।
  • मल का अभाव (पहला दिन), 1।
  • मासिक धर्म से ठीक पहले और उसके दौरान अत्यधिक कब्ज, 1।
  • पहले तीन दिनों तक बार-बार जोर लगाने के बावजूद कब्ज; अगले दिनों में, बहुत प्रयास से अत्यंत कठोर, असंतोषजनक मल, 6।* [920.]
  • दो दिनों तक कब्ज, 4।
  • तीन दिनों तक कब्ज (चौदह दिन बाद); इसके बाद छोटे कठोर दानों से बना मल, 1।*
  • तीन दिनों तक कब्ज (तीन दिन बाद), 8।
  • औषध-परीक्षण के पहले भाग के दौरान आदत के अनुसार कब्ज बना रहा; बाद में मल अधिक सुगमता से निकलने लगा, 27।

मूत्रांग

  • उसे मूत्रांगों में कमजोरी और मूत्रत्याग की निरंतर इच्छा अनुभव होती है, 35।
  • मूत्रत्याग करते समय मूत्राशय पर दबाव, जिसके बाद जलन, 3।
  • मूत्रमार्ग के अगले भाग में निरंतर महीन चुभनें, 1।
  • मूत्रत्याग करते समय काटता दर्द, 39।
  • मूत्रत्याग के दौरान काटता दर्द (सोलहवाँ दिन), 1।
  • मूत्रत्याग करते समय मूत्रमार्ग में जलन, 1। [930.]
  • कई दिनों तक मूत्रत्याग के दौरान जलता दर्द (दस दिन बाद), 18a।
  • मूत्रत्याग करते समय मूत्रमार्ग में चिरचिराती जलन, 1।
  • मूत्रत्याग की निरंतर इच्छा; तीन दिनों तक मूत्र बूँद-बूँद निकलता था और मूत्रमार्ग में तीव्र जलता दर्द होता था (चौदह दिन बाद), 8 । [Camphor के स्पिरिट को सूँघने और यहाँ तक कि उसकी कुछ बूँदों की एक मात्रा लेने से भी कोई प्रभाव नहीं हुआ; न ही Hepar sulph. को सूँघने से प्रभाव हुआ; किंतु Cantharides के 12वें तनूकरण की एक बूँद ने असहनीय दर्दों को धीरे-धीरे दूर कर दिया।]
  • मूत्रत्याग की इच्छा, साथ में प्रचुर मूत्रस्राव, 4।
  • मूत्रत्याग की इच्छा, साथ में अल्प मूत्रस्राव, 4।
  • मूत्रत्याग का वेग, साथ में मूत्रमार्ग में चिरचिराती जलन, 1।
  • मूत्रत्याग की बार-बार इच्छा, 1।
  • रात में उत्तेजित लिंग के साथ मूत्रत्याग की इच्छा, 4।
  • मूत्रत्याग के बार-बार निष्फल प्रयास, 1।
  • मूत्रत्याग के बाद बैठे हुए अनैच्छिक मूत्रत्याग, 1। [940.]
  • रात में मूत्रत्याग के लिए जागा (छठी रात), 27।
  • वह रात में पसीने में जागा, साथ में मूत्रत्याग की इच्छा थी, 1।
  • कई दिनों तक प्रातः लगभग 7 बजे उसे प्रत्येक पंद्रह मिनट में मूत्रत्याग करना पड़ा, 1।
  • लगभग हर रात मूत्रत्याग के लिए उठना पड़ा, 4।
  • बिना दर्द के बार-बार अल्प मात्रा में मूत्रस्राव (पाँचवाँ दिन), 8।
  • सामान्यतः जैसा करता था, उस प्रकार रात में मूत्रत्याग के लिए नहीं उठा (पहला दिन), 9।
  • अपराह्न में मूत्र अल्प, उसके निकलते समय जलन (पाँचवाँ दिन), 8।
  • मूत्र लाल (दसवाँ दिन), 18a।
  • मूत्र गर्म, जलनकारी और हल्का पीला, 3।
  • मूत्र अत्यधिक तलछटयुक्त है, 39। [950.]
  • मूत्र बहुत गँदला, 29।
  • मूत्र शीघ्र ही गँदला हो जाता है, 1।
  • मूत्र में लाल रेतीला अवसाद, 1।
  • मूत्र में प्रचुर लाल रेतीला अवसाद (इक्कीसवाँ दिन), 25।
  • मूत्र में पीली रेत जमती है, 1।
  • मूत्र में पीला किरकिरा अवसाद (आरंभिक दिन), 1।

जननांग

  • जननांगों के आर-पार बार-बार टाँके-जैसी चुभती पीड़ाएँ (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • मूत्रत्याग करते समय जननांगों में कष्टदायक खुजली, 1।
  • दिन में बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार तीव्र शिश्नोत्थान (आरंभिक दिन), 1।
  • रात्रि में तीव्र शिश्नोत्थान, कामेच्छा के बिना, 1। [960.]
  • अंडकोश ढीला रहते हुए तीव्र शिश्नोत्थान (पाँच दिन बाद), 1।
  • वृषणों में खींचने वाली पीड़ा के साथ तीव्र शिश्नोत्थान, 1।
  • शिश्नोत्थान धीरे-धीरे होता है (तेईस दिन बाद), 1।
  • शिश्नोत्थान बिल्कुल नहीं, उसका लेश तक नहीं (कई दिनों बाद), 1।
  • शिश्नमुण्ड के किरीट के आसपास लालिमा, मानो त्वचा उतर गई हो, साथ में बार-बार खुजली, 1।
  • अग्रचर्म में सूजन, जिसकी बाहरी सतह पर खुजलीयुक्त नम फुंसियाँ, 1।
  • शिश्नमुण्ड पर खुजली और लाल धब्बे, 1।
  • शिश्न में दस मिनट तक तीखी, सुई-जैसी चुभती पीड़ाएँ, 29।
  • मलत्याग के बाद अग्रचर्म में जलती हुई पीड़ा, 1।
  • अग्रचर्म के नीचे खुजली, 1। [970.]
  • जलवृषण, 7।
  • अंडकोश पर खुजली और एक नम धब्बा, 1।
  • अंडकोश पर रेंगने की अनुभूति, 1।
  • वृषणों में पीड़ा, जो रात में बढ़ती है, किंतु केवल लेटने पर, 1।
  • दाएँ वृषण में ऐसी पीड़ा, मानो वह कठोर हो गया हो, 1।
  • बाएँ वृषण में फैलाने या दबाने वाली पीड़ा, मानो अत्यधिक सूजन के कारण हो, 1।
  • बाएँ वृषण में झटकेदार पीड़ाएँ, 13।
  • शुक्ररज्जुओं में दबाव, साथ में वृषण ढीले होकर नीचे लटके रहते हैं (आरंभिक दिन), 1।
  • प्रोस्टेट ग्रंथि से आगे की ओर खिंचाव, 3।
  • शिश्नोत्थान के साथ कामेच्छा बढ़ी हुई (इक्कीस दिन बाद), 1। [980.]
  • पहले आठ दिनों में कामेच्छा अत्यधिक उत्तेजित; दिन-रात हर आधे घंटे में शिश्नोत्थान, साथ में वृषण ऊपर की ओर खिंचे हुए, 1।
  • कामुक विचार (पहला और दूसरा दिन), 1।
  • प्रातः बिस्तर में शिश्नोत्थान के साथ कामुक विचार (पहले से चौदहवें दिन तक), 1।
  • कामेच्छा अत्यंत क्षीण, लगभग लुप्त (पहले पाँच सप्ताह), 1।
  • कामेच्छा अत्यंत क्षीण (पहले तीन सप्ताह), 1।
  • कामेच्छा कम और शिश्नोत्थान भी कम बार, 29।
  • पहली रात वीर्यस्राव, और उसके बाद बार-बार, 1।
  • बार-बार और प्रचुर वीर्यस्राव, 1।
  • एक विवाहित पुरुष में पहली रात बोझिल स्वप्नों के साथ वीर्यस्राव, 1।
  • कई बार वीर्यस्राव, 29। [990.]
  • रात्रिकालीन वीर्यस्राव, साथ में पीठ पर पसीना और लगभग 2 A.M. पर जागना, 1।
  • प्रत्येक मलत्याग के साथ प्रोस्टेट-द्रव का स्राव, 1।
  • मलत्याग के समय जोर लगाने पर प्रोस्टेट-द्रव का स्राव, 1।
  • स्त्री।
  • जघन-उभार पर दर्दयुक्त फुंसियाँ निकलना, 1।
  • गर्भवती स्त्री का गर्भस्थ शिशु बहुत अधिक हिलता-डुलता है, 1।
  • गर्भाशय से बहुत अधिक श्वेत जलीय द्रव का स्राव, साथ में बाह्य जननांगों में तीव्र खुजली, 1।
  • मूत्रत्याग के बाद प्रचुर जलीय श्वेतप्रदर, जिसके पहले उदर में पीड़ा होती है (नौवाँ दिन), 8।
  • प्रचुर श्वेतप्रदर, 30।
  • प्रचुर श्वेतप्रदर-स्राव, 33।
  • श्वेतप्रदर से काटने-जैसी पीड़ा होती है, विशेषकर अम्लीय भोजन के बाद, 1। [1000.]
  • योनि से पर्याप्त मात्रा में श्वेत जलीय द्रव का स्राव, जो साधारण श्वेतप्रदर से सर्वथा भिन्न है, 41।
  • संध्या में श्वेतप्रदर (छठा दिन), 8।
  • अमावस्या के समय कई दिनों तक थोड़ा रक्तस्राव, जो मासिक धर्म के नियत समय से ग्यारह दिन पहले हुआ, 1।
  • मासिक धर्म के लगभग तुरंत बाद योनि से रक्तमिश्रित श्लेष्मा का स्राव, 1।
  • योनि में नीचे की ओर दबाव डालने वाली पीड़ाएँ, 1।
  • बाह्य जननांगों में खुजली, 3।
  • मासिक धर्म के दौरान बाह्य जननांगों में तीव्र जलन और दुखन, साथ में जाँघों की भीतरी सतहों पर दाने (तेईस दिन बाद), 1।
  • तीन महीनों से अनुपस्थित मासिक धर्म का फिर से आना, 1।
  • मासिक स्राव बढ़ा हुआ (तेरहवें और बीसवें दिन के बाद), 1।
  • मासिक धर्म आरंभ होते समय पूरे शरीर में बार-बार बर्फ-जैसी ठंडक के दौरों के साथ मासिक स्राव बढ़ा हुआ, 1। [1010.]
  • मासिक धर्म तीन दिन पहले (पाँच दिन बाद), 1।
  • मासिक धर्म दो दिन पहले (सात दिन बाद), 1।
  • मासिक धर्म पाँच दिन विलंब से, 1।
  • मासिक धर्म केवल पाँच दिन चला, अत्यंत अल्प था और पीड़ारहित था (सामान्यतः वह दस से चौदह दिन तक रहता है), 8।
  • मासिक धर्म तीन या चार दिन विलंब से (अठारह दिन बाद), 1।
  • मासिक धर्म अन्य लक्षणों के बिना पाँच दिन विलंब से, 8।
  • मासिक रक्त में अत्यंत तीव्र गंध, 1।
  • मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव कम, 1।
  • मासिक धर्म के दौरान ली गई Silicea उसे चार दिनों के लिए रोकती हुई प्रतीत होती है; इसके बाद चार या पाँच दिनों तक स्राव होता है और फिर छह सप्ताह तक मासिक धर्म नहीं आता, 1।
  • मासिक धर्म का स्राव रुक गया, 8।

श्वसन अंग। [1020.]

