Cinnabaris
Adolph von Lippe द्वारा — Materia Medica के प्रमुख लक्षण और लाल रेखा लक्षण
सामान्य नाम: मर्क्यूरिक सल्फाइड।
जब उपदंश और साइकॉसिस का संयोग हो, तब यह एक उत्कृष्ट औषधि है (F.)।
नाक की जड़ पर दबाव, मानो वहाँ कोई भारी चश्मा रखा हो (D.)।
सिर में रक्त-संचय (Aur., Bell., Cact., Ferr., Gels., Glon., Lach., Meli., Nat-M., Op., Sulph., Verat-V.)।
चेहरा जामुनी-लाल (Bapt., Bell., Bry., Gels., Hyos., Op., Sang., Sec., Sulph., Verat-V.)।
पैरों में ठंडापन। दिन और रात।
जोड़ों में ठंडापन (Camph., Nat-M., Petr., Rhus-T., Sumb.)।
खुजली, विशेषकर जोड़ों के आसपास (F.)।
श्वेतप्रदर: रक्तमिश्रित, प्रचुर, पूययुक्त या पीला (K.)।
ब्यूबो (Ars., Bad., Bufo, Carb-An., Hep., Kali-M., Lyc., Merc., Nit-Ac., Sil.) (Br.)।
वृषण बढ़े हुए (Arg-N., Aur., Bar-M., Iod., Puls., Rhod., Sulph.) (Br.)।
अग्नि-जैसे लाल व्रण (Bl.)।
शिश्नमुण्ड के किरीट पर तीव्र खुजली।
कठोर शैंकर (Merc., Merc-C., Merc-I-F., Merc-I-R.) (K.)।
उपदंशीय व्रण (Ars., Aur., Hep., Kali-B., Lach., Merc., Merc-C,, Nit-Ac., Sulph., Thuj.)।
अग्रचर्म पर लालिमा और सूजन या मस्से, खुजली, रक्तस्राव और स्पर्श-संवेदनशीलता। (N.)।
शिश्नमुण्ड पर छोटे, चमकीले, लाल बिंदु।
शल्की उपदंशीय त्वचा-उद्भेद (Ars., Kali-Ars., Kali-Chl., Kreos., Merc., Nit-Ac., Sil.) (Bl.)।
आसानी से रक्तस्राव करने वाले कॉन्डिलोमा (Med., Nit-Ac., Sulph., Thuj.) (Br.)।
संध्या में तीव्र उत्थान (Alum., Bar-C., Cact., Fago, Nat-S., Phos.)।
अंजीर-जैसे मस्सों की पंखाकार होने की प्रवृत्ति होती है (F.)
चिड़चिड़ा, आसानी से उत्तेजित हो जाता है (Aur., Nit-Ac., Sulph.)।
रात में बिल्कुल नींद नहीं आती, किंतु प्रातः जागने पर उसे ऐसा लगता है मानो उसे नींद की कोई आवश्यकता ही न हो।
संध्या में स्वर बैठना (Carb-V., Caust., Phos.)।
गला सूजा हुआ और सूखा, टॉन्सिलों में सूजन तथा पश्च नासाछिद्रों में धागेनुमा श्लेष्मा, जो गले में उतरता है (Hydr., Kali-B.) (D.)।
नाक-ग्रसनी का प्रतिश्याय (Calc-S., Ferr-P., Hep., Kali-B., Lyc., Nat-C., Nat-M., Psor., Sep., Sil., Thuj.) (B.)।
सिलियरी तंत्रिकाशूल (Merc-C.) (D.)।
पिंडली की हड्डियों पर गांठें (G.)।
वेदना एक नेत्रकोण से आरंभ होकर आंख की भौंह के चारों ओर से होती हुई दूसरे नेत्रकोण तक जाती है (Gels., Ign., Mag-M., Merc-C., Nit-Ac., Phyt., Spig.) (D.)।
मुख और गले में अग्नि-जैसे दिखने वाले व्रण (Br.)।
जांघों के बीच अत्यधिक पसीना (Aur., Hep., Nux-V.), जो दुर्गंधयुक्त और संक्षारक होता है।
छाती दबी हुई और संकुचित प्रतीत होती है; शरीर को तानने से राहत मिलती है।
अत्यधिक लार-स्राव (Chin., Kali-I., Merc., Nit-Ac., Puls., Rhus-T.)
तीव्र सिरदर्द; वह तकिए से अपना सिर नहीं उठा सकता; बाहर से दबाव देने पर राहत मिलती है।
वृद्धि; संध्या में; रात में (पसीने को छोड़कर, जो मध्याह्न में अधिक होता है); सोने के बाद; दाहिनी करवट लेटने से; स्पर्श से; प्रकाश से; और नमी से।
शमन: खुली हवा में; दिन के मुख्य भोजन के बाद; और धूप में।
संबंध: तुलना करें: Carb-An., Hep., Kali-B., Kali-M., Merc., Merc-C., Nit-Ac., Sep., तथा Thuj।
प्रतिविष: Hep., तथा Sulph।
पूरक: Thuj।