Oxalicum acidum
C.M. Boger द्वारा — Materia Medica की सारांश कुंजी
चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक संदर्भ। नीचे दिए गए कथन उल्लिखित लेखक की होम्योपैथिक शिक्षाओं को दर्शाते हैं और उपचार की प्रभावशीलता को प्रमाणित नहीं करते। यह पाठ चिकित्सकीय सलाह नहीं है और इसे उचित निदान या देखभाल का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
क्षेत्र
- पाचन-नली।
- नाभि।
- तंत्रिकाएँ: मेरुरज्जु। हृदय।
- बायाँ पार्श्व; फेफड़ा।
वृद्धि
- उसके बारे में सोचने से।
- ठंड से।
- स्पर्श से।
- दाढ़ी बनाने से।
- मानसिक परिश्रम से।
आराम
- मलत्याग के बाद।
सारे शरीर में दुर्बलता, शीतलता, नीलाभ वर्ण और सुन्नता; < निचले अंगों में। तीव्र दर्द; धारियों के रूप में, बिजली की कौंध जैसे, जगह-जगह, जलनयुक्त, आदि। तंत्रिकाशूल। .................... स्नायविक और निद्राहीन। चक्कर, मानो सब कुछ तैर रहा हो। सिर के चारों ओर पट्टी बँधी होने-सी अनुभूति। पश्चकपाल और पीठ में सुन्नपन के साथ सुई-सी चुभन। खट्टा स्वाद। कुतरने-जैसे खालीपन की अनुभूति। नाभि के आसपास मरोड़युक्त मलत्याग की हाजत, अथवा अनैच्छिक रूप से मटमैला-भूरा मल निकलना, < लेटने से। Oxaluria। वृषणों में स्पंदन होता है या वे कुचले हुए-से लगते हैं। मंद स्वर। दौरेदार, झटकेदार श्वसन। हर रात श्वासकष्ट। निचले (l), वक्ष से अधिजठर तक दर्द। हृद्स्पंदन, < लेटने से। वक्ष जकड़ा हुआ। Angina pectoris। पीठ शरीर को संभालने के लिए अत्यंत दुर्बल लगती है। मेरुदंड पर ऊपर की ओर ठंड रेंगती है। दुर्बल, काँपते हाथ-पाँव।
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