  • साँस लेते समय स्वरयंत्र में छिल जाने जैसी दुखन की अनुभूति, 1।
  • भारी वजन उठाते समय स्वरयंत्र के क्षेत्र में दर्द, 1।
  • स्वरयंत्र में गुदगुदी के साथ हल्की खाँसी और स्वरभंग, 29।
  • स्वर।
  • स्वरभंग (पहला दिन), 2 ; (छठा दिन), 14 ; (टिंचर लेने के लगभग छह घंटे बाद), 15c।
  • बोलते समय स्वरभंग, 15b।
  • लगातार स्वरभंग, साथ में ऐसी पीड़ादायक अनुभूति मानो गला भीतर से सूजा हुआ हो, 13c।
  • स्वरभंग, विशेषकर सुबह, इतना कि वह ऊँची आवाज में मुश्किल से बोल पाती थी (छह दिनों के बाद), 15a।
  • स्वरभंग के साथ बार-बार सूखी, छोटी और कड़ी खाँसी (तीन दिनों के बाद), 1।
  • खाँसी और कफ-निष्कासन।
  • रात में खाँसी (पंद्रह दिनों के बाद), 1।
  • सुबह और बिस्तर पर जाने के बाद खाँसी, 1। [1030.]
  • पाँच सप्ताह तक खाँसी, 1।
  • स्वरभंग के साथ खाँसी (उन्नीसवाँ दिन), 1।
  • भर्राई हुई खाँसी (छह दिनों के बाद), 15a।
  • बार-बार खाँसने की उत्तेजना (बीसवाँ दिन), 25।
  • ऐंठनयुक्त खाँसी (बारह दिनों के बाद), 1।
  • आरंभ में गले की गुदगुदी से उत्पन्न खाँसी, जो धीरे-धीरे गले के और निचले भाग से आती हुई प्रतीत होने लगी, यहाँ तक कि इकतीसवें दिन वह छाती से आने लगी और पेट को झकझोरती थी; दिन में अचानक विस्फोटक खाँसी के झटके आते थे, जिनमें कफ नहीं निकलता था; शाम को खाँसी बढ़ जाती थी (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • ग्यारह दिनों तक शाम को लेटने के बाद और सुबह जागने के बाद विशेष रूप से कष्टदायक खाँसी, 1।
  • स्वरयंत्र में गुदगुदी के साथ हल्की खाँसी और स्वरभंग, 29।
  • आँसू आने के साथ बहुत प्रचंड खाँसी (बारहवाँ और तेरहवाँ दिन); खाँसी अगले दिनों में भी जारी रही और दो दिनों के बाद बहुत प्रचंड हो गई, विशेषकर हँसने के बाद; खाँसने पर अंसफलक के कोण के नीचे और उरोस्थि के मध्य में चुभने वाला दर्द होता था; खाँसी सुबह अधिक खराब थी, साथ में छाती में सूई-चुभन जैसे दर्द थे, जो पार्श्वों की अपेक्षा उरोस्थि के मध्य में अधिक थे; साँस भीतर खींचने पर उरोस्थि के मध्य में सूई-चुभन जैसा दर्द होता था; सुबह की खाँसी के साथ गाढ़ा पीला कफ निकलता था; दिन में कफ-निष्कासन नगण्य था; सुबह की खाँसी बिस्तर से उठने पर होती थी; शाम को बिस्तर पर जाते समय 9 P.M. पर होती थी और बिना कफ-निष्कासन तथा बिना दर्द के आधे से पौन घंटे तक रहती थी; नाक बहुत अधिक बंद थी; नाक से साँस नहीं ले सकता था; यह इन्फ्लुएंजा कई दिनों तक बना रहा और दो दिनों के बाद इसके साथ सुनने में कठिनाई, कभी-कभी कानों में घंटी बजना, नाक से प्रचुर सफेद लसदार स्राव, खाँसी में कमी तथा गाढ़ा पीला कफ जुड़ गए; खाँसी और कफ-निष्कासन उठने के बाद अधिक खराब थे तथा शाम और दिन में कभी-कभार ही होते थे (इस आक्रमण के कारण औषध-परीक्षण स्थगित कर दिया गया), 19।
  • शाम की ओर बार-बार खाँसी, बिना कफ-निष्कासन के (बत्तीसवाँ दिन), 25। [1040.]
  • रात में 4 A.M. तक कष्टदायक खाँसी (पाँच दिनों के बाद), 1।
  • सुबह प्रचंड खाँसी, बिना कफ-निष्कासन के (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • गले की गुदगुदी से उत्पन्न खाँसी (छब्बीसवाँ दिन), जो दिन-प्रतिदिन बढ़ती गई; अट्ठाईसवें दिन हरे रंग का गाँठदार कफ निकला और उसके बाद सुबह खाँसने पर हमेशा वैसा ही कफ निकलता था; किंतु पूरे दिन बार-बार बिना कफ-निष्कासन के खाँसी होती थी, 25।
  • सुबह से शाम तक खाँसी, साथ में गुदगुदी और श्लेष्मा का कफ-निष्कासन; खाँसी के बिना भी श्लेष्मा निकलता था (बाईसवाँ दिन), 24।
  • दो शामों तक बुखार के साथ सारी रात चलने वाली खाँसी, जो पेट को गरम करने के बाद गायब हो जाती थी, 1।
  • खाँसी के साथ पेट में झकझोरने की अनुभूति (उनतीसवाँ दिन), 25।
  • गले में खुरचन के साथ खाँसी, जिसके बाद छिलापन रह जाता था (इक्कीसवाँ दिन), 24।
  • शाम को बिस्तर में श्लेष्मा की घरघराहट के साथ थका देने वाली खाँसी, 1।
  • कफ निकालते समय वमन के साथ खाँसी, 1।
  • बोलने से हमेशा खाँसी होती है, 1। [1050.]
  • गले में गुदगुदी और क्षोभ से उत्पन्न खाँसी, 1।
  • केवल रात में लेटने पर और सुबह खाँसी, 1।
  • ऐसी खाँसी जिससे श्लेष्मा का वमन होता है, 1।
  • रात में ग्रसनी की गुदगुदी से उत्पन्न छोटी, कड़ी खाँसी, 1।
  • गले की उत्तेजनशीलता से उत्पन्न छोटी, कड़ी खाँसी (बाईसवाँ दिन), 25।
  • थका देने वाली खाँसी, बिना कफ-निष्कासन के (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • बार-बार सूखी खाँसी (छब्बीसवाँ दिन), 25।
  • बार-बार सूखी, छोटी और कड़ी खाँसी (तीन दिनों के बाद), 1।
  • सूखी खाँसी, जो उसे रात में बार-बार जगा देती है और दिन में भी कई बार लौटती है (चार दिनों के बाद), 8।
  • सुबह जागने के बाद उरोस्थि के ऊपरी भाग में पीड़ा के साथ सूखी खाँसी (छठा दिन), 8। [1060.]
  • ठंडे पेय से उत्पन्न सूखी खाँसी, 1।
  • बार-बार सूखी खाँसी, केवल छोटे-छोटे दौरों में, 1।
  • प्रत्येक पंद्रह मिनट के अंतराल पर सूखी, ऐंठनयुक्त खाँसी, साथ में छाती और गले में अत्यधिक छिलापन, 1।
  • बहुत अधिक सूखी, छोटी और कड़ी खाँसी, जिससे छाती में दुखन होती है, 1।
  • बिना दर्द के सूखी खाँसी (पाँचवीं रात), 19।
  • छोटी, सूखी, कड़ी खाँसी, 30।
  • सूखी और कड़ी खाँसी, 32।
  • भर्राई हुई, सूखी खाँसी, 36।
  • वमन होने तक सूखी खाँसी, साथ में रात को व्याकुलतापूर्ण पसीना; बिस्तर से उठना पड़ता था, 1।
  • बहुत-से पारदर्शी श्लेष्मा के कफ-निष्कासन के साथ प्रचंड, लगातार खाँसी, 1। [1070.]
  • बिस्तर में लेटने पर कफ-निष्कासन के साथ प्रचंड खाँसी; निकलने वाला कफ गाढ़ा, पीला और गाँठदार था (सातवाँ दिन), 18a।
  • विशेषकर खाने के बाद खाँसी, साथ में सफेद श्लेष्मा का कफ-निष्कासन, 1।
  • सोलह दिनों तक खाँसी और कफ-निष्कासन, साथ में छाती में पीड़ादायक खुरचन, काम करने की अनिच्छा, चिड़चिड़ापन और पूरे शरीर में थकावट, 1।
  • कई महीनों तक लगातार खाँसी; सुबह और पूर्वाह्न में बहुत-सा गाढ़ा पूययुक्त श्लेष्मा निकलता था; पीले श्लेष्मा के बड़े-बड़े पिंड श्वासनली और छाती में ऐसी पीड़ा के साथ निकलते थे मानो वहाँ दुखन हो, 11।
  • गले के गड्ढे में खुरचन के साथ खाँसी और कफ-निष्कासन (नौवाँ दिन), 18a।
  • विशेषकर 8 और 9 A.M. के बीच खाँसी, साथ में श्लेष्मा का कफ-निष्कासन और गले में खुरचन (अठारहवाँ दिन), 24।
  • सुबह आसानी से कफ निकलने के साथ छोटी, कड़ी खाँसी (आठवाँ दिन), 18a।
  • 7 से 10 A.M. तक पीताभ-हरे कफ के निष्कासन के साथ खाँसी (चौबीसवाँ दिन), 24।
  • सुबह और दिन में बहुत अधिक कफ-निष्कासन, जो कभी नमकीन, कभी दुर्गंधयुक्त और भूरा होता था, 1।
  • दोपहर की ओर गहरी, खोखली खाँसी के साथ चमकीले रक्त का कफ-निष्कासन; इसके तुरंत बाद बेहोशी-सी आने के दौरे (चौथा दिन), 1। [1080.]
  • रक्तमिश्रित श्लेष्मा का कफ-निष्कासन, 1।
  • सुबह प्रचंड खाँसी के साथ रक्तयुक्त कफ-निष्कासन (सात दिनों के बाद), 1।
  • खाने के तुरंत बाद श्वासनली से श्लेष्मा का कफ-निष्कासन, 3।
  • सुबह खाँसी के बिना बहुत अधिक श्लेष्मा निकलना, 4।
  • खाँसते समय पूययुक्त कफ-निष्कासन, 7।
  • खाँसी से उत्पन्न वमन द्वारा पूययुक्त पदार्थ के बड़े-बड़े पिंडों का निष्कासन, 7।
  • श्वासनली से गाढ़े, पूययुक्त श्लेष्मा का कफ-निष्कासन, 3।
  • खँखारकर निकाले गए दुर्गंधयुक्त श्लेष्मा के हरे-पीले गोल पिंड, 1।
  • कफ से पानी मटमैला हो जाता है; जो पदार्थ नीचे बैठ जाता है, उसमें दुर्गंध होती है, 1।
  • श्वसन।
  • बार-बार गहरी, आह भरने जैसी श्वास, 1। [1090.]
  • सुबह जागने पर श्वासकष्ट (सत्रह दिनों के बाद), 1।

वक्षस्थल

  • वक्ष की ओर रक्त का तीव्र प्रवाह (दस दिनों के बाद), 1।
  • वक्ष में घुटन (चौथा दिन), 19।
  • वक्ष में घुटन; वह लंबी साँस नहीं ले सकती, 32।
  • वक्ष में ऐसी घुटन मानो गला संकुचित हो गया हो, विशेषकर भोजन के बाद, 1।
  • चलने पर वक्ष में इतनी अधिक घुटन कि उसे हर चार या पाँच कदम पर रुकना पड़ता था, बिना दर्द के; वक्ष की इस घुटन के कारण उसे बार-बार गहरी साँस लेनी पड़ती थी, जो वह केवल अत्यधिक प्रयास से ही ले पाता था, 11।
  • वक्ष में अत्यधिक घुटन, किंतु बिना दर्द के, गहरी साँस लेने में असमर्थता, 1।
  • मलत्याग के बाद वक्ष में तीव्र घुटन, 1।
  • वक्ष में तनाव (पाँचवाँ दिन), 19।
  • छोटी पसलियों में तनाव (पाँचवाँ दिन), 19। [1100.]
  • पूरे वक्ष में तनावकारी दर्द, जो कई घंटों तक रहता है, 29।
  • वक्ष में कसाव (तीसरे दिन के बाद), 1।
  • वक्ष में कसाव, जो पीठ के दर्द के साथ बारी-बारी से होता है (ठंड लग जाने के बाद?), (उन्नीसवें दिन के बाद), 1।
  • वक्ष के चारों ओर कसाव की अनुभूति, मानो उसे फीते से कसकर बाँध दिया गया हो, 33।
  • वक्ष में संकुचन (अड़तीसवाँ दिन), 15।
  • संध्या की ओर वक्ष पर दबाव, 13।
  • सुबह बिस्तर में कई बार वक्ष पर दबाव, 1।
  • जब भी वह खाँसना चाहती है, वक्ष पर अत्यधिक दबाव; दर्द के कारण वह खाँस नहीं पाती, 1।
  • वक्ष की कमजोरी; बोलते समय शब्दों का स्पष्ट उच्चारण करने के लिए उसे पूरे वक्ष का उपयोग करना पड़ता है, 4।
  • रात में वक्ष में दर्द (पाँचवाँ दिन), 15। [1110.]
  • वक्ष में विभिन्न स्थानों पर दर्द (इक्कीसवाँ दिन), 14।
  • खाँसने पर वक्ष में ऐसा दर्द मानो चोट से कुचल गया हो, 1।*
  • छींकते समय वक्ष में ऐसा दर्द मानो वह फट जाएगा, 1।
  • साँस लेने पर भी वक्ष में ऐसा दर्द मानो उसे पीटा गया हो, 1।
  • लंबे समय तक बैठे रहने के बाद उठने पर वक्ष में तीव्र दर्द और निचले अंगों में पक्षाघात-जैसी अनुभूति (अड़तालीस घंटों के बाद), 1।
  • साँस लेते समय वक्ष में खुरचन-सी अनुभूति, 1।
  • वक्ष में जलनयुक्त दर्द, 1।
  • वक्ष में चुभते दर्द (पहला दिन), 17।*
  • श्वास भीतर लेते समय वक्ष में चुभता दर्द (सैंतीसवाँ दिन), 26।*
  • वक्ष में सुई-चुभनें, पहले बाईं ओर, फिर दाईं ओर, केवल गहरी साँस भीतर लेने पर (चौथा दिन), 19। [1120.]
  • वक्ष में दर्दयुक्त सुई-चुभनें, जो उरोस्थि से चारों ओर घूमती हुई पीठ तक कौंधती हैं, 40।
  • वक्ष में सुई-चुभनें, विशेषकर गहरी साँस लेने पर, 3।
  • अग्रभाग और पार्श्व।
  • उरोस्थि में दबावकारी दर्द, अधिजठर-गर्त की ओर, 3।
  • उरोस्थि के निचले भाग में घुटन, 36।
  • उरोस्थि के निचले भाग पर ऐसा दबाव मानो वहाँ पत्थर रखा हो, 33।
  • उरोस्थि में चुभन, विशेषकर श्वास भीतर लेते समय, भोजन के बाद (पाँचवाँ दिन), 8।
  • चलने पर पीठ से वक्ष के अग्रभाग में आने वाला तीव्र संकुचनकारी दर्द; वक्ष में घुटन थी, साँस छोटी थी और वह जितना अधिक हिलता, दर्द उतना ही बढ़ता था; शांत खड़े रहने और किसी वस्तु का सहारा लेने पर यह पूरी तरह गायब हो गया तथा दोबारा चलने पर वापस नहीं आया (पाँचवाँ दिन), 1।
  • वक्ष के दोनों पार्श्वों पर तीव्र दबाव, जो एक घंटे तक रहा, 1।
  • वक्ष के दाएँ पार्श्व में दबाव और खिंचाव, जो बगल की ओर फैलता है, 1।
  • दाहिनी बाँह के नीचे ऐसा दर्द मानो कपड़ों का दबाव हो, यद्यपि कोई असामान्य बात दिखाई नहीं देती थी, 1। [1130.]
  • वक्ष में गर्मी, साथ ही पूरे शरीर में ठंडापन और ठिठुरन (दूसरा दिन), 1।
  • दाएँ पार्श्व में चुभन (बारह घंटों के बाद), 1।*
  • श्वसन करते समय दाईं पसलियों के नीचे सुई-चुभनें, 1।
  • वक्ष के दाएँ पार्श्व के आर-पार तीव्र सुई-चुभनें (नौ दिनों के बाद), 1।
  • दाएँ वक्ष के भीतर क्षणिक सुई-चुभनें (छियालीसवाँ दिन), 23।
  • वक्ष के बाएँ पार्श्व में कूट-पसलियों पर दबावकारी दर्द (दस दिनों के बाद), 1।
  • सुबह उठने पर वक्ष के बाएँ पार्श्व में दबाव, 3।
  • बाएँ वक्ष पर तीखा दबाव, 1।
  • वक्ष के बाएँ पार्श्व में दबाव और चुभन, 3।
  • दबावकारी तनाव, विशेषकर वक्ष के बाएँ पार्श्व में, 3। [1140.]
  • बाईं पसलियों के नीचे ऐसा दर्द मानो कोई वस्तु नोचकर अलग कर दी जाएगी, 1।
  • दिन में बार-बार बाईं अंतरापर्शुकीय पेशियों में चुटकी काटने जैसी झटकेदार अनुभूति, जिस पर श्वसन या स्पर्श का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, 1।
  • वक्ष के बाएँ पार्श्व में फाड़ता दर्द, 1।
  • बाईं पसलियों के नीचे निरंतर चुभता दर्द, गहरी साँस लेने पर बढ़ता है; यहाँ तक कि पसलियाँ भी छूने पर दर्द करती हैं, 1।
  • बाएँ वक्ष में चुभता दर्द (पहला दिन), 17।
  • वक्ष के बाएँ पार्श्व में तीखी सुई-चुभनें (उन्नीसवाँ दिन), 12।
  • वक्ष के बाएँ पार्श्व में तीखी सुई-चुभनें; वहाँ से वे कोहनी और फिर कलाई तक फैलती हैं (उन्नीसवाँ दिन), 12।
  • बाएँ वक्ष में सुई-चुभनें, 3।
  • रात में प्रत्येक श्वास भीतर लेने पर वक्ष के बाएँ पार्श्व में सुई-चुभनें, जो सबसे निचली पसलियों तक नीचे फैलती हैं, 1।
  • स्तन।
  • बाएँ स्तन का कठोरीकरण, 7a। [1150.]
  • *दायाँ स्तन कठोर और दर्दयुक्त है तथा स्तनाग्र पर सूजन है--ऐसा लगता है मानो वह "पक रहा हो," 32।
  • *बाएँ स्तनाग्र में कौंधता और जलता दर्द, 32।
  • बाएँ स्तन में चुभता दर्द (अड़तीसवाँ दिन), 24।
  • बाएँ स्तन के पीछे दर्दयुक्त सुई-चुभनें, साथ ही संध्या से पूरी रात और अगले दिन भी ठिठुरन (तीसरे दिन के बाद), 8।
  • भोजन करते समय बाएँ स्तन के पीछे और नीचे तीखी सुई-चुभनें (पहला दिन), 8।
  • दोपहर 2 बजे श्वास छोड़ते समय बाएँ स्तन के नीचे एक दर्दयुक्त सुई-चुभन (आठवाँ दिन), 8।

हृदय

  • आठ दिनों तक हृदय में क्षणिक रक्तावेग, 1।
  • हृदय-प्रदेश में भारी दबाव (तीसरा दिन), 2।
  • बैठे रहने पर हृदय की धड़कन और पूरे शरीर में स्पंदन, 1।*
  • शांत बैठे रहने पर हृदय की धड़कन, साथ ही उस हाथ में कंपन जिसमें उसने कोई वस्तु पकड़ रखी थी, 1। [1160.]
  • दोपहर के भोजन के बाद आधे घंटे तक व्याकुलता के साथ हृदय की धड़कन, 1।
  • प्रत्येक गतिविधि पर हृदय की तीव्र धड़कन (बयालीसवाँ और छियालीसवाँ दिन), 23।*
  • शाम को बिस्तर पर जाते समय हृदय की धड़कन, जिससे अत्यधिक व्याकुलता और पूरे शरीर में रक्तावेग होता है (पचासवाँ दिन), 23।
  • दोपहर बाद और शाम को दो घंटों तक हृदय की तीव्र धड़कन (इक्यावनवाँ दिन); खड़े रहने पर अधिक; उसे बार-बार बैठना पड़ता था, क्योंकि खड़े रहने से व्याकुलता होती थी (चौवनवाँ और पचपनवाँ दिन), 23।
  • हृदय की धड़कन बैठने की अपेक्षा खड़े रहने पर अधिक (छप्पनवाँ दिन), 23।
  • शाम को हृदय की तीव्र धड़कन, 13।

