Sepia officinalis
H. C. Allen द्वारा — Materia Medica की कुछ प्रमुख औषधियों के प्रमुख लक्षण और विशेषताएँ, तुलनाओं सहित
चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक संदर्भ। नीचे दिए गए कथन उल्लिखित लेखक की होम्योपैथिक शिक्षाओं को दर्शाते हैं और उपचार की प्रभावशीलता को प्रमाणित नहीं करते। यह पाठ चिकित्सकीय सलाह नहीं है और इसे उचित निदान या देखभाल का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
कटलफ़िश। (Mollusca.)
काले बालों और दृढ़ तंतु-संरचना वाले, किंतु सौम्य एवं सहज स्वभाव के व्यक्तियों के अनुकूल (Puls.)। स्त्रियों के रोग: विशेषतः वे, जो गर्भावस्था, प्रसवोत्तर काल और स्तनपान के दौरान होते हैं; अथवा ऐसे रोग, जिनके साथ अचानक घोर निर्बलता और मूर्छा छा जाने की अनुभूति हो (Murex, Nux m.); “धोबिन की औषधि।” वे शिकायतें, जो कपड़े धोने के काम से उत्पन्न होती हैं या उसके बाद बढ़ जाती हैं। पीड़ाएँ अन्य भागों से पीठ की ओर फैलती हैं (Sab. के विपरीत); इनके साथ सिहरन होती है (ठिठुरन के साथ, Puls.)। ठंडी हवा के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील, “बहुत आसानी से ठिठुर जाती है”; जीवन-ऊष्मा का अभाव, विशेषतः पुराने रोगों में (तीव्र रोगों में, Led.)। आंतरिक अंगों में गोला होने की अनुभूति; मासिक धर्म, गर्भावस्था अथवा स्तनपान के दौरान; कब्ज, दस्त, बवासीर, श्वेतप्रदर तथा गर्भाशय के सभी विकारों के साथ। आसानी से मूर्छित हो जाती है: भीगने के बाद; अत्यधिक गरमी या ठंड से; गाड़ी में सवारी करते समय; गिरजाघर में घुटनों के बल बैठे हुए। सिरदर्द के साथ शिरोबिंदु में ठंडापन (Ver. — शिरोबिंदु में गरमी, Calc., Graph., Sulph.)। चिंता: भय तथा चेहरे और सिर पर गरमी की लहरों के साथ; वास्तविक या काल्पनिक मित्रों के विषय में; गर्भाशय-संबंधी कष्टों के साथ। अत्यधिक उदासी और रोना। अकेले रहने का भय; पुरुषों का भय; मित्रों से मिलने का भय; गर्भाशय-संबंधी कष्टों के साथ। उदासीन: अपने परिवार तक के प्रति; अपने काम-धंधे के प्रति (Fl. ac., Phos. ac.); उनके प्रति भी, जिन्हें वह सबसे अधिक प्रेम करती है। लालची, कंजूस (Lyc.)। आलसी: कुछ भी करना नहीं चाहती, न काम न खेल; सोचने में भी परिश्रम प्रतीत होता है। सिरदर्द: भयंकर झटकों के रूप में; मासिक धर्म आने के समय, अल्प स्राव के साथ; नाजुक, संवेदनशील, हिस्टीरिया-प्रवृत्ति वाली स्त्रियों में; दबावकारी, फटने जैसी पीड़ा, गति, झुकने और मानसिक श्रम से <, बाहरी दबाव और लगातार जोरदार गति से >। बालों का अत्यधिक झड़ना, पुराने सिरदर्दों के बाद अथवा रजोनिवृत्तिकाल में। पीलापन: चेहरे का; नेत्रश्लेष्मला का; छाती पर पीले धब्बे; गालों और नाक के ऊपरी भाग पर काठी के आकार का पीला चिह्न; गर्भाशय के रोगों को प्रकट कर देने वाला चेहरा। गर्दन पर पहने सभी वस्त्र बहुत कसे हुए लगते हैं और उन्हें लगातार ढीला करना पड़ता है (Lach.)। शरीर के ऊपरी भाग पर अलग-अलग धब्बों में वलयाकार दाद (पूरे शरीर पर एक-दूसरे को काटते हुए वलयों में, Tell.)। माताओं में तोंद निकली होना (बच्चों में, Sulph.)। आमाशय के ऊपरी गड्ढे में खालीपन की पीड़ादायक अनुभूति, मानो “भीतर सब खाली हो गया हो”; खाने से आराम (Chel., Mur., Phos.)