गर्दन और पीठ

  • गर्दन।
  • गर्दन के पिछले भाग में अकड़न और ठिठुरन, 32।
  • गर्दन के एक ओर अकड़न; दर्द के कारण सिर नहीं घुमा सकता (छियालीस घंटे बाद), 6।*
  • गर्दन के पिछले भाग में अकड़न (दूसरे दिन), 2।*
  • *गर्दन के पिछले भाग में अकड़न, सिरदर्द के साथ, 1। [1170.]
  • गर्दन के पिछले भाग में तनाव की अनुभूति (कुछ घंटों बाद), 1।
  • गर्दन की बाईं ओर दबाव, मानो रक्तवाहिकाएँ सूज गई हों, 1।
  • गर्दन के पिछले भाग की दाईं ओर चुटकी काटने जैसा दर्द, जो पंद्रह मिनट तक रहता है; उस पर हाथ से दबाने पर गायब हो जाता है, किंतु प्रातः 9 बजे तुरंत लौट आता है (पाँचवें दिन), 8।
  • प्रातः 10 बजे गर्दन के पिछले भाग के मध्य में कुछ तीव्र फाड़ते दर्द (पहले दिन), 8।
  • गर्दन की ग्रंथियों में सुई चुभने जैसे दर्द, 1।
  • पीठ।
  • पीठ में कमजोरी और निचले अंगों में पक्षाघात-जैसी अनुभूति; मुश्किल से चल पाता था (आठवें दिन), 1।*
  • मेरुदंड की दाईं ओर नीचे तक अकड़न और दुखन की अनुभूति, फिर कमर के आर-पार और दाएँ कूल्हे के जोड़ के ऊपर, 33।
  • बैठने के बाद पीठ और कमर के निचले भाग में अकड़न, 1।
  • बैठने के बाद पीठ और कमर के निचले भाग में अत्यधिक अकड़न; वह सीधा नहीं हो पाता था (आठ दिन बाद), 1।
  • पीठ में अकड़न, 1। [1180.]
  • पीठ में दबाव, 1।
  • सुबह जागने के बाद चलना-फिरना आरंभ करने पर पीठ में दर्द, जो बाद में गायब हो जाता है, 1।
  • पीठ में दर्द (चौबीसवें दिन), 14।
  • वक्र मेरुदंड में दर्द, 1।*
  • पीठ की दाईं ओर एक घंटे तक मरोड़ता दर्द, 1।
  • पीठ में तीव्र फाड़ता दर्द अथवा धड़कता दबाव, ठिठुरन के साथ; बाद में यह सिर में गर्मी सहित मंद, दबावयुक्त सिरदर्द में बदल जाता है (आरंभिक दिनों में), 1।
  • पीठ में गठियाजन्य फाड़ते दर्द (सोलहवें दिन), 12।
  • पूरे दिन पीठ में दर्दनाक काटता दर्द (आठ दिन बाद), 1।
  • खुली हवा में चलते और शरीर गर्म होते समय पीठ में जलन, 1।*
  • पीठ में कूल्हों के बीच तीव्र, गोली चलने जैसा दर्द, 29।* [1190.]
  • पीठ में धड़कन, 1।*
  • वक्षीय पृष्ठभाग।
  • पीठ के मध्य में निरंतर दुखता दर्द; वह बहुत स्पष्ट और लगातार था, 29।
  • दोनों स्कैपुलाओं पर भार रखे होने जैसा दबाव, गति की अपेक्षा सुबह विश्राम के समय अधिक; वे सूजी हुई प्रतीत होती थीं और पीठ टिकाने पर दर्द से साँस रुक जाती थी, 1।
  • प्रातः लगभग 4 बजे युद्ध का स्वप्न देखकर जागने पर, विशेषकर बाईं भुजा हिलाने से, स्कैपुलाओं के बीच वातजन्य दबाव, 4।
  • दाईं स्कैपुला में तनावयुक्त खिंचाव (इक्कीस दिन बाद), 1।
  • स्कैपुलाओं में दौरों के रूप में खिंचावयुक्त दर्द; बाद में गर्दन के पिछले भाग और सिर में, जब उसे ऐसा चक्कर आया मानो वह गिर जाएगी, 1।
  • केवल रात में स्कैपुलाओं के बीच खिंचाव; मासिक धर्म के दौरान राहत के लिए उसे पीछे की ओर झुकना पड़ता था, 1।
  • स्कैपुलाओं के बीच तीव्र फाड़ता दर्द, 32।*
  • चलते समय स्कैपुलाओं के नीचे फाड़ता दर्द, 1।*
  • स्कैपुलाओं के बीच चीर डालने जैसा दर्द, 1। [1200.]
  • बाईं स्कैपुला में जलता दर्द (चार दिन बाद), 1।
  • बाईं स्कैपुला में रेंगने की अनुभूति, 1।
  • दाईं स्कैपुला में बार-बार नुकीली चुभन (पाँच दिन बाद), 1।
  • स्कैपुलाओं के बीच सुई चुभने जैसे दर्द, 3।
  • कटि।
  • कमर के दोनों ओर दुखते दर्द, जो दोनों पैरों में नीचे की ओर गोली की तरह दौड़ते हैं, 36।
  • बैठे स्थान से उठने पर कमर के निचले भाग में अकड़न और दर्द (दसवें दिन), 16।*
  • कमर के निचले भाग में लुंजपन (पंद्रह दिन बाद), 1।
  • कमर के निचले भाग को फैलाने की इच्छा, 1।
  • विशेषकर कमर के निचले भाग और दाईं ओर अत्यधिक कुचले होने जैसी अनुभूति, खासकर झुकने या अचानक मुड़ने पर; सुबह अधिक तीव्र (इकतीसवें दिन), 24।
  • प्रत्येक खुराक लेने के तुरंत बाद कमर के निचले भाग में तीव्र दर्द, 41। [1210.]
  • कमर के निचले भाग में तीव्र दर्द (नौ दिन बाद), 1।*
  • कमर के निचले भाग की दाईं ओर दर्द (इकतीसवें दिन), 24।
  • झुकने के बाद कमर के निचले भाग में दर्द (आठवें दिन), 16।*
  • सुबह उठने पर कमर के निचले भाग में दर्द, मानो वह लुंज हो (तीस दिन बाद), 1।
  • रात में कमर के निचले भाग में और उस कंधे में दर्द जिस पर वह लेटा था, 1।
  • रात में कमर के निचले भाग में मानो पीटा गया हो, ऐसा दर्द, 1।*
  • कमर के निचले भाग में दबाव और तनाव, 3।
  • मेरुदंड के निचले भाग में नुकीले चुभते दर्द, जो बगल की ओर और ऊपर फैलते हैं (पैंतालीसवें दिन), 26।
  • पीठ के निचले भाग में सुई चुभने जैसे दर्द (तैंतीसवें दिन), 25।
  • त्रिकास्थि के क्षेत्र में लुंजपन और दर्द की अनुभूति, 32। [1220.]
  • त्रिकास्थि-प्रदेश में अत्यंत दर्दनाक चुभन, जिससे वह चौंक उठता है (पहले दिन), 8।
  • *अनुत्रिकास्थि में दर्द, मानो लंबे समय तक घोड़ागाड़ी में यात्रा करने के बाद हो, 1।
  • *os coccygis में डंक जैसी चुभन, जो दबाने पर भी दर्द करती है (तैंतीसवें दिन), 25।

अंग

  • धूसर, मैले नाखून, मानो सड़ गए हों; काटने पर चूर्ण की तरह बिखरते और कई परतों में फट जाते हैं, 7।*
  • सभी अंगों में भयंकर कंपन, विशेषकर हाथों में; कभी-कभी वह चाय का प्याला उठाने में बिल्कुल असमर्थ थी, 34।
  • सभी अंगों में कंपन, विशेषकर भुजाओं में; सुबह वे पक्षाघातग्रस्त-जैसी प्रतीत होती थीं, 3।
  • शाम को नींद आते समय भुजाओं और दाएँ निचले अंग में बार-बार झटके तथा हाथों से पकड़ने की क्रिया, 1।
  • सभी अंगों में कमजोरी (उन्नीसवें दिन), 12।*
  • *अंगों की कमजोरी, 12, 13, 18, 19, 26 , आदि।
  • सभी अंगों में इतनी कमजोरी कि वह मुश्किल से चल पाता था (पहले दिन), 19।* [1230.]
  • भुजाओं और पाँवों में इतनी अधिक कमजोरी कि वह मुश्किल से चल पाता अथवा हाथ से एक पौंड भार उठा पाता था (सोलहवें दिन), 12।
  • जोड़ों में इतनी कमजोरी कि वे जवाब दे जाते हैं, 1।
  • अंगों में थकावट, ऊपरी अंगों में अधिक, 19a।
  • ऊपरी और निचले अंगों में अकड़न, संवेदना-लोप तथा सुन्नपन के साथ; अब वह गिरे बिना चल नहीं सकता; वह स्वयं भोजन करने में भी असमर्थ है, क्योंकि अपने हाथों का उपयोग नहीं कर सकता (इक्कीस दिन बाद), 4 । [यह लक्षण एक वृद्ध पुरुष में पुराने, हठी दाद के लिए Silicea का निम्न तनुकरण देने के बाद उत्पन्न हुआ था। Hahnemann ने भूलवश इसे Lycopodium में रख दिया। Gross, Archiv. Fur Hom., vol. xx, part i, p. 79. Dr. Hering ने Dr. Gross के इस विवरण की ओर कृपापूर्वक संपादक का ध्यान आकर्षित किया है। अतः Lycopodium का लक्षण 2048 हटा दिया जाना चाहिए। -T. F. A.]
  • अंगों में अत्यधिक अकड़न, 1।
  • बैठे स्थान से उठते समय अंगों में पूरी तरह लुंजपन की अनुभूति, जो चलते रहने पर गायब हो जाती है, 1।
  • चलते और बैठते समय ऊपरी तथा निचले अंगों के जोड़ों में बेचैनी और लुंजपन, 4।
  • खुली हवा में चलते समय अंगों में भारीपन (पहले दिन), 1।
  • ऊपरी और निचले अंग भारी हैं, मानो सीसे से भरे हों, 1।
  • सभी अंग मानो कुचले हुए हैं; दर्द के कारण वह चार दिनों तक किसी भी स्थिति में अधिक देर नहीं लेट सकती (दो दिन बाद), 8। [1240.]
  • अंगों में बार-बार दर्द, विशेषकर बाईं ओर; कभी पैर में, कभी ऊपरी अंगों में, खासकर बाएँ घुटने और बाएँ अग्रबाहु में (बत्तीसवें दिन), 25।
  • कंधों और भुजाओं से नीचे कलाइयों तक दर्द, तत्पश्चात कूल्हों से टखनों तक; कंधों और भुजाओं के दर्द फाड़ते हुए तथा निचले अंगों के दर्द झटकेदार थे; शाम को बिस्तर पर जाने के आधे घंटे बाद; बेचैन नींद के साथ दर्द प्रातः 4 बजे तक रहा (पाँचवीं रात), 19।
  • गति करने पर प्रगंडास्थि के बाहरी अस्थिकंद पर और जांघ के भीतरी भाग में पक्षाघात-सदृश दर्द, 3।
  • रात 10 बजे जांघों और भुजाओं में बारी-बारी से एक घंटे तक ऐंठनयुक्त दर्द (पाँचवें दिन), 12।
  • सुबह हाथ और पाँव निर्जीव-से प्रतीत होते हैं, 1।
  • अंगों में पक्षाघात-जैसी अनुभूति, 13।
  • बाएँ पैर और ऊपरी भुजा के पिछले भाग में छह मिनट तक पीड़ादायक फाड़न (पहले दिन), 12।
  • जोड़ों और पाँवों के तलवों में फाड़ता दर्द, पाँवों के अनैच्छिक झटकों के साथ, मानो उसे chorea हो; इसके कारण सौ रातों तक नींद नहीं आई, 1।
  • बाईं पिंडली में घुटने के पीछे की मोड़ की ओर तीव्र फाड़ता दर्द, ठिठुरन के साथ; फिर शाम को बिस्तर में यह दर्द बाएँ कंधे में भी प्रकट हुआ (तीसरे दिन), 8।
  • अंगों में खिंचावयुक्त दर्द, कुछ ऐंठन-जैसा और कुछ तीखा, 1। [1250.]
  • अंगों में काटने जैसी पीड़ा (सातवें दिन), 18।
  • पैरों और भुजाओं में काटने जैसी पीड़ा, जो शाम को बिस्तर में बढ़ जाती है (छठे दिन), 19।
  • भुजाओं और पैरों में काटने जैसी पीड़ा (छठे दिन), 18।
  • बाएँ पाँव और एड़ी में फाड़ती हुई चुभनें, इतनी तीव्र कि वह सिहर उठा; पाँच सेकंड तक रहीं; बाद में दाएँ कंधे में भी, जिसे उसे नीचे लटकाए रखना पड़ा; प्रातः 10 बजे (पहले दिन), 8।
  • विभिन्न जोड़ों—कोहनियों, कलाइयों आदि—में सुई चुभने जैसे दर्द (पाँचवें दिन), 19।

ऊपरी अंग

  • बाहों में हल्की पेशीय फड़कनें, 1।
  • बाईं बांह में कंपकंपी (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • लगातार काम करते और झुकते समय बाहों में रक्त उमड़ता है; वे सूजी हुई-सी लगती हैं और एक घंटे तक काँपती हैं, 1।
  • बाईं बांह में संधिवाती अकड़न, जो विश्राम की अपेक्षा गति के दौरान अधिक पीड़ादायक है, 1।
  • सुबह बिस्तर में बाहों में थकावट, 1। [1260.]
  • बाहें भारी हैं, मानो सीसे से भरी हों, 1।
  • दाहिनी बांह में बेचैनी और कंपन, 1।
  • बाईं बांह में अत्यंत तीव्र दबाव, मानो अस्थिमज्जा में हो, 1।
  • बांह में खिंचाव, जो छोटी उँगली तक फैलता है, 3।
  • बांह के ऊपर लेटने पर वह सुन्न हो जाती है, 3।
  • दाहिनी बांह में सुइयाँ चुभने जैसी झनझनाहट के साथ सुन्न अनुभूति, 38।
  • दोनों बाहों में एक साथ आरंभ होकर कलाइयों तक फैलने वाला चीरता दर्द (चौथा दिन), 19।
  • दोनों बाहों में चीरता दर्द, 1।
  • बाहों में झटकेदार चीरता दर्द, जो अंगूठे तक फैलता है, 3।
  • बाहों में काटने जैसी अनुभूति (छठा दिन), 18। [1270.]
  • बाहों में चुभते दर्द (आठवाँ दिन), 15।
  • बाहों में चुभते दर्द (इक्कीसवाँ दिन), 26।
  • दाहिनी बांह में ऐसा स्पंदन कि मांसपेशियों के झटके दूसरी हथेली से अनुभव किए जा सकते थे; इसके बाद बांह लकवाग्रस्त-सी लगी, और बांह को बहुत ऊँचा रखने पर यह फिर लौट आता था (दस दिनों के बाद), 1।
  • भोजन के बाद दाहिनी बांह में स्पंदन, 1।
  • कंधा।
  • कांख की ग्रंथियों में अत्यधिक सूजन, 7a।
  • दाहिने कंधे के जोड़ में क्षणिक तीक्ष्ण दर्द, 29।
  • दाहिने कंधे में दबावकारी दर्द (चौथा दिन), 17।
  • शरीर से आवरण हटाते और ठंड लगते ही दाहिने कंधे पर अत्यंत तीव्र दबावकारी दर्द, जो कोहनी तक फैलता है, मुख्यतः रात में, 1।
  • कंधे में दबाव-जैसा दर्द, जो हाथ तक फैलता है, साथ में ऐसी अनुभूति मानो वह कोई भारी वस्तु उठा न सके, यद्यपि हाथ का उपयोग सामान्य रूप से कर सकती थी (तुरंत), 1।
  • शाम को दाहिने कंधे के जोड़ में पीड़ादायक झटका, जिससे बांह बहुत ऊपर उछल जाती है (सात दिनों के बाद), 1। [1280.]
  • दाहिने कंधे के जोड़ में झटका, 13।
  • कांख की ग्रंथियों में खिंचावयुक्त दर्द (उन्नीसवाँ दिन), 1।
  • कांखों में खिंचाव (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • बाएँ कंधे में खिंचावयुक्त दर्द (पहला दिन), 17।
  • कंधे और बांह में कोहनी तक नीचे जाने वाला खिंचावयुक्त दर्द (पहला दिन), 17।
  • कंधों और कलाइयों में चीरता दर्द, कुछ भी उठाने में असमर्थता (चौथा दिन), 19।
  • दाहिने कंधे में गठियाजन्य चीरता दर्द (सत्रहवाँ दिन), 12।
  • कंधे को हिलाने पर उसमें चीरता दर्द, 1।
  • दाहिने कंधे में चीरता दर्द (सोलहवाँ और उन्नीसवाँ दिन), 12।
  • बाएँ कंधे में स्पंदनशील चीरता दर्द (आधे घंटे के बाद), 12। [1290.]
  • कंधों में बार-बार डंक जैसे दर्द (उनतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिने कंधे में डंक जैसे दर्द (छब्बीसवाँ दिन), 25।
  • कांखों में काटने जैसा दर्द (दसवाँ दिन), 19।
  • कंधे में चुभता दर्द, जो हाथ तक फैलता है (पहला दिन), 17।
  • कांखों में चुभते दर्द (आठवाँ दिन), 17।
  • बाएँ कंधे में चुभता दर्द (तीसरा, चौथा, पाँचवाँ और सातवाँ दिन), 17।
  • सुबह कंधे के जोड़ में बेधने वाले दर्द, 1।
  • दाहिने कंधे के जोड़ में बेधने वाले और चीरते दर्द, 13।
  • बाएँ कंधे में बेधने वाले दर्द (चौथा दिन), 17।
  • बांह।
  • दोनों बाहों में कंधों से कोहनियों तक कमजोरी (चौथा दिन), 22। [1300.]
  • बाईं ऊपरी बांह के भीतरी भाग और निचले हिस्से में बार-बार तीव्र दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • दबाने पर ऊपरी बांह में दर्द, 1।
  • बाईं ऊपरी बांह के निचले हिस्से में बार-बार दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • गहराई से दबाने पर ऊपरी बांह और अग्रबाहु की हड्डियों में कुचले जाने जैसा दर्द (तीसरा दिन), 25।
  • दाहिनी ऊपरी बांह में झटकेदार दर्द (दस दिनों के बाद), 1।
  • बाईं ऊपरी बांह के निचले हिस्से में खिंचावयुक्त दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • बाईं ऊपरी बांह में डंक जैसे और खिंचावयुक्त दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिनी ऊपरी बांह में गठियाजन्य चीरता दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • सुबह 9 बजे बाईं ऊपरी बांह के मध्य में पीड़ादायक चीरता दर्द, मानो अस्थिमज्जा में हो (पहला दिन), 8।
  • बाईं ऊपरी बांह के ऊपरी और सामने के हिस्से में बार-बार होने वाला चुभता दर्द, जो लगातार पुनः होता था (बाईसवाँ दिन), 25। [1310.]
  • दाहिनी बांह में कंधे से कोहनी तक और आगे-पीछे जाने वाले चुभते दर्द (पाँचवाँ दिन), 22।
  • ऊपरी बांह के ऊपरी भाग में चुभता दर्द (पाँचवाँ दिन), 17।
  • दाहिनी ऊपरी बांह के पिछले भाग में चुभते दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • कोहनी।
  • बाईं कोहनी की वर्तक सतह में बुलबुले फूटने जैसी अनुभूति (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • कोहनियों में खिंचाव, मानो अस्थिमज्जा में हो (तीसरा दिन), 1।
  • कोहनी में खिंचाव और चुभन के बीच का-सा दर्द (चौथा दिन), 17।
  • कोहनी में चुभता दर्द (पाँचवाँ दिन), 17।
  • दाहिनी कोहनी को आर-पार बेधने वाले दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • अग्रबाहु।
  • बाएँ अग्रबाहु की मांसपेशियों में फड़कन (दस दिनों के बाद), 1।
  • अल्नर धमनी में स्पंदन स्पष्ट अनुभव होना (तैंतीसवाँ दिन), 25। [1320.]
  • बाएँ अग्रबाहु में दबाने वाला दर्द (पहला दिन), 25।
  • अग्रबाहु की प्रसारक कंडराओं में लकवाग्रस्तता-जैसा दर्द, 3।
  • बाएँ अग्रबाहु में झटकेदार दर्द, 1।
  • बाईं अल्ना अस्थि के निचले भाग में पीड़ादायक खिंचाव, जो पूर्वाह्न में बार-बार हुआ; बाद में कोहनी के पास बाईं अल्ना के ऊपरी भाग में खिंचावयुक्त दर्द और कोहनी के पास रेडियस अस्थि में अचानक बेधने वाले दर्द; अग्रबाहु के ऊपरी भाग में भी बार-बार चुभन और चीरता दर्द, कभी-कभी यह दर्द खिंचावयुक्त चीरता था और पूर्वाह्न में बार-बार लौटता था (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • अग्रबाहु में पीड़ादायक खिंचाव (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिने अग्रबाहु में खिंचावयुक्त दर्द (पहला दिन), 17।
  • बाएँ अग्रबाहु में खिंचावयुक्त दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • अल्ना अस्थि के मध्य में खिंचावयुक्त दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिने अग्रबाहु और कलाई में चीरता दर्द, जो कोहनी तक और बाद में कंधे तक फैलता है (बीसवाँ दिन), 12।
  • बाएँ अग्रबाहु में बार-बार खिंचावयुक्त-चीरते दर्द; कलाई के पास दर्द कभी-कभी कसने वाला था, जबकि पूर्वाह्न में दर्द कोहनी के पास था; दोपहर के समय दर्द अधिक देर तक बना रहा (बत्तीसवाँ दिन), 25। [1330.]
  • कोहनी के पास बाईं अल्ना अस्थि में चीरता दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • बाएँ अग्रबाहु में लकवाग्रस्तता-जैसा चीरता दर्द, 3।
  • अग्रबाहु में गठियाजन्य चीरते दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • बाएँ अग्रबाहु और कलाई में चीरते दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • बाएँ अग्रबाहु में गठियाजन्य चीरता दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • दिन के दौरान बाएँ अग्रबाहु के ऊपरी हिस्से में बार-बार चीरता दर्द; कभी-कभी दर्द चुभता और काफी तीव्र था (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिने अग्रबाहु में डंक जैसे दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • अग्रबाहु के निचले भाग में बेधने वाले दर्द (अट्ठाईसवाँ दिन), 25।
  • दाहिने अग्रबाहु में चुभते दर्द (तीसरा दिन), 17।
  • कलाई।
  • कलाइयों में कमजोरी (तीसरा दिन), 15। [1340.]
  • सुबह कलाइयों को चलाने में अशक्तता, 3।
  • कलाई में मोच आने जैसा दर्द, 1।
  • दाहिनी कलाई में दबावकारी दर्द (दूसरा दिन), 17।
  • दाहिनी कलाई में कसने वाला दर्द (चवालीसवाँ दिन), 24।
  • बाईं कलाई में खिंचाव और चीरता दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • कलाइयों और उँगलियों में अत्यंत तीव्र चीरते दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • कलाई में बार-बार अत्यंत तीव्र चीरता दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • पूर्वाह्न में कलाइयों के क्षेत्र में अत्यंत तीव्र चीरता दर्द (पहला दिन), 19।
  • कलाई और हथेली के उभरे भाग में चीरता दर्द (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • कलाई में ऐसा चीरता दर्द जो स्पर्श और गति से भी बहुत पीड़ादायक होता है, मानो वह टूट जाएगी, 1। [1350.]
  • दाहिनी कलाई में चीरता दर्द (पहला दिन), 17।
  • दाहिनी कलाई में चीरता दर्द (सोलहवाँ दिन), 12।
  • बाईं कलाई में चीरता दर्द और बाईं मध्यमा में दर्द; उँगलियाँ कुछ सूजी हुई-सी लगती हैं (चार दिनों के बाद), 28।
  • बाईं कलाई में अत्यंत तीव्र चीरता दर्द, जो वहाँ से कंधे तक फैलता है, 13।
  • लिखते समय दाहिनी कलाई में बेधने वाले दर्द (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिनी कलाई में बेधने वाले दर्द (चौथा दिन), 17; (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • हाथ।
  • लिखते समय दाहिने हाथ की अशक्तता के कारण बार-बार कलम रख देनी पड़ती थी (तेईसवाँ दिन), 25।
  • लिखते समय हाथों में ऐंठन, 1।
  • मामूली परिश्रम के बाद हाथ में ऐंठन-जैसा दर्द और अशक्तता, 1।
  • हाथों में खिंचाव (तेरह दिनों के बाद), 1। [1360.]
  • दाहिने हाथ में खिंचावयुक्त दर्द, 1।
  • हाथों में सुन्नता की अनुभूति और दोनों बाहों में सुई जैसी चुभन, 29।
  • हाथों में सुई जैसी चुभन और सुन्नता, 1।
  • रात में हाथों का सुन्न हो जाना, 1।
  • रात में दाहिने हाथ का सुन्न हो जाना, 1।
  • दाहिनी हथेली के उभरे भाग में डंक जैसा दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • उँगली।
  • उँगलियों के नाखून खुरदरे और पीले, 1।
  • दोपहर में उँगलियों के सिरों पर अत्यधिक शुष्कता, 4।
  • बाईं मध्यमा मुड़ी हुई और अकड़ी है; उसे सीधा करने पर हाथ के पृष्ठभाग की पूरी प्रसारक कंडरा के साथ अत्यधिक दर्द होता है, 1।
  • रात में छोटी उँगली काफी अकड़ गई और उसे मोड़ नहीं सका, 1। [1370.]
  • दाहिने अंगूठे में ऐसी कमजोरी कि लगभग पूरे हाथ का उपयोग नहीं हो पाता (पहला दिन), 1।
  • अंगूठे के जोड़ों में ऐंठन-जैसा दर्द, 3।
  • एक उँगली की वर्तक सतह में किरच चुभने जैसा दर्द, 1।
  • बाईं तर्जनी में ऐसा दर्द, मानो पूययुक्त फोड़ा बनने वाला हो (बीस दिनों के बाद), 1।
  • ऐसी अनुभूति मानो उँगलियों के सिरे पक रहे हों, 1।
  • एक उँगली में सुन्नता की अनुभूति, मानो वह मोटी हो और उसकी हड्डी बढ़ गई हो, 1।
  • उँगलियों में लकवाग्रस्तता-जैसा खिंचाव, 1।
  • दाहिनी उँगलियों के जोड़ों में खिंचाव की अनुभूति, मानो उन्हें जोड़ के खाँचों से बाहर खींचा जा रहा हो, 32।
  • बाईं छोटी उँगली में खिंचाव (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • उँगलियों में चीरता दर्द, 3। [1380.]
  • उँगलियों और अंगूठों के जोड़ों में चीरता दर्द, 4।
  • कलाई के पास बाएँ अंगूठे में चीरता दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • मध्यमा में चीरता दर्द, 1।
  • दाहिनी मध्यमा में चीरता दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिनी मध्यमा के दूसरे जोड़ में चीरता दर्द, साथ में क्षणिक कंपन (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • तर्जनी में झटकेदार दर्द, जो पाँच मिनट तक अत्यंत तीव्रता से बढ़ता रहा, 1।
  • एक उँगली के पृष्ठभाग पर जले होने जैसी अनुभूति, 1।
  • अंगूठों में डंक जैसे दर्द (इकतीसवाँ दिन), 25।
  • दाहिनी छोटी उँगली में डंक जैसा दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25।
  • अनामिका में झनझनाती चुभन (तीन दिनों के बाद), 1। [1390.]
  • कभी एक, कभी दूसरी उँगली में, और फिर बाहों में भी, सुन्न पड़ी होने जैसी चुभन, 1।
  • दाहिने हाथ की उँगलियों में चुभन (सोलहवाँ दिन), 15।
  • अंगूठे के अंतिम पोर में चुभन (तैंतीसवाँ दिन), 25।
  • बाईं मध्यमा में चुभता दर्द (दूसरा दिन), 17।
  • बाईं तर्जनी के सिरे में चुभता दर्द (बाईसवाँ दिन), 25।
  • अंगूठे के नीचे हथेली के उभरे भाग में बेधने वाले दर्द, 3।
  • सुबह 9 बजे दाहिनी अनामिका के मध्य जोड़ की भीतरी सतह में गहराई तक एक महीन बेधता दर्द, जबकि बाहरी भाग में जलता हुआ दर्द है (पहला दिन), 8।
  • बाईं मध्यमा में झटकेदार बेधने वाले दर्द (दो दिनों के बाद), 1।
  • छोटी उँगली में बेधने वाले दर्द, 3।