। जिह्वा मैली, किंतु हर बार मासिक धर्म आरंभ होने के समय साफ हो जाती है; स्राव बंद होने पर मैलापन लौट आता है; निचले होंठ में सूजन और दरारें। कब्ज: गर्भावस्था के दौरान (Alum.); मल कठोर, गांठदार, गोलियों के रूप में, अपर्याप्त और कठिनाई से निकलने वाला; मलत्याग के दौरान और उसके बहुत देर बाद तक मलाशय में पीड़ा (Nit. ac., Sulph.); गुदा में भार या गोला होने की अनुभूति, मलत्याग से > नहीं। मूत्र: लालिमा लिए मिट्टी के रंग की तलछट जमती है, जो पात्र से ऐसे चिपकी रहती है मानो जलकर उस पर जम गई हो; सड़ांधयुक्त, इतनी दुर्गंधयुक्त कि उसे कमरे से बाहर करना पड़ता है (कुछ समय रखा रहने पर अत्यंत दुर्गंधयुक्त, Indium)। अनैच्छिक मूत्रत्याग: बच्चा सोते ही लगभग तुरंत बिस्तर गीला कर देता है (Kreos.); हमेशा नींद के प्रथम चरण में। पुराना मूत्रमार्गीय स्राव: पीड़ारहित, पीला-सा, कपड़े पर दाग छोड़ने वाला; सुबह मूत्रमार्ग-मुख आपस में चिपका हुआ; हठी और बहुत पुराना (Kali iod.); जननांग दुर्बल और क्षीण। योनि में ऊपर की ओर जाती हुई तीव्र चुभन; गर्भाशय से नाभि तक फैलने वाली तीखी भेदक पीड़ाएँ। गर्भाशय और योनि का भ्रंश; ऐसा दबाव और नीचे की ओर जोर, मानो सब कुछ श्रोणि से बाहर निकल आएगा; इसे रोकने के लिए पैरों को कसकर एक-दूसरे पर चढ़ाकर “सिमटकर बैठना” पड़ता है; साथ में श्वास में घुटन (तुलना करें Agar., Bell., Lil., Murex, Sanic.)। मासिक धर्म की लगभग हर प्रकार की अनियमितता—समय से पहले, देर से, अल्प, अत्यधिक, मासिक धर्म का अभाव अथवा अत्यधिक मासिक रक्तस्राव—जब ऊपर बताए लक्षणों के साथ हो। गर्भावस्था की प्रातःकालीन मितली: भोजन को देखने या उसके विचार मात्र से जी मिचलाता है (Nux); पकते हुए भोजन की गंध से मितली होती है (Ars., Coch.)। श्वास-कष्ट: बैठने से, नींद के बाद और कमरे में <, नृत्य करने अथवा तेजी से चलने से >। असामान्य अतिउत्तेजना; तनिक-सी गति से गरमी की लहरें; चिंता और मूर्छा-जैसी निर्बलता के साथ; इसके बाद पूरे शरीर पर पसीना; रजोनिवृत्तिकाल में (Lach., Sang., Sulph., Tub.); ये लहरें श्रोणि-अंगों से ऊपर चढ़ती हैं। त्वचा में खुजली; विभिन्न भागों में; बाह्य जननांगों में; खुजलाने से >; और यह प्रायः जलन में बदल जाती है (Sulph.)।
संबंध। — पूरक: Natrum mur. विरोधी: Lach.; Sepia और Lach. को एक-दूसरे के पहले या बाद में नहीं देना चाहिए; Puls., जिसके साथ Sepia को कभी बारी-बारी से नहीं देना चाहिए। सदृश: Lach., Sang., Ustil., रजोनिवृत्तिकाल में रक्तसंचार की अनियमितताओं में। अक्सर Sil., Sulph. के बाद इसकी आवश्यकता पड़ती है। इसकी एक खुराक प्रायः कई सप्ताह तक उपचारकारी प्रभाव डालती है।
वृद्धि। — दोपहर या शाम को; ठंडी हवा अथवा सूखी पूर्वी हवा से; अतिशय संभोग से; आराम करते समय; उमसभरे नम मौसम में; आंधी-तूफान से पहले (Psor.)।
उपशमन। — बिस्तर की गरमी, गरम अनुप्रयोगों से; जोरदार व्यायाम से। अनेक लक्षण, विशेषतः सिर, हृदय और श्रोणि के लक्षण, आराम तथा व्यायाम—दोनों से < भी होते हैं और > भी। बैठे रहने की आदत वाले उन रोगियों में, जो अत्यधिक मानसिक श्रम से पीड़ित होते हैं, यह तंबाकू के अत्यधिक सेवन से उत्पन्न मानसिक प्रभावों का प्रतिकार करती है।