निचले अंग

  • पैर घसीटते हुए, भारी चाल, 1. [1400.]
  • निचले अंग एक बार साथ-साथ झटके से खिंचते हैं, जिसके बाद ऐसा अनुभव होता है मानो सिर काँप रहा हो, जैसे ठंड लगकर आने वाले ज्वर में होता है; रोएँ खड़े हो जाते हैं, यद्यपि शरीर की गर्मी सामान्य रहती है, 1.
  • अत्यधिक घबराहट के साथ निचले अंगों में कंपन, 33.
  • बाएँ निचले अंग में पेशियों की फड़कनें, 1.
  • *निचले अंगों की कमजोरी, 3.
  • थोड़ा चलने से निचले अंगों में इतनी अधिक थकान कि उसे विश्राम करना पड़ा, 4.*
  • प्रातः निचले अंगों में थकान, 1.*
  • निचले अंगों में भारीपन, 1.*
  • दायाँ निचला अंग सुन्न पड़ जाता है, 1.
  • शाम को बैठे हुए निचले अंग सुन्न पड़ जाते हैं, जिसके बाद वे तब तक अकड़े रहते हैं जब तक वह उन्हें फिर से नहीं हिलाती, 1.
  • ठिठुरन से होने जैसा खिंचाव और तनाव, जो नितंबों से नीचे पाँवों तक फैलता है (ग्यारहवाँ दिन), 16. [1410.]
  • बाएँ निचले अंग में फाड़ते हुए दर्द (सोलहवाँ दिन), 12.
  • श्रोणि से घुटने के पीछे के खोखले भाग तक फैलता हुआ फाड़ता दर्द, 3.
  • पूरे बाएँ निचले अंग में इधर-उधर फाड़ता हुआ दर्द, 11 A.M. पर, 8.
  • निचले अंगों में अनेक स्थानों पर चुभती झनझनाहट, जो जोर से खुजलाने के बाद धीरे-धीरे कम होती है, 4.
  • कूल्हा।
  • कूल्हों और कमर के निचले भाग में तीव्र कुचले-जैसा अनुभव, झुकने पर दर्दनाक (तीसरा दिन), 24.*
  • *कूल्हों में दर्द (इकतीसवाँ दिन), 25.
  • झुकने पर बाएँ कूल्हे में दर्द, जो पंद्रह मिनट तक रहता है, 1.
  • दाएँ कूल्हे से पैर की अंगुलियों तक नीचे की ओर खिंचता हुआ अनुभव, 32.
  • दाएँ कूल्हे के जोड़ में खींचता-झटकेदार दर्द, जिससे अंग को हिलाना असंभव हो जाता है (सोलह दिनों के बाद), 1.
  • कूल्हों में फाड़ता हुआ दर्द , जो दाईं टाँग की बाहरी ओर से घुटने तक फैलता है, जहाँ सुई-सी चुभन होती है; बैठने पर आराम, चलने-फिरने पर फिर लौटता है; घुटने की दर्दनाक अकड़न के कारण चलने में असमर्थता; आधे घंटे बाद बाएँ हाथ की अंगुलियों की दूसरी अंगुलास्थियों में चुभन और तनाव हुआ (सातवाँ दिन), 19.*
  • जाँघें। [1420.]
  • जाँघों में कमजोरी (चौथा दिन), 19.
  • बाईं जाँघ में ऐसा अनुभव मानो त्वचा के नीचे कोई थैली ऊपर उठी और अचानक फट गई हो (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • जाँघ में फुरफुराहट-जैसा दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • दाईं जाँघ में बुलबुले फूटने का अनुभव (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • चलते, बैठते और लेटते समय जांघास्थि में ऐसा दर्द मानो उसे पीटा गया हो; यहाँ तक कि प्रातः बिस्तर में जागने पर भी, 1.*
  • जाँघ में बार-बार खींचता और चुभता दर्द (छब्बीसवाँ दिन), 25.*
  • जाँघों में खिंचाव, जो पाँवों तक फैलता है, 1.*
  • वंक्षण के ठीक नीचे जाँघ में खींचने और चुभने के बीच के प्रकार का दर्द (बाईसवाँ दिन), 25.*
  • दाईं जाँघ में खींचता दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • बाईं जाँघ के निचले भाग में खींचता दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 15. [1430.]
  • जाँघों में फाड़ता हुआ दर्द (उन्नीसवाँ दिन), 12 ; (इकतीसवाँ दिन), 25.*
  • दाईं जाँघ में फाड़ता दर्द, जो बाद में नीचे टखनों के अस्थि-उभारों तक फैलता है (बीसवाँ दिन), 12.
  • बाईं जाँघ में फाड़ता दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • बाईं जाँघ में घुटने के ऊपर आगे-पीछे होने वाला फाड़ता दर्द, मानो हड्डी की मज्जा में हो; बाद में घुटने में हुआ और अत्यंत तीव्र हो जाने पर खड़े होने से कम हो गया (एक घंटे बाद), 8.
  • बाईं जाँघ में स्पंदनयुक्त फाड़ता दर्द, जो कुछ पीड़ादायक था (तीसरा दिन), 12.
  • बाईं जाँघ में गठियावातीय फाड़ते दर्द (सोलहवाँ दिन), 12.
  • दाईं जाँघ की पेशियों में झटकेदार दर्द, 1.
  • दाईं जाँघ में घुटने से थोड़ा ऊपर रक्तवाहिनियों में समय-समय पर झटका, जो दो घंटे तक रहता है और दर्दनाक नहीं है (एक घंटे बाद, बारहवाँ दिन), 12.
  • दाईं जाँघ के मध्य और ऊपरी भागों में झटके, 13.
  • बैठे हुए जाँघें सुन्न पड़ जाती हैं, 3. [1440.]
  • जाँघों की भीतरी और पिछली सतह पर तीव्र काटने-जैसा अनुभव (दसवाँ दिन), 19.
  • दाईं जाँघ में डंक-सी चुभन (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • जाँघ के पिछले भाग में डंक-सा चुभता दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • बाईं जाँघ में सुई चुभने और तीर-सा दौड़ने वाला दर्द, 29.
  • दाईं जाँघ में चुभता दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 25.*
  • बाईं जाँघ में चुभन, 1 ; (तैंतीसवाँ दिन), 25.*
  • दाईं जाँघ के मध्य में लगातार तीखी सुई-जैसी चुभनें, बाद में किसी एक पाँव अथवा दूसरे पाँव में और भुजाओं में (पहला दिन), 27.
  • दाईं जाँघ के ऊपरी भाग में सुई-जैसी चुभनें (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • चलते समय बाईं जाँघ में सुइयों जैसी चुभनें, 1.
  • दाईं जाँघ में स्पंदनशील अनुभूति (तैंतीसवाँ दिन), 25.*
  • घुटना। [1450.]
  • अत्यधिक कमजोरी, विशेषतः घुटनों के आसपास, 21.*
  • घुटनों की कमजोरी, 1.*
  • घुटनों में इतनी कमजोरी कि वह खड़ा नहीं रह सका; बाद में कमजोरी जाँघ की मध्य तिहाई तक फैल गई (दसवाँ दिन), 18a.
  • चलते और खड़े रहते समय घुटनों की दर्दनाक अकड़न, 1.
  • दाएँ घुटने के पीछे के खोखले भाग में बुलबुले फूटने का अनुभव (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • चलते समय घुटने में तनने वाला दर्द (बत्तीसवाँ दिन), 23.
  • *घुटने में ऐसा दर्द मानो उसे अत्यधिक कसकर बाँधा गया हो, 1.
  • बाएँ घुटने की टोपी में दुखन, 1.
  • हड्डियों में खींचते दर्द, जो घुटनों से आरंभ होकर जाँघों की बाहरी ओर से कूल्हों तक फैलते हैं, मानो कोई कसी हुई रस्सी हो (बीसवाँ दिन), 26.
  • बाएँ घुटने में खिंचाव (बारहवाँ दिन), 1. [1460.]
  • बैठे हुए घुटनों में फाड़ता दर्द, जो गति करने पर गायब हो जाता है, 1.*
  • दाएँ घुटने के आसपास फाड़ता दर्द, जो पाँव तक फैलता है; विश्राम और गति दोनों के समय, पूर्वाह्न में अधिक (दो दिनों के बाद), 1.
  • बाएँ घुटने में डंक-सा चुभता-फाड़ता और खींचता दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • घुटनों में चुभते दर्द (इक्कीसवाँ दिन), 26.
  • दाएँ घुटने में चुभता दर्द (पाँचवाँ दिन), 17.
  • बाएँ घुटने में चुभते, खींचते-दबावकारी दर्द, जो बार-बार होते हैं (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • घुटनों में समय-समय पर सुई-जैसी चुभनें (पाँचवीं रात), 19.
  • चलते समय घुटनों के जोड़ों में गहराई तक सुई-जैसी चुभनें, बैठने पर नहीं (सत्ताईसवाँ दिन), 26.
  • दाएँ घुटने के आर-पार सुई-जैसी चुभनें (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • बाएँ घुटने में सुई-जैसी चुभनें (चौथा दिन), 17 ; (बत्तीसवाँ दिन), 25.
  • टाँग। [1470.]
  • टाँगों में सूजन, यद्यपि केवल पाँवों तक, 1.
  • टाँगों में इतनी अधिक कमजोरी कि वह मुश्किल से चल सकता था (चौथा दिन), 19.
  • टाँगों में तथा पिंडलियों के नीचे और पाँवों में थकान (सातवाँ दिन), 14.
  • पूरी दाईं टाँग में लँगड़ापन, तथा चलते समय रोगग्रस्त पैर की अंगुलियों के तल-पोरों में दर्दनाक संवेदनशीलता, 4.
  • टाँग के एक दुखते स्थान में बेधता दर्द (चौदह दिनों के बाद), 1.
  • टाँगों में, घुटनों से पाँवों तक, किसी जीवित वस्तु के होने जैसा अनुभव; ठिठुरन के बिना कंपन जैसा, 6 से 7 P.M. तक (पंद्रह दिनों के बाद), 1.
  • जब एक टाँग में बहुत दर्द होता है, तब दूसरी पूरी तरह सुन्न रहती है, 32.
  • टाँगों में दबावकारी दर्द (दूसरा दिन), 17.
  • शाम को टाँगों में नीचे की ओर खींचता दर्द, जिसका अंत हर बार टाँगों के चौंककर उछलने या झटका लगने से होता है, 1.
  • बाईं टाँग में खींचते और फाड़ते दर्द (तैंतीसवाँ दिन), 23. [1480.]
  • टाँगों में फाड़ते दर्द, जो चलने-फिरने की अपेक्षा गर्मी में और बैठे हुए अधिक होते हैं (तीसरा दिन), 12.
  • दाईं टाँग में लगातार फाड़ता दर्द, 2 से 5 P.M. तक (बारहवाँ दिन), 12.
  • दाईं टाँग में गठियावातीय फाड़ते दर्द, जो बाद में ऊपर कंधे तक फैलते हैं और वहाँ धीरे-धीरे गायब हो जाते हैं (सत्रहवाँ दिन), 12.
  • टाँग में फाड़ता दर्द, जो टखनों के अस्थि-उभारों में अत्यंत पीड़ादायक है (उन्नीसवाँ दिन), 12.
  • टाँगों में तीव्र काटने-जैसा अनुभव (ग्यारहवाँ दिन), 19.
  • बाईं टाँग में बार-बार होने वाली स्पंदनशील अनुभूति (तैंतीसवाँ दिन), 23.
  • दोनों टाँगों में स्पंदन (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • बाईं टिबिया में दबावकारी दर्द, जो दो घंटे तक रहता है, 1.
  • टिबिया के निचले भाग में दर्दनाक खिंचाव (इकतीसवाँ दिन), 25.
  • टिबिया में खींचता-फाड़ता दर्द, जो बार-बार होता है (बत्तीसवाँ दिन), 23. [1490.]
  • टिबिया के मध्य भाग में फाड़ता दर्द (उनतीसवाँ दिन), 25.
  • बाईं टिबिया और घुटने में चिकोटी काटने जैसा दर्द, 1.
  • पिंडलियों में सुन्नता और सूजन, 32.
  • चलते समय ऐसा अनुभव मानो पिंडलियाँ बहुत छोटी हों , बैठते ही तुरंत गायब हो जाता है, 1.*
  • प्रातः बिस्तर में दाईं पिंडली में दर्दनाक ऐंठन, 1.
  • दाईं पिंडली में दर्दनाक संकुचन (ग्यारहवाँ दिन), 13.
  • चलते समय पिंडलियों में ऐंठन-जैसा तनाव (बीसवाँ दिन), 26.*
  • पिंडलियाँ तनी और संकुचित (बाईसवाँ दिन), 26.*
  • बाईं पिंडली में दर्दनाक अनुभूति (बाईसवाँ दिन), 25.
  • चलते समय कदम बढ़ाते ही पिंडलियों में चुभन, 1. [1500.]
  • खुले वातावरण में चलते समय पिंडली के ऊपर चुभता दर्द (अठारहवाँ दिन), 1.
  • टखना।
  • टखने में अकड़न और थकान, टखनों के अस्थि-उभारों के आसपास सूजन सहित, 1.
  • टखनों में दुखन (दूसरा दिन), 16.
  • टखनों में तनाव, बैठे हुए भी, 1.
  • टखने में दर्द, मानो मोच आ गई हो, 1.*
  • बाएँ टखने में बार-बार होने वाला खिंचाव (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • टखनों में फाड़ता दर्द, लेटने से कम होता है (चौथा दिन), 19.
  • खुले वातावरण में चलते समय tendo Achillis में तीव्र चुभता दर्द, 1.
  • दाएँ बाहरी टखने के अस्थि-उभार में चुभन, रात में भी, 1.
  • पाँव।
  • पाँवों में सूजन, अधिकांशतः प्रातः उठने पर, शाम को कम; चलते समय अत्यधिक तनाव, 1. [1510.]
  • पाँवों में लाली सहित सूजन, जिसमें दबाने से थोड़े ही समय में सफेद धब्बा पड़ जाता है; दर्द पैर की अंगुलियों से टखनों के अस्थि-उभारों तक फैलता है, 1.*
  • पाँवों में टखनों तक सूजन, 32.*
  • बाएँ पाँव में टखनों के अस्थि-उभारों तक सूजन, 1.*
  • (पाँव पर और टखने के आसपास लाल, चमकीला विसर्प निकला, जिसमें डंक-से चुभते दर्द थे), 15b.
  • पसीने के बिना पाँवों से असह्य खट्टी गंध, 1.*
  • *हर शाम पसीने के बिना पाँवों से असहनीय रूप से दुर्गंधयुक्त, सड़े शव-जैसी गंध (तीन दिनों के बाद), 1.
  • चलते समय कई बार उसके पाँवों ने उसका भार सँभालना छोड़ दिया, 32.
  • पाँवों की कमजोरी (चौदहवाँ दिन), 12.*
  • लंबे समय तक चलने के दौरान दाएँ पाँव के तलवे में, विशेषतः अंगूठे में, दर्दनाक ऐंठन (दो दिनों के बाद), 1.*
  • पाँवों के तलवों में ऐंठन, 1.* [1520.]
  • पाँव में आसानी से मोच आ जाती है, 3.
  • पाँवों के तलवों में दुखन, विशेषतः अंगुलियों की ओर, 3.*
  • पाँवों में ऐसा दर्द मानो हड्डियों में हो, जो टाँगों के मध्य से नीचे टखनों तक और पाँवों की ऊपरी सतह के साथ फैलता है; खड़े रहने और चलने से बढ़ता है; दर्द के कारण पाँवों में बेचैनी होती है, जिससे उन्हें विश्राम देना आवश्यक हो जाता है (दसवाँ दिन), 16.
  • पाँव की ऊपरी सतह पर ऐसा दर्द मानो चोट से कुचल गई हो, 1.
  • दाएँ पाँव की ऊपरी सतह पर दर्द (दसवाँ दिन), 24.
  • पाँव के अग्रभाग के गद्देदार तल में दर्द, 1.
  • दाएँ पाँव के अग्रभाग के गद्देदार तल में दर्द (ग्यारहवाँ दिन), 15 ; (चौबीसवाँ दिन), 27.
  • पाँव के तलवे में खिंचाव (तैंतीसवाँ दिन), 25.
  • पाँवों और टाँगों में अत्यंत दर्दनाक फाड़ता दर्द, जो चलने से बढ़ता है; बाद में दर्द बाएँ पाँव में, विशेषतः पिंडली में, अनुभव हुआ, जहाँ लगातार ऐंठनयुक्त संकुचन था, जो बैठे हुए भी बना रहा (छत्तीसवाँ दिन), 15.
  • पाँवों में तीव्र फाड़ता दर्द, 13. [1530.]
  • बाएँ पाँव के ऊपरी भाग में गठियावातीय फाड़ते दर्द (सोलहवाँ दिन), 12.
  • पाँवों के तलवों में लगातार फाड़ता दर्द, जो 6 P.M. तक रहा, फिर ऊपर की ओर फैलकर घुटने के ऊपर स्थिर हो गया, जहाँ पूरी रात बना रहा (चौदहवाँ दिन), 12.
  • दाएँ पाँव के तलवे के मध्य में, भीतरी किनारे की ओर, महीन फाड़ता दर्द और साथ ही बाहरी ओर तनाव; पूर्वाह्न में दो बार (पाँचवाँ दिन), 8.
  • बाएँ पाँव के तलवे में फाड़ता दर्द (सोलहवाँ दिन), 12.
  • एड़ियों में फाड़ता दर्द (बारहवाँ और तेईसवाँ दिन), 1.*
  • पाँवों में जलन, 1.*
  • रात में पाँवों में जलन, 1.
  • पाँवों के तलवों में जलन, 1.*
  • रात में दाएँ पाँव के तलवे में जलन, 1.
  • दाएँ पाँव की ऊपरी सतह पर जलन (बारहवाँ दिन), 15. [1540.]
  • पाँवों के तलवों में काटता दर्द, 3.
  • पाँवों और टाँगों में चुभता दर्द, विशेषतः खड़े रहते समय (बारहवाँ दिन), 15.
  • दाएँ पाँव के टखने के अस्थि-उभारों के आसपास चुभन (आठवाँ दिन), 17.
  • खड़े और बैठे हुए एड़ी तथा पैर के अंगूठे में चुभन, 1.
  • पाँवों के तलवों में सुई-जैसी चुभनें, 1.
  • बाईं एड़ी में सुई चुभने जैसी अनुभूति और सुई-जैसी चुभनें, 29.
  • पैर की अंगुलियाँ।
  • ठीक हो चुके पैर के अंगूठे में फिर ऐसा दर्द होने लगा मानो उसमें व्रण बन रहा हो, केवल उस पर पैर रखते और चलते समय, 1.
  • पैर के अंगूठे पर घट्टा, जिसमें तीव्र जलन है, 1.
  • एक घट्टा स्पर्श के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है, 1.
  • पैर की अंगुलियाँ अकड़ी हुई हैं; वह उन्हें मोड़ नहीं सकती, 1. [1550.]
  • चलते समय पैर की दो अंगुलियों में ऐसा दर्द मानो जूते का दबाव पड़ रहा हो (सात दिनों के बाद), 1.
  • पैर के अंगूठे में लगातार इतना तीव्र दर्द कि वह मुश्किल से पैर रख सकता है, 1.*
  • पैर के अंगूठे के जोड़ में मोच-जैसा दर्द, 3.
  • पैर के अंगूठे के नाखून के नीचे दर्द और उसमें सुई-जैसी चुभनें, 1.*
  • पैर के अंगूठे में बार-बार बेधता दर्द, 3.*
  • पैर की अंगुलियों के जोड़ों में खिंचाव का अनुभव, मानो उन्हें जोड़ों के खाँचों से बाहर खींचा जा रहा हो, 32.
  • पैर के अंगूठों में फाड़ता दर्द , शाम को, 1, 3.*
  • दाएँ पैर के अंगूठे में फाड़ता दर्द, 1.
  • दाएँ पैर के अंगूठे के गद्देदार तल-पोर में कुछ बार फाड़ता दर्द, 11 A.M. पर (पहला दिन), 8.
  • पैर की अंगुलियों में ऐंठन-जैसी सुई चुभनें, 1. [1560.]
  • घट्टों में तीव्र सुई-जैसी चुभनें, 1, 3.*
  • घट्टे में सुई-जैसी चुभनें , जिनसे पाँव ऊपर की ओर झटके से उठते हैं (छठा दिन), 1.*
  • दाएँ पैर के अंगूठे में काटती-चुभती सुई-जैसी पीड़ा, 1.
  • पैर के अंगूठे में तीव्र सुई-जैसी चुभनें, 1.
  • पैर के अंगूठे के जोड़ में सुई-जैसी चुभनें, 3.
  • पैर के अंगूठे में इतनी तीव्र सुई-जैसी चुभनें कि निचला अंग झटके से हिल गया (छठा दिन), 1.
  • कठोर हो चुकी पैर की अंगुली में सुई-जैसी चुभनें, 1.
  • पैर की अंगुली के नाखून के नीचे खुजलीयुक्त काटता दर्द, 1.*

सामान्यताएँ

  • पाँच दिनों की बीमारी के दौरान वह अत्यंत कृश हो गई, 8।
  • समूचे शरीर की कृशता, साथ में पीली, कष्टग्रस्त मुखाकृति, 11।* [1570.]
  • अत्यधिक कृशता, 7।*
  • लिखते समय काँपना (तैंतीसवाँ दिन), 25।*
  • रात में, अमावस्या के लगभग समय, मिरगी का दौरा; पहले शरीर तनकर सीधा हो गया, फिर बिना चिल्लाए और बिना जीभ काटे इधर-उधर उछलने लगा (सोलह दिनों के बाद), 1।
  • एक दौरा; वह पीली और शांत हो गई तथा उसकी भूख चली गई, रोते हुए कान में अत्यंत तीव्र चुभन की शिकायत की, वमन किया और हाथों में इतनी निर्बल हो गई कि प्याला मुँह तक नहीं ले जा सकी (पाँच घंटे बाद), 1।
  • भूख न लगना; पीली, कष्टग्रस्त मुखाकृति; हर सुबह पसीना, जो कभी-कभी बहुत अधिक होता था; निचले अंगों में भारीपन और थकावट, जिसके कारण उसे बार-बार लेटना पड़ता था; मिचली; हर शाम सोने जाने से पहले ठंड लगना; यहाँ-वहाँ, छाती के पार्श्वों, उदर और अंगों में चुभने वाली पीड़ाएँ, कभी-कभी इतनी तीव्र कि वह भय से उछल पड़ती थी; साँस भीतर खींचने पर उरोस्थि के नीचे पीड़ा; बाँहों और निचले अंगों पर खुजली, साथ में छोटी-छोटी फुंसियाँ, 9।*
  • शाम को लेटने (और ऊँघने) के बाद, वह अनजाने में हाथ-पैर पटकने और झटके लेने लगा; आँखें बंद थीं और वह जोर से खर्राटे ले रहा था (बिना चीखे); मुँह से झाग रिसने लगा, जिसके बाद वह मृतवत् निश्चल पड़ा रहा; जब उसे जगाने का प्रयत्न किया गया, तो वह बिल्कुल अकड़ा हुआ था, फिर उसने स्थिर दृष्टि वाली आँखें खोलीं और अस्पष्ट बुदबुदाने लगा (मिरगी का दौरा?), (सोलह दिनों के बाद), 1।
  • शरीर के पूरे बाएँ भाग में अत्यधिक शीतलता , जिसके बाद बार-बार ऊँघना और चौंककर उठना, मानो वह यह जाने बिना कहीं चली जाएगी कि कहाँ जाना है, फिर उसकी चेतना लुप्त होने लगती है, वह अस्पष्ट बोलती है, किसी को नहीं पहचानती और इतनी निर्बल हो जाती है कि स्वयं करवट भी नहीं बदल सकती; इसके बाद तीव्र आक्षेप, साथ में टकटकी लगी दृष्टि, आँखों का विकृत होना, होंठों का फड़कना, जीभ का बाहर लटकना तथा सिर और अंगों का तनना और मुड़ना, जो पंद्रह मिनट तक रहता है , जिसके बाद भयानक गर्जना-जैसी चीख, आँखों से आँसू टपकना और मुँह से झाग आना; इसके बाद पूरे शरीर पर गर्म पसीना, निर्बाध श्वास, ऊँघ और कई घंटों बाद चेतना तथा वाणी की क्रमिक वापसी (छियालीस घंटे बाद), 1।*
  • दोपहर में आलस्य; चलना कष्टकर लगता था (चौदहवाँ दिन), 1।
  • *अत्यधिक निर्बलता का अनुभव; वह सदा लेटे रहना चाहती है, 33।
  • शारीरिक परिश्रम करने की अनिच्छा; बुद्धि मंद-सी लगती है (चौदहवाँ दिन), 12।* [1580.]
  • *अत्यधिक थकावट (सातवाँ दिन), 15a।
  • *अत्यधिक निर्बलता (अट्ठाईस घंटे बाद), 1 ; (चौथा दिन), 18।
  • अत्यधिक निर्बलता के कारण पाँच दिनों तक बिस्तर पर रहने को विवश, 8।*
  • रात में अत्यधिक निर्बलता, यहाँ तक कि मूर्छा-जैसी दशा, 1।*
  • सुबह उठते समय अत्यधिक निर्बलता, 1।*
  • सुबह जागने के बाद अत्यधिक निर्बलता, 1।*
  • खुली हवा में चलते समय लगातार निर्बलता और उनींदापन, यहाँ तक कि घर पहुँचने के लिए उसे जल्दी चलना पड़ा, 1।
  • शाम को चलने के बाद अत्यंत निर्बल और कंपायमान, 1।*
  • इतना निर्बल कि पीड़ा न होते हुए भी चल नहीं सका (चौथा दिन), 1।
  • दोपहर में, भोजन से पहले, इतना निढाल कि उसे लेटना पड़ा, 1। [1590.]
  • शरीर के सभी भागों में इतनी अधिक बेचैनी कि वह न तो स्थिर बैठ सकता है, न लिखना जारी रख सकता है, 1।
  • बहुत देर तक बैठने के बाद शरीर में बेचैनी और सिरदर्द, 1।
  • *भीतरी बेचैनी और उत्तेजना (बयालीसवाँ दिन), 15।
  • आधी रात के बाद बेचैनी, कठिन श्वास और त्वचा के सूखेपन के साथ जागा (नौ दिनों के बाद), 1।
  • *ठंडी हवा के प्रति संवेदनशीलता, 11।
  • *उसे बहुत आसानी से सर्दी लग जाती थी, 9।
  • तूफान के आने से पहले और उसके दौरान अत्यधिक प्रभावित होता है; चलते समय शक्ति चुक जाती है; आगे नहीं बढ़ सकता; सहारा देकर ले जाना पड़ता है; शरीर में भारीपन और गर्मी के साथ अत्यंत निर्बल और उनींदा हो जाता है, 1।
  • *आसानी से सर्दी लग जाती है और खाँसी होती है (ग्यारहवाँ दिन), 1।
  • रात में पूरा शरीर मानो सोया हुआ हो, इस प्रकार अकड़ा हुआ था; साथ में व्यग्रता थी, जिससे वह सो नहीं सकी, 1।
  • रक्त का उफान आसानी से होना और निरंतर उत्तेजना, 1।* [1600.]
  • रात में रक्त का उफान; सभी रक्तवाहिनियों में स्पंदन, 1।*
  • तेज नाड़ी, हृदय-स्पंदन और गर्मी की अनुभूति के साथ जागा , साथ में डकारें और अधिजठर-गर्त में दबाव, जिसके बाद उबकाइयों सहित कड़वे श्लेष्म का वमन हुआ, 1।*
  • पहले जननांगों में अप्रिय संवेदना, जो बाद में धड़ के दोनों पार्श्वों पर, काटने जैसी, कंधों तक और वहाँ से बाँहों में फैलती थी; बाँहों में तनाव था और वे मानो सो गई थीं; यह विश्राम के समय, विशेषकर बैठते और खड़े रहते समय, हर पंद्रह मिनट में होता था, रात में नहीं (चौदह दिनों के बाद), 1।
  • भार उठाने से आसानी से खिंचाव आ जाता है, जिससे अधिजठर-गर्त में चुभनें और रात में बार-बार वमन होता है; प्रायः अधोदर में भी काटने जैसी पीड़ा, साथ में वायु का संचय, 1।
  • रात में पूरे शरीर में कुचले जाने जैसी पीड़ा, मानो वह असुविधाजनक स्थिति में लेटा रहा हो, 1।*
  • *मैथुन के बाद पूरे शरीर में कुचले जाने जैसा अनुभव (तेईस दिनों के बाद), 1।
  • हलचल करने पर सभी मांसपेशियाँ पीड़ित होती हैं, 1।*
  • गर्दन, छाती और सिर, वस्तुतः शरीर के सभी भाग, पीड़ित हैं (चौबीस घंटे बाद), 1।*
  • सुबह पूरे शरीर में पीड़ा; नींद में भी अनुभव होती थी और फिर जागने पर भी (विशेषकर दाहिनी ऊपरी बाँह और बाएँ कंधे में); उठने के बाद बेहतर, 1।*
  • *वह शरीर के जिस पार्श्व पर लेटा है, वह पूरा पार्श्व पीड़ित होता है, मानो उसमें व्रण बन रहा हो; तनिक-सा आवरण हटने पर निरंतर ठंड लगती है, साथ में असहनीय प्यास और सिर में बार-बार गर्मी की लहरें (दो दिनों के बाद), 8। [1610.]
  • हड्डियों में यहाँ-वहाँ तीक्ष्ण पीड़ा, विशेषकर सुबह उठते समय, चलना आरंभ करने से पहले, 7a।
  • ऐसी अनुभूति मानो पूरा शरीर टूट गया हो; निर्बलता के कारण वह तीन दिनों तक बिस्तर से बाहर नहीं रह सकी (तीन दिनों के बाद), 8।*
  • *पूरा शरीर पीड़ित, मानो पीटा गया हो (अड़तालीस घंटे बाद), 1।
  • पूरे शरीर में कुछ पीड़ारहित झटके, 1।
  • कभी-कभी उसे ऐसा लगा मानो वह दो आधे भागों में बँटी हो और बायाँ भाग उसका अपना न हो, 32।
  • कानों, जबड़ों, हाथों और अंतर्जंघास्थियों में खींचने वाली पीड़ा, 1।
  • उसे ऐसा लगा मानो चाकू उसके शरीर में धँसते चले जा रहे हों, 34।
  • शरीर के बाएँ भाग के विभिन्न स्थानों में चुभने वाली पीड़ा, विशेषकर छाती में, गहरी साँस भीतर खींचने से बढ़ती है (तीसरा दिन), 15।*
  • उस पार्श्व में लगातार चुभनों के कारण वह तीन दिनों तक बाईं करवट लेटने में असमर्थ रही (तीन दिनों के बाद), 8।*
  • (बाईं करवट सो सका, जो पहले वह कभी नहीं कर पाता था), (पाँचवाँ दिन), 27। [1620.]
  • *Silicea के अधिकांश लक्षण अमावस्या के समय होते हैं, 1।
  • *हलचल से पीड़ा बढ़ती है, 3।

त्वचा

  • वस्तुगत।
  • *त्वचा के छोटे घाव कठिनाई से भरते हैं और आसानी से पक जाते हैं, 9।
  • बाँहों और हाथों की त्वचा का फटना (सत्रहवाँ दिन), 1।*
  • हाथ के पृष्ठभाग पर एक बर्सा , तीसरी और चौथी मेटाकार्पल अस्थियों के बीच; हाथ मोड़ने पर मोच-जैसी अनुभूति और उसे हिलाने पर कुचले-जैसा दर्द (तेरहवाँ दिन), 1।*
  • दूसरी और तीसरी मेटाकार्पल अस्थियों के बीच एक बर्सा (पहला दिन), 1।
  • शुष्क उद्भेद।
  • चेहरे और गर्दन पर छोटी सफेद शल्कों से बना उद्भेद, जिसके बाद महीन त्वचा-उच्छलन होता है और कुछ खुजली रहती है, 15b।
  • चेहरे पर उद्भेद, 1।
  • छाती पर मटर जितने बड़े, कुछ उभरे हुए लाल धब्बों का उद्भेद, साथ में कुछ काटने-जैसा दर्द (नौवाँ और दसवाँ दिन), 19।
  • थोड़े-से परिश्रम से, विशेषकर भोजन के बाद, जलनयुक्त दर्द के साथ गालों पर लाल धब्बे और नाक लाल, 1। [1630.]
  • चेहरे पर सफेद और लाल धब्बे, 32।
  • एक लाल, अत्यंत संवेदनशील, जलन-चुभन वाला धब्बा , जो दो दिन तक रहता है, दाईं टिबिया पर, 1।*
  • समय-समय पर गालों पर सफेद धब्बे, 1।
  • उरोस्थि पर खुजलीदार चकत्ता, 1।
  • ठोड़ी पर लाल, खुजलीदार दाद, 9।
  • नितंबों की दरार के ऊपर, पुच्छास्थि पर उभरे हुए पपड़ीदार धब्बे, 9।*
  • उँगलियों पर घमौरियाँ, साथ में रेंगने-जैसी खुजली, 4।
  • जाँघों पर काटने-जैसी अनुभूति; लाल परिवलय वाले चकत्तों का उद्भेद, साथ में खुजली, जो शाम को अधिक और बिस्तर में उससे भी अधिक होती है (तेईसवाँ दिन), 19।
  • पिंडलियों पर खुजलीदार चकत्ता, 1।
  • माथे और नाक के आर-पार पिटिकामय उद्भेद, 1। [1640.]
  • भौंह पर एक फुंसी, 1।
  • दोपहर बाद नाक के बाईं ओर खुजलीदार फुंसियाँ (पाँचवाँ दिन), 8।
  • नाक पर पिटिकामय उद्भेद, 1।
  • ऊपरी होंठ पर दो बड़ी फुंसियाँ, 1।
  • मुँह के दाएँ बाहरी कोने पर एक फुंसी, जो केवल स्पर्श से महसूस होती है, साथ में व्रण-जैसी पीड़ा (छठा दिन), 8।
  • ठोड़ी पर पिटिकामय उद्भेद, 1।
  • गर्दन के पिछले भाग पर पिटिकामय उद्भेद, 1।
  • गर्दन के पिछले भाग पर पित्ती-जैसी खुजलीदार फुंसियाँ (नौ दिन बाद), 1।*
  • मध्यमा उँगली के पहले जोड़ की भीतरी सतह पर अत्यंत पीड़ादायक फुंसियाँ, मानो गैंग्लियन बन रहा हो (छह दिन बाद), जो आठ दिन बाद गायब हो जाती हैं, 28।
  • आर्द्र उद्भेद।
  • नासापंखों के आसपास खुजली और छोटी जलस्फोटिकाएँ, 3। [1650.]
  • नथुनों के नीचे लाल परिवलय वाली, दर्दरहित जलस्फोटिकाएँ, 4।
  • नाक पर पपड़ियों वाली लाल जलस्फोटिकाएँ, 3।
  • अग्रबाहु पर लाल आधार पर मटर के आकार की बहुत-सी कठोर जलस्फोटिकाएँ, साथ में जलनयुक्त खुजली, जो केवल एक रात रहती हैं (कलाई से कोहनी तक), 1।
  • तर्जनी की एक छोटी दरार में जलन और दर्द होने लगता है; वहाँ से कलाई के ऊपर तक फैली एक लसीका-वाहिनी में सूजन हो जाती है और दुखते स्थान पर एक क्षरणकारी जलस्फोटिका बनती है, साथ में जलन तथा दबाव और चुभन-जैसी पीड़ाएँ, 1।*
  • होंठों पर उद्भेद; ऊपरी होंठ के किनारे पर छाले, जिन्हें छूने पर महीन चुभन या जलन-चुभन वाला दर्द होता है, 1।*
  • बाईं तर्जनी के पहले जोड़ पर तीव्र खुजली वाला एक क्षरणकारी छाला, 1।*
  • पूयिकामय उद्भेद।
  • *माथे, पश्चकपाल, उरोस्थि और मेरुदंड पर चेचक-जैसी पूयिकाएँ; वे अत्यंत पीड़ादायक होती हैं और अंततः पककर पूयस्रावी व्रण बना देती हैं, 7।
  • पूरे शरीर पर वैरिओलॉइड-जैसा उद्भेद, जिसके पहले, उसके साथ और उसके बाद तीव्र खुजली होती है, 1।
  • हाथ के पृष्ठभाग पर एक पूयिका, 1।*
  • *शरीर के विभिन्न भागों पर कई फोड़े निकलते हैं, 35। [1660.]
  • गाल पर नाक के पास एक बड़ा, किंतु थोड़ा पीड़ादायक फोड़ा (कुछ घंटों बाद), 1।*
  • ठोड़ी पर एक फोड़ा, जिसे छूने पर चुभनयुक्त दर्द होता है, 1।*
  • *गर्दन के पिछले भाग पर एक फोड़ा, 1।
  • बाँहों पर बहुत-से फोड़े, जिनमें कुछ बहुत बड़े भी हैं, 1।*
  • *जाँघों के पिछले भागों पर कुछ फोड़े, 1।
  • पिंडलियों पर फोड़े, 1।*
  • *नाखूनों के आसपास बार-बार व्रण, 1, 7।
  • *एड़ी पर तीव्र खुजली वाला एक बड़ा क्षरणकारी व्रण, 1।
  • कानों के पीछे पपड़ियाँ, 1।*
  • *नाक के मध्यपट के नीचे दुखती, पीड़ादायक पपड़ियाँ, जिन्हें छूने पर चुभनयुक्त दर्द होता है, 1। [1670.]
  • *पैर की उन उँगलियों पर खुजलीदार, पूयस्रावी पपड़ियाँ जिन्हें शीतदंश हुआ था, 1।
  • अनुभूतिगत।
  • टाँग के व्रण में हर रात दर्द, 1।*
  • टाँग के एक व्रण में दबाव-जैसा दर्द, 1।
  • एक व्रण में ऐसा दर्द, मानो वह पक रहा हो, 1।*
  • *टाँग के व्रणयुक्त भाग में दबाव और चुभन-जैसा दर्द, 1।
  • अंसफलक के ऊपर की त्वचा में फड़कन, 1।
  • *टाँग के एक व्रण में और उसके आसपास चुभन और जलन, 1।
  • दाईं ऊपरी बाँह की पिछली सतह की त्वचा में फाड़ता हुआ दर्द और उसी समय बाईं पिंडली में भी वैसा ही दर्द (चौथा दिन), 8।
  • *टाँग के एक व्रण में चुभन, 1।
  • त्वचा में इधर-उधर पिस्सू के काटने जैसी चुभनें, 1। [1680.]
  • सामान्यतः दर्दरहित व्रणों में जलन-चुभन, 1।
  • शरीर के विभिन्न भागों में सुई चुभने और झुनझुनी की अनुभूति, 29।
  • शरीर के कई भागों में अचानक पिस्सुओं के रेंगने जैसी अनुभूतियाँ, जो अलग-अलग बिंदुओं पर स्थिर हो जाती हैं, जहाँ अत्यंत असहनीय खुजली होती है; यह पूरे दिन रहती है, किंतु विशेषकर शाम को कपड़े उतारते समय, 9।
  • बाँहों, चेहरे और गर्दन की त्वचा में खुजली और सुई चुभने-जैसी अनुभूति, 32।
  • शरीर के विभिन्न भागों में खुजली और चुभन, विशेषकर रात में, 3।*
  • पूरे शरीर और सिर में रेंगने-जैसी खुजली, 1।
  • लेटने के बाद पंद्रह मिनट तक पूरे शरीर में खुजली और काटने-जैसी अनुभूति, जो खुजलाने से कम नहीं होती (पहला दिन), 8।
  • माथे पर तीव्र खुजली, जो नीचे नाक तक फैलती है, 1।
  • बाहरी कानों में खुजली, 1।*
  • दाढ़ी वाले भाग में खुजली, 1। [1690.]
  • शाम को नाक के आसपास सुखद अनुभूति वाली ऐसी खुजली, जो लगातार रगड़ने को विवश करती है (तीसरा दिन), 8।*
  • नाक में खुजली, 1।*
  • मुँह के आसपास जलनयुक्त खुजली, बिना किसी उद्भेद के (दो दिन बाद), 1।*
  • पीठ, अंसफलकों और जाँघों पर खुजली, 1।
  • पीठ पर खुजली, 1।*
  • बाईं हथेली की त्वचा के नीचे तीव्र खुजली, 1।
  • बाएँ निचले अंग में बहुत अधिक खुजली, 1।
  • नितंबों पर खुजली, 1।*
  • जाँघों की भीतरी सतहों पर खुजली, 3।
  • टाँगों पर खुजली, 1।*

निद्रा

  • उनींदापन। [1700.]
  • बहुत जम्हाइयाँ, 1।
  • तीव्र डकारों के साथ जम्हाई लेने की प्रवृत्ति, 19a।
  • उनींदापन, 13 ; (इक्कीसवाँ दिन), 26।
  • बार-बार जम्हाई आने के साथ उनींदापन (सातवाँ दिन), 18a।
  • शाम को उनींदी और थकी हुई (दसवाँ दिन); शाम को बहुत उनींदी (ग्यारहवाँ दिन); उनींदापन बढ़ा हुआ (ग्यारहवें से तेरहवें दिन तक), 27।
  • शाम 7 बजे बहुत उनींदी; लगभग 8 बजे उसे लेटना पड़ा और वह बहुत अच्छी तरह सोई (पहला दिन), 8।
  • अपराह्न 2 से 5 बजे तक बहुत उनींदी (पहला दिन), 12।
  • अपराह्न 1 से 9 बजे तक बहुत उनींदी (पाँचवाँ दिन), 12।
  • खाने के बाद बहुत उनींदी, और कमजोर; उसे सोना पड़ता है, 1।*
  • दिन में अत्यधिक उनींदापन, उसे दोपहर के भोजन से पहले भी सोना पड़ा, 1। [1710.]
  • शाम को अत्यधिक उनींदापन (बीस दिनों के बाद), 1।*
  • शाम को बहुत जल्दी ही अत्यधिक उनींदापन, 1।
  • अत्यधिक उनींदापन, 21 ; (चौदहवाँ दिन), 12।
  • पूरे दिन अत्यधिक उनींदापन, 19a।
  • पूर्वाह्न में अत्यंत प्रबल, वश में न आने वाला उनींदापन (छब्बीसवाँ दिन), 25।
  • अपराह्न में गहरी, लंबी नींद, जिसके बाद कमजोरी (पाँच दिनों के बाद), 1।
  • (सामान्य से बेहतर नींद), (पहली रात), 27।
  • आधी रात के बाद नींद में लगातार जोर से हँसना, 1।
  • नींद में बार-बार बातें करना, 1।
  • नींद में बिस्तर से उठने का प्रयास करता है, 1। [1720.]
  • दोपहर की नींद में चौंककर उठना (बारहवाँ दिन), 1।
  • रात में स्वप्नों के बिना सोते समय आधे घंटे तक शरीर का झटके से ऊपर उठना (चार दिनों के बाद), 1।
  • वह सोते हुए खड़ी हो जाती है, कुर्सी, मेज और पियानो के ऊपर से चढ़कर निकलती है, और फिर इसके बारे में कुछ भी जाने बिना बिस्तर पर लेट जाती है, 1।
  • सिर की ओर बार-बार रक्त के वेग से चढ़ने के साथ नींद में झटके लगना और चौंकना, 32।
  • अनिद्रा।
  • *बेचैन नींद (पाँचवाँ और सोलहवाँ दिन), 15 ; (पंद्रहवाँ दिन), 22 ; (सैंतालीसवाँ दिन), 23।
  • रात में नींद का बार-बार टूटना (सातवाँ दिन), 15।
  • उदर में काटने जैसे दर्द, जो केवल थोड़े समय के लिए रुकते हैं, के कारण रात अत्यंत बेचैनी में बीती (तीन दिनों के बाद), 8।
  • लड़का रात में बेचैन रहता है और चीख उठता है, 1।
  • ठिठुरन के साथ बेचैन नींद और बार-बार जागना, 1।*
  • असहज नींद, बार-बार जागना और एक के ऊपर एक उमड़ते अनेक सपने, 4।* [1730.]
  • दर्द के बिना बेचैन नींद, 1।*
  • वह बेचैनी से सोई, चौंककर उठी और नींद में बातें कीं, 1।
  • व्यग्रतापूर्ण सपनों के साथ बेचैन रात (चौदहवाँ दिन), 25।
  • रात 2 बजे जागा और विचारों के उमड़ने के कारण फिर सो नहीं सका, 4।*
  • वह बहुत बार जागा और बिना सपना देखे चौंककर उठ बैठा, 1।
  • बेचैनी और ठिठुरन के साथ बार-बार जागना, यद्यपि कोई सपने नहीं थे, 1।
  • बार-बार जागा और आधी रात के बाद फिर बिल्कुल नहीं सो सका, 1।
  • वह लगभग रात 11 बजे, डेढ़ घंटे की नींद के बाद जागा और फिर कई रातों तक दोबारा सो गया, 4।
  • वह आधी रात के बाद अक्सर जागता था और लगभग 2 या 3 बजे सोने पर कल्पनाओं में डूब जाता था, 1।
  • लगभग प्रातः 3 बजे व्यग्रतापूर्वक जागना, 1। [1740.]
  • रात में बार-बार जागना; और अभी फिर से नींद आई ही थी कि उसने अपने व्यवसाय के सपने देखे, 4।
  • वह प्रातः 2 बजे जागी और फिर सो नहीं सकी (सात दिनों के बाद), 8।
  • सुबह सामान्य से पहले जागा (उनतीसवाँ दिन), 25।
  • लड़का रात में तीव्र रूप से रोते हुए जागता है, अपने होश सँभाल नहीं पाता, व्यग्रतापूर्वक रोता है और बुदबुदाता है, 1।
  • रात में बार-बार चौंककर उठना, 1।
  • शाम को सो जाने के बाद सारा शरीर भय से चौंक उठता है और वह जाग जाता है, 1।
  • रात में नींद से चौंककर जागना, साथ में पूरे शरीर में कंपन, 1।*
  • भय से बार-बार चौंककर उठना, साथ में अपराह्न में उनींदापन, 1।*
  • नींद आने में कठिनाई (पंद्रहवाँ दिन), 13।
  • आधी रात से पहले सोने में असमर्थ (सातवाँ दिन), 18a। [1750.]
  • विचारों के उमड़ने के कारण डेढ़ घंटे तक सोने में असमर्थ, दो शामों को (सात दिनों के बाद), 1।
  • अपराह्न में सोने में असमर्थता; नाक इतनी अधिक बंद थी कि साँस नहीं ले सकता था (बारहवाँ दिन), 19।
  • सुबह होने के निकट तक सोने में असमर्थता (आठवाँ दिन), 19।
  • अत्यधिक अनिद्रा, 34, 29।*
  • आठ या दस दिनों तक नींद का पूर्ण अभाव, दर्द समाप्त हो जाने के बाद भी (दो दिनों के बाद), 8।
  • वह सारी रात पूरी तरह जागी पड़ी रही; उसकी आँखों में नींद नहीं आई, 1।
  • वह सारी रात बिना सोए पड़ी रही, केवल अद्भुत कल्पनाओं और तंद्रालीन विचारों में डूबी हुई, 1।
  • आठ से दस दिनों तक नींद का पूर्ण अभाव, 1।
  • रात में नींद का अभाव, 1।*
  • सपने।
  • रात में बहुत अधिक सपने देखना और नींद में चीखना, 1।* [1760.]
  • कई रातों तक बेचैन करने वाले सपने, यहाँ तक कि नींद में जोर-जोर से बातें करना, 23।*
  • वह हत्याओं तथा उसी प्रकार की भयानक बातों के सपने देखती है, 32।
  • भूकंपों और भयावह तूफानों, आग आदि के सपने (दसवाँ दिन), 16।
  • अत्यधिक व्यग्रता के साथ बाढ़ का सपना, 13।
  • रात के पहले भाग में भयावह सपने, 1।
  • *भयावह सपने (बारहवाँ दिन), 12।
  • आधी रात के बाद एक भूत के पीछा करने का सपना (तेरह दिनों के बाद), 1।
  • सपना कि उसे अवश्य मरना है, 3।
  • आधे जागे रहते हुए दुःस्वप्न, अत्यधिक व्यग्रता के साथ, मानो एक हंड्रेडवेट भारी धुएँ-जैसा पशु उसके ऊपर पड़ा हो, जिससे वह न तो हिल सकता था, न जोर से आवाज निकाल सकता था, 1।
  • एक प्रकार का निद्राचारी सपना; उसने अत्यंत सजीव रूप में बहुत दूर के ऐसे प्रदेश देखे जिन्हें उसने वास्तव में कभी नहीं देखा था, और ऐसी वस्तुएँ देखीं जिन्हें पाने की उसने इच्छा की थी (आठ दिनों के बाद), 1। [1770.]
  • रात में उलझे हुए सपने और बार-बार बेचैनी से जागना, 1।*
  • दिन में हुई या सुनी हुई हर बात के उलझे हुए सपने, 1।
  • रात में इतिहास-संबंधी और प्रणयपूर्ण अनेक सपने, 1।
  • लुटेरों और हत्यारों के सपने, जिनके दौरान वह जाग गया और बोला कि वह उन्हें पकड़ लेगा, 1।
  • घिनौने और आपत्तिजनक सपने, 4।
  • झगड़ों और अपमान से भरे सपने (चार दिनों के बाद), 1।
  • रात में बहुत सपने देखता और प्रलाप करता है, उठकर खड़ा हो जाता है और लंबे समय तक यह जाने बिना कमरे में घूमता रहता है कि वह कहाँ है, 1।
  • तंद्रालीन कल्पनाओं से भरे सपने; वह निद्राचारी की तरह बिस्तर से बाहर निकलता है, 1।
  • सोते ही सपने और तंद्रालीन कल्पनाएँ, 1।*
  • अर्ध-जाग्रत सपना, मानो उसके चारों ओर अनेक भूत हों; वह जाग गया और कोई अंग नहीं हिला सका, बल्कि पसीने में पड़ा रहा, साथ में अत्यधिक व्यग्रता और धड़कन, जिसके बाद बहुत अधिक भयभीतता रही (बारह दिनों के बाद), 1। [1780.]
  • अपने बचपन की घटनाओं के सपने, 4।
  • *अपनी युवावस्था के सपने, जो उसे नींद से जगा देते थे और इतने सजीव थे कि जागने पर वह बड़ी कठिनाई से स्वयं को उनके प्रभाव से मुक्त कर पाता था, 4।
  • बीती घटनाओं के सजीव सपने, 4।*
  • दिन की घटनाओं तथा उसका पीछा करने वाले बड़े कुत्तों के सपने, 4।
  • दूर की यात्राओं के अनेक सपने, 9।
  • सपने में उसे लगता है कि उसे मिरगी का दौरा पड़ा है और उसका सिर एक ओर खिंचा हुआ है (तेरह दिनों के बाद), 1।
  • क्रूरता से भरे सपने, किंतु क्रोध के बिना, 1।
  • खीझ उत्पन्न करने वाले सपने, 1।
  • सोते ही भयावह कल्पनाएँ; भय से भरी नींद और जोर से चीखना, 1।*
  • बुरे सपने, साथ में जोर-जोर से रोना, 1, 3।* [1790.]
  • अपनी हत्या किए जाने का सपना, जिससे वह अत्यधिक व्यग्रता के साथ जागा, मानो उसका दम घुट जाएगा, और बोल नहीं सका (पंद्रह दिनों के बाद), 1।
  • रात में असंबद्ध सपने (दूसरी रात), 2।
  • रात की कल्पनाओं के दौरान उसे अपना सिर अत्यधिक बड़ा प्रतीत हुआ, 1।
  • किसी के उसकी एक उँगली पकड़ लेने का सपना, जिससे वह भयभीत होकर जाग गया, 1।
  • पीछा किए जाने का व्यग्रतापूर्ण सपना, 1।
  • साँपों के व्यग्रतापूर्ण सपने (पाँच दिनों के बाद), 1।
  • व्यग्रतापूर्ण सपना कि उसने हत्या की है और उसे पकड़ लिया गया है, 1।
  • किसी के उसका गला घोंटने के व्यग्रतापूर्ण सपने; वह चीख नहीं सकी, केवल पैरों से लात मार सकी, 1।*
  • डूबने का व्यग्रतापूर्ण सपना, 1।
  • लुटेरों का व्यग्रतापूर्ण सपना, जिनसे वह लड़ा; वह शरीर में गर्मी, व्यग्रतापूर्ण घुटन और पसीने के साथ जागा, 1। [1800.]
  • विवाह के प्रणयपूर्ण सपने, 1।
  • अत्यधिक कामेच्छा के साथ कामुक सपने (तेरह दिनों के बाद), 1।
  • स्वप्नदोष के साथ कामुक सपने (दूसरी रात), 1।*
  • कामुक सपने (पाँचवीं रात), 1।
  • शाम और सुबह बिस्तर में, लिंगोत्थान के साथ कामुक सपने, 4।
  • संभोग के दौरान बाधा डाले जाने के कामुक सपने; लिंगोत्थान और कामुक कल्पना के साथ जागना (छह घंटे के बाद), 1।
  • कामुक सपने, जो उसे अत्यंत आपत्तिजनक लगे, 1।
  • वह सामान्य से कम सपने देखता है, 4।

ज्वर

  • ठिठुरन।
  • तीव्र ठिठुरन, विशेषतः कंधों में, शाम को, 3।
  • *दिनभर बहुत अधिक ठिठुरन, 1। [1810.]
  • गर्म कमरे में भी बहुत ठिठुरन, प्यास के बिना, पूरे पूर्वाह्न (तीसरा दिन), 8।
  • खाने के बाद ठिठुरन (चौबीसवाँ दिन), 1।
  • शाम को लगातार ठिठुरन, जो बाहर से भी स्पष्ट दिखाई देती थी, 3।
  • लगातार आंतरिक ठिठुरन, भूख न लगने के साथ, 1।
  • लगातार ठिठुरन, बीच-बीच में हल्की ज्वरग्रस्तता के साथ, 29।
  • रात में ठंड लग जाने से लगातार आंतरिक ठिठुरन, भूख न लगने और चुभते-जलते सिरदर्द के साथ, 1।*
  • *हर गतिविधि पर ठिठुरन, दिनभर; सुबह अत्यधिक थकावट, यहाँ तक कि नींद आ जाने तक, 1।
  • रात में अधजगी अवस्था में ठिठुरन , नींद खुले बिना, 1।*
  • ज्वरजन्य ठिठुरन, जो रात 8.30 बजे तक रही (उन्नीसवाँ दिन), 12।
  • ज्वरजन्य ठिठुरन, 13। [1820.]
  • सामान्य ज्वरग्रस्त अवस्था; शाम को ठिठुरन (नौवाँ दिन); दिन के समय (दसवाँ दिन); शाम को (ग्यारहवाँ दिन), 27।
  • कई दिनों तक तीव्र, निरंतर आंतरिक ठिठुरन, 1।*
  • खाने के बाद उनींदेपन के साथ ठिठुरन (तेरहवाँ दिन), 14।
  • *शाम को ठिठुरन (नौवाँ दिन); दिनभर (दसवाँ दिन), 27।
  • ठिठुरन की सामान्य अनुभूति, 38।
  • ठिठुरन, चुभते दर्द के साथ, 1।
  • *अपराह्न में ठिठुरन की कष्टदायक अनुभूति, विशेषतः बाँहों पर, गर्म कमरे में, 1।
  • गर्म कमरे में चलते समय भी ठिठुरन, और खुली हवा में इतनी तीव्र कि वह काँपने लगा (बत्तीस घंटे बाद), 1।*
  • *उसे गर्म कमरे में भी बहुत ठिठुरन महसूस होती है, 29।
  • *शाम को बिस्तर में ऐंठन-जैसी ठिठुरन, जिससे वह सिहर उठा (चौदहवाँ दिन), 1। [1830.]
  • रात में और अगले दिन, इसके बाद होने वाली ठिठुरन के कारण वह बिस्तर से अपना हाथ बाहर निकालने का साहस नहीं करती थी (तीन दिन बाद), 8।*
  • दिन में बार-बार ठिठुरन और गर्मी का बारी-बारी से आना, 1।
  • कभी बहुत अधिक ठिठुरन, फिर अत्यधिक गर्मी, 32।
  • शाम 5 बजे कंपकंपी के साथ ठिठुरन ., थोड़ी रोटी और बीयर के बाद (सातवाँ दिन), 18a।*
  • कंपकंपी के साथ ठिठुरन; उसे लेटना पड़ा और शाम 6 बजे बिस्तर में भी बहुत देर तक गर्माहट नहीं आई . (तीसरा दिन), 8।*
  • बर्फ-जैसी ठंडी सिहरन बार-बार पूरे शरीर पर रेंगती है, 1।*
  • दिन में बार-बार आधे घंटे तक सिहरन, जिसके बाद कुछ गर्मी, मुख्यतः सिर और चेहरे में, 1।
  • पूरे शरीर में सिहरन; ठंडा, भूखा और ठिठुरा हुआ-सा अनुभव; आग के चाहे जितना निकट बैठता, फिर भी गर्म नहीं हो पाता, 42।
  • पूरे शरीर में बर्फ-जैसी ठंडक की अनुभूति, मानो अचानक किसी शीत जलवायु के संपर्क में आ गया हो, 33।
  • रात में अत्यधिक भूख के साथ ठंडक (पंद्रहवाँ दिन), 27। [1840.]
  • सिर के शीर्ष के आर-पार, लगभग दो अंगुल चौड़ी पट्टी में, दोनों कानों के अग्रभाग की सीध में विचित्र ठंडक, 32।
  • नाक बर्फ-जैसी ठंडी हो गई, 32।
  • पूरी पीठ के नीचे तक ठिठुरन, 32।
  • पीठ में ठिठुरन, 1।
  • पहले पीठ के नीचे की ओर जाती ठिठुरन, बर्फ-जैसे ठंडे हाथों के साथ, जिसके बाद तीव्र गर्मी और उदर में तनाव, 1।
  • एक कंधे में सिहरन (तेरहवाँ दिन), 25।
  • खुली हवा में चलने के बाद घुटनों और बाँहों में ठंडक; हाथों के नाखून सफेद हो जाते हैं, 1।
  • शाम को टाँगें घुटनों तक और पैर बर्फ-जैसे ठंडे होते हैं, और उन्हें गर्म होने में आधा घंटा लगने के कारण उसे बिस्तर में लेटना पड़ता है; ऐसा लगातार कई दिनों तक होता है, 1।*
  • *गर्म कमरे में टाँगों में घुटनों तक ठंडक, 1।
  • दिन के समय पैर बर्फ-जैसे ठंडे; किंतु रात में बिस्तर पर पैरों और हाथों में जलती गर्मी, पैरों में घुटनों तक खिंचता दर्द, 1। [1850.]
  • *शाम को, बिस्तर में भी, पैर बर्फ-जैसे ठंडे, 4।
  • *मासिक धर्म के दौरान पैर बर्फ-जैसे ठंडे, 1।
  • *पैरों में बर्फ-जैसी ठंडक, 40।
  • दिनभर पैर ठंडे, 4।*
  • शाम को बिस्तर में पैर ठंडे, जिससे नींद नहीं आती, 1।
  • पैर ठंडे, जो हर दिन रात में गर्म हो जाते हैं, 1।
  • चलना आरंभ करते समय पैर ठंडे होते हैं, 1।
  • गर्मी।
  • सुबह 11 बजे अत्यधिक ठिठुरन के साथ ज्वर (पंद्रहवाँ दिन), 12।
  • शाम 7.30 बजे तक रहने वाला ज्वर, जिसके बाद सभी अंग पक्षाघातग्रस्त-जैसे लगते हैं (बीसवाँ दिन), 42।
  • *ज्वर, सिर में तीव्र गर्मी, चेहरे की गहरी लालिमा और प्यास के साथ, लगातार चार दिन, दोपहर से शाम तक; गर्मी से आधा घंटा पहले सिरदर्द आरंभ हुआ, 1। [1860.]
  • Silicea के आंतरायिक ज्वर में पसीना कम आता है; यह प्रायः सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक, अथवा मध्यरात्रि से सुबह 8 बजे तक होता है, 7।
  • शाम को लेटने के बाद ज्वर, तीव्र ठिठुरन, इतनी कि वह बिस्तर में भी गर्म न हो सकी, और उससे आमाशय में दर्द (सोलह घंटे बाद), 1।
  • शाम को ज्वर का दौरा ; पूरे शरीर में गर्मी, जिसके बाद पसीना नहीं आया, 1।*
  • अपराह्न में ज्वर के दौरे, जिनमें केवल गर्मी और भयावह प्यास थी तथा श्वास बहुत छोटी थी, 7।
  • *पूरी रात ज्वर की गर्मी, तीव्र प्यास और अटकती हुई श्वास के साथ, 7।
  • ज्वर के दौरान एक बच्चे के पूरे शरीर में जलती गर्मी, लाल और फूले हुए चेहरे के साथ; गले के चारों ओर और कंधों की ओर नीचे तक ग्रंथियाँ मटर-जैसी कठोर; साथ में उदर का फूलना और निरंतर अतिसार, 7।
  • कई शामों तक शुष्क गर्मी और प्यास, जिसके बाद उदर और सिर में दर्द, 1।
  • प्यास के बिना गर्मी (बाईसवाँ दिन), 1।
  • दिन के समय बार-बार क्षणिक गर्म लहरें, 1।
  • दो दिनों तक पूरे शरीर में अप्रिय न लगने वाली गर्माहट, 1। [1870.]
  • बहुत अधिक गर्मी, 3।
  • शाम को सिर में गर्मी, मानो मुँह से आग की लपटें निकल रही हों (छब्बीसवाँ दिन), 26।
  • सिर में गर्मी, व्यग्रता के साथ, 1।
  • *सिर में गर्मी, 1 ; (पाँचवाँ और छठा दिन), 18।
  • कई शामों को चेहरे और कानों की पालियों में गर्मी, 1।
  • चेहरे और पूरे शरीर में बार-बार गर्म लहरें, जिनके बाद पसीना आता है, विश्राम के समय भी; फिर तनिक-सी गतिविधि पर वह पसीने से तर हो जाती है, 1।*
  • चेहरे पर अत्यधिक गर्मी और लालिमा, हाथ और पैर बहुत ठंडे होने के साथ, 1।
  • खाने के बाद चेहरे में अत्यधिक गर्मी, 1।
  • ठंडे पानी से धोने के बाद चेहरे में दो घंटे तक गर्मी और जलन, 1।
  • सुबह गालों और हथेलियों में गर्मी, 1। [1880.]
  • कानों की पालियों और सिर में गर्मी (आठ दिन बाद), 1।
  • पसीना।
  • बहुत अधिक पसीना, 33।
  • पूरे शरीर पर पसीना (छठा दिन), 18।
  • *रात में पूरे शरीर पर पसीना (छठी रात), 27।
  • रात में प्रचुर, टपकता हुआ पसीना, विशेषतः कटि-प्रदेश पर, 4।*
  • *हर रात भोर के निकट प्रचुर पसीना, 1।
  • *पूरे शरीर पर रात में प्रचुर पसीना, 4।
  • *हर रात प्रचुर पसीना, भूख न लगने और अत्यधिक दुर्बलता के साथ, मानो वह क्षयग्रस्त हो जाएगा, 1।
  • *रात में बिस्तर पर पूरे शरीर में पसीना, 4।
  • *रात का पसीना, विशेषतः धड़ पर, 4। [1890.]
  • *हर रात बिस्तर पर पूरे शरीर में पसीना (आरंभिक रातें), 1।
  • रात-दिन अत्यधिक पसीना, 36।
  • सुबह पसीना, 1।*
  • खाते और बात करते समय पसीना, 1।
  • *तीव्र गंध वाला पसीना, 1।
  • *सिर पर पसीना (सातवाँ दिन), 18।
  • *केवल सिर पर पसीना, जो चेहरे से नीचे बहता है, 7।
  • हर रात छाती पर पसीना, 1।
  • पसीना पहले रीढ़ के दोनों ओर प्रकट हुआ, फिर शरीर का पूरा ऊपरी भाग गर्म हो गया, तत्पश्चात चेहरे पर, विशेषतः माथे पर, पसीना निकल आया (सातवाँ दिन), 18a।
  • शाम को अंडकोश पर पसीना, 1।* [1900.]
  • अंडकोश पर पसीना; उसमें सर्वत्र खुजली होती है, 1।*
  • हाथों पर प्रचुर पसीना, 1।*
  • *तलवों और पैर की उँगलियों के बीच दुर्गंधयुक्त पसीना; चलने पर ये भाग अत्यंत पीड़ायुक्त हो जाते हैं, 1।
  • *पैरों पर दुर्गंधयुक्त पसीना, 1।

अवस्थाएँ

  • वृद्धि।
  • ( सुबह ), रोना; भूलना और चक्कर; उठने पर, सिर घूमना; चक्कर और घूमने की अनुभूति; बिस्तर से उठने पर, लड़खड़ाना; दबाने-जैसा सिरदर्द; उठने के बाद, माथे में सिरदर्द; माथे में चुभन और धड़कन; पश्चकपाल और गर्दन के पिछले भाग में दबाव; आँखों में दर्द; आँखें चिपकना; आँखों के कोनों में काटने-सी जलन; जागने पर, शुष्क नजला; दाँत-दर्द; मुँह से दुर्गंध; कड़वा स्वाद; रक्त का स्वाद, बुरा स्वाद; अत्यधिक भूख; खट्टी, कड़वी डकारें; मतली और मिचली; अधिजठर-गर्त में मरोड़ आदि; उदर में दबाव; स्वरभंग; धोने के बाद, खाँसी; खाँसी; श्वासकष्ट; उदर में दबाव; स्वरभंग; अंसफलक पर दबाव; पैरों में सूजन; उठने पर, हड्डियों में दर्द।
  • ( पूर्वाह्न ), मन का भटकाव; सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक, ज्वर।
  • ( अपराह्न ), दोपहर 3 से रात 9 बजे तक, सिरदर्द; सिर में फाड़ता और चुभता दर्द; माथे में धड़कता सिरदर्द; मरोड़दार उदरशूल; ज्वर।
  • ( शाम ), बैठते और खड़े रहते समय, सिर घूमना; सिर में आर-पार झटके; माथे में सिरदर्द; खट्टी डकारें; मलाशय में खुजली; लेटने के बाद, खाँसी; बिस्तर में, टाँगों और बाँहों में काटने-सी जलन; ठिठुरन; ठंडे पैर।
  • ( रात ), सिर की ओर रक्त का वेग; सिरदर्द; दबाने-जैसा सिरदर्द; आँखें चिपकना; दाँत-दर्द; गले में खुरदरापन और खुरचने की अनुभूति; निचले उदर में दर्द; वृषणों में दर्द; खाँसी; अंसफलकों के बीच खिंचाव; पसीना।
  • ( ठंडी हवा ), दाँतों में सुई चुभने-जैसा दर्द।
  • ( गहरी साँस लेने पर ), छाती में सुई चुभने-जैसा दर्द; बाईं पसलियों के नीचे दर्द; चुभते दर्द।
  • ( खाते समय ), दाँत-दर्द।
  • ( खाने के बाद ), सुनने में कठिनाई; उदर में दर्द; उदर में दबाव; खाँसी; छाती में जकड़न।
  • ( बाईं करवट लेटने पर ), सिर घूमना।
  • ( मासिक धर्म के दौरान ), अधिजठर-गर्त में व्यग्रता; ठंडे पैर।
  • ( अमावस्या पर ), अधिकांश लक्षण।
  • ( गतिविधि ), माथे में फाड़ता सिरदर्द; सिर के अग्रभाग में दर्द; कनपटियों में दर्द; सिर के बाएँ भाग में दर्द; पसलियों के नीचे के प्रदेशों के आर-पार दर्द; बाईं बाँह में अकड़न; दर्द।
  • ( दबाव ), सिर के बाएँ भाग में दर्द।
  • ( विचार करने पर ), सिर घूमना।
  • ( विश्राम ), सिर घूमना; अंसफलकों पर दबाव।
  • ( उठने पर ), सिर घूमना।
  • ( बैठने पर ), सिर घूमना; माथे में सिरदर्द; पीठ में अकड़न; घुटनों में फाड़ता दर्द; टाँगों में फाड़ता दर्द।
  • ( खड़े रहने पर ), हृदय की धड़कन; पैरों में दर्द।
  • ( झुकने पर ), सिर घूमना, माथे में सिरदर्द; कनपटियों में दर्द; नाक से रक्तस्राव; पीठ के निचले भाग में दर्द; बाएँ कूल्हे में दर्द।
  • ( तूफान ), अत्यधिक थकावट।
  • ( निगलने पर ), कान में चटचटाहट।
  • ( बात करने पर ), माथे में सिरदर्द।
  • ( अचानक मुड़ने पर ), माथे में सिरदर्द।
  • ( मूत्रत्याग करते समय ), मूत्रमार्ग में काटता दर्द, जलन और तीखी चुभन।
  • ( जागने पर ), व्यग्रता।
  • ( चलने पर ), सिर घूमना; सिर में नोचने-जैसा दर्द; माथे में सिरदर्द; उदर के बाएँ भाग में चुभता दर्द; मलाशय में सुई चुभने-जैसा दर्द; छाती में जकड़न; पैरों में दर्द; पैरों में फाड़ता दर्द।
  • ( खुली हवा में चलते समय ), मतली; आमाशय में दबाव; उदर में मरोड़; हाथ-पैरों में भारीपन।
  • ( गर्मी ), टाँगों में दर्द।
  • शमन।
  • ( सिर को कसकर बाँधने पर ), सिर में फाड़ता दर्द।
  • ( गतिविधि ), घुटनों में फाड़ता दर्द।
  • ( खुली हवा में सवारी करते समय ), सिर घूमना